लोकतन्त्र के परिणाम Outcomes of Democracy

लोकतन्त्र के परिणाम     Outcomes of Democracy

 

♦ लोकतन्त्र शासन की अन्य व्यवस्थाओं से बेहतर है। तानाशाही और अन्य व्यवस्थाएँ ज्यादा दोषपूर्ण हैं।
♦ लोकतन्त्र सबसे बेहतर है क्योंकि यह
♦ नागरिकों में समानता को बढ़ावा देता है।
♦ व्यक्ति की गरिमा को बढ़ाता है।
♦ इससे फैसलों में बेहतरी आती है।
♦ टकरावों को टालने- सम्भालने का तरीका देता है और
♦ इसमें गलतियों को सुधारने की गुंजाइश होती है।
लोकतन्त्र के परिणाम
उत्तरदायी, जिम्मेवार और वैध शासन
♦ लोकतन्त्र में फैसलों को लागू करने या अन्य कार्यों में भले ही देर लगे, किन्तु यह अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं की तुलना में अधिक उत्तरदायी होता है।
♦ लोकतान्त्रिक सरकारें अधिक प्रभावशाली होती हैं।
♦ लोकतन्त्र में इस बात की पक्की व्यवस्था होती है कि फैसले कुछ कायदे-कानून के अनुसार होंगे और अगर कोई नागरिक यह जानना चाहे कि फैसले लेने में नियमों का पालन हुआ है या नहीं तो वह इसका पता कर सकता है। उसे यह न सिर्फ जानने का अधिकार है बल्कि उसके पास इसके साधन भी उपलब्ध हैं। इसे पारदर्शिता कहते हैं। यह चीज अक्सर गैर-लोकतान्त्रिक सरकारों में नहीं होती है।
♦ लोकतान्त्रिक सरकार नागरिकों को निर्णय प्रक्रिया में हिस्सेदार बनाने और खुद को उनके प्रति जवाबदेह बनाने वाली कार्यविधि भी विकसित कर लेती है।
♦ एक व्यापक धरातल पर लोकतान्त्रिक सरकारों से यह उम्मीद की जाती है कि वे लोगों की जरूरतों और माँगों का ध्यान रखने वाली हों और कुल मिलाकर भ्रष्टाचार से मुक्त शासन दें।
♦ लोकतान्त्रिक व्यवस्था वैध शासन व्यवस्था है। यह सुस्त हो सकती है, कम कार्य-कुशल हो सकती है, इसमें भ्रष्टाचार हो सकता है, यह लोगों की जरूरतों की कुछ हद तक अनदेखी कर सकती है लेकिन लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था लोगों की अपनी शासन व्यवस्था है। अपने लिए समर्थन पैदा करने की लोकतन्त्र की क्षमता भी लोकतन्त्र का एक परिणाम ही है और इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है।
आर्थिक संवृद्धि और विकास
♦ किसी भी देश का आर्थिक विकास वैश्विक स्थिति, अन्य देश से सहयोग और देश द्वारा तय की गई आर्थिक प्राथमिकताओं पर भी निर्भर करता है।
♦ तानाशाही वाले कम विकसित देशों और लोकतान्त्रिक व्यवस्था वाले कम विकसित देशों की बीच का अन्तर नगण्य सा है।
♦ तानाशाही और लोकतान्त्रिक शासन वाले देशों की आर्थिक विकास दर मे अन्तर भले ज्यादा हो लेकिन इसके बावजूद लोकतान्त्रिक व्यवस्था का चुनाव ही बेहतर है क्योंकि इसके अन्य अनेक सकारात्मक फायदे हैं।
असमानता और गरीबी में कमी
♦ लोकतान्त्रिक व्यवस्थाओं से यह उम्मीद रखना तर्कसंगत है कि आर्थिक असमानता को कम करेंगी।
♦ लोकतान्त्रिक व्यवस्था राजनीतिक समानता पर आधारित होती है।
♦ प्रतिनिधियों के चुनाव में हर व्यक्ति का वजन बराबर होता है। व्यक्तियो को राजनीतिक क्षेत्र में परस्पर बराबरी का दर्जा तो मिल जाता है लेकिन इसके साथ-साथ हम आर्थिक असमानता को भी बढ़ता हुआ पाते हैं।
♦ वास्तविक जीवन में लोकतान्त्रिक व्यवस्थाएँ आर्थिक असमानताओं को कम करने में ज्यादा सफल नहीं हो पाई हैं।
सामाजिक विविधताओं में सामंजस्य
♦ लोकतान्त्रिक व्यवस्थाएँ आमतौर पर अपने अन्दर की प्रतिद्वन्द्विताओं क सम्भालने की प्रक्रिया विकसित कर लेती हैं। इससे विभिन्न टकरावों के विस्फोटक या हिंसक रूप लेने का अंदेशा कम हो जाता है।
♦ कोई भी समाज अपने विभिन्न समूहों के बीच के टकरावों को पूरा तरह और स्थायी रूप से नहीं खत्म कर सकता, पर हम इन अन्तरों और विभेदों का आदर करना सीख सकते हैं और इनके बीच बातचीत से सामंजस्य बैठाने का तरीका विकसित कर सकते है। इस काम के लिए लोकतन्त्र सबसे अच्छा है।
नागरिकों की गरिमा और आजादी
♦ व्यक्ति की गरिमा और आजादी के मामले में लोकतान्त्रिक व्यवस्था किसी भी अन्य शासन प्रणाली से काफी आगे है।
♦ प्रत्येक व्यक्ति अपने साथ के लोगों से सम्मान पाना चाहता है, अक्सर, टकराव तभी पैदा होते हैं जब कुछ लोगों को लगता है कि उनके साथ सम्मान का व्यवहार नहीं किया गया। गरिमा और आजादी की चाह ही लोकतन्त्र का आधार है।
♦ लोकतन्त्र से लगाई गई उम्मीदों को किसी लोकतान्त्रिक देश के मूल्यांकन का आधार भी बनाया जा सकता है।
♦ लोकतन्त्र की एक खासियत है कि इसकी जाँच-परख और परीक्षा कभी खत्म नहीं होती है। वह एक जाँच पर खरा उतरे तो अगली जाँच आ जाती है। लोगों को जब लोकतन्त्र से थोड़ा लाभ मिल जाता है तो वे और लाभों की माँग करने लगते हैं। वे लोकतन्त्र से और अच्छा काम चाहते हैं।
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