Pakistan: दूसरे देशों की नजर में शहबाज शरीफ का कोई वजन नहीं, सिर्फ दिखावे के प्रधानमंत्री?

Pakistan: दूसरे देशों की नजर में शहबाज शरीफ का कोई वजन नहीं, सिर्फ दिखावे के प्रधानमंत्री?

Pakistan: दूसरे देशों की नजर में शहबाज शरीफ का कोई वजन नहीं, सिर्फ दिखावे के प्रधानमंत्री?

सार

Pakistan: आलोचकों का कहना है कि जिस तरह जनरल बाजवा खुल कर दूसरे देशों की सरकारों से संपर्क कर रहे हैं, उससे शरीफ सरकार का रुतबा और घटा है। बाजवा ने शुक्रवार को यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल-नाहयान से फोन पर बातचीत की…

विस्तार

क्या शहबाज शरीफ पाकिस्तान के दिखावटी प्रधानमंत्री बन कर रह गए हैं? जिस ढंग से सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा ने सरकार की भूमिका अपने हाथ में ले ली है, उससे ये सवाल यहां उठा है। पाकिस्तान के अंदर सेना और खुफिया तंत्र का असल राज करते हैं, ये धारणा पहले से है। लेकिन अब विदेशी मामलों में भी जनरल बाजवा देश के वास्तविक शासक के रूप में व्यवहार कर रहे हैं। ताजा खबर यह है कि पाकिस्तान को वित्तीय सहायता दिलाने के लिए उन्होंने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से संपर्क किया है। इसके पहले उन्होंने इसी मकसद से अमेरिकी उप विदेश मंत्री वेंडी शरमन से बात की थी।

जनरल बाजवा की इस पहल को शरीफ सरकार की कम होती साख का संकेत समझा जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि जिस तरह जनरल बाजवा खुल कर दूसरे देशों की सरकारों से संपर्क कर रहे हैं, उससे शरीफ सरकार का रुतबा और घटा है। पाकिस्तानी मीडिया में छपी खबर के मुताबिक जनरल बाजवा ने शुक्रवार को यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल-नाहयान से फोन पर बातचीत की। उनकी सऊदी अरब के अधिकारियों से भी बातचीत हुई है।

पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ आर्थिक सहायता पाने की उम्मीद में अप्रैल में सऊदी अरब गए थे, लेकिन वहां से वे खाली हाथ लौट आए। लेकिन अब खबर है कि सऊदी अरब पाकिस्तान को मदद देने को तैयार हो गया है। यूएई अभी भी पाकिस्तान को कर्ज देने पर राजी नहीं है। लेकिन उसने पाकिस्तान में शेयर और जायदाद खरीदने की पेशकश की है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने शर्त लगाई है कि पाकिस्तान अगर अन्य स्रोतों से चार बिलियन डॉलर की मदद का इंतजाम करे, तो वह पाकिस्तान को 1.2 बिलियन डॉलर के कर्ज की किस्त देने पर विचार करने के लिए अपने बोर्ड की बैठक बुला सकता है। यहां पर्यवेक्षकों की राय है कि शरीफ सरकार को इस शर्त को पूरा करने में नाकाम साबित होते देख सेना ने कमान अपने हाथ में ली। लेकिन इससे ये धारणा और पक्की हुई है कि दूसरे देशों की सरकारें पाकिस्तान की असैनिक सरकार को गंभीरता से नहीं लेतीं। इसलिए वे मदद देने से पहले पाकिस्तान की सेना की गारंटी चाहती हैँ।

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने जनरल बाजवा की यूएई के राष्ट्रपति और सऊदी अरब के अधिकारियों से हुई बातचीत की पुष्टि की है। हालांकि उसके बयान में कहा गया कि यूएई के राष्ट्रपति ने हाल में पाकिस्तानी सेना के हेलीकॉप्टर के हुए हादसे पर दुख जताने के लिए जनरल बाजवा को फोन किया था। इस हादसे में छह सैनिक मारे गए थे।

अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि जनरल बाजवा को इसलिए दूसरे देशों के शासकों से बात करनी पड़ी है, क्योंकि संभवतः वे देश असैनिक सरकार के आश्वासन को स्वीकार करने को तैयार नहीं थे। अतीत में सऊदी अरब और यूएई पाकिस्तान की मदद के लिए आगे आते रहे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने कुछ शर्तों के आधार पर सहायता देने की बात कही है।

Source – Amar ujala

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