हिन्द चीन में राष्ट्रवादी आंदोलन

हिन्द चीन में राष्ट्रवादी आंदोलन

History [ इतिहास ] लघु उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1. रासायनिक हथियारों एवं एजेन्ट ऑरेंज का वर्णन करें। अथवा, नापाम और एजेन्ट ऑरेंज क्या था ?

उत्तर ⇒ अमेरिका कम्बोडिया में जटरीला एवं वियतनाम में नापाम बम तथा एजेंट ऑरेंज रासायनिक हथियारों का उपयोग संघर्ष के दौरान किया जो अत्यंत घातक एवं पर्यावरण के लिए घातक थे। 1969 में अमेरिका ने कंबोडिया में ‘जटरीला’ नामक रासायनिक छिडकाव किया जिससे 40 हजार एकड़ रबर वृक्ष समाप्त हो गए।

नापाम बम : यह रासायनिक हथियार था जो एक तरह का आर्गेनिक कम्पाउण्ड है । यह अग्नि बमों में गैसोलिन के साथ मिलकर एक ऐसा मिश्रण तैयार करता था जो त्वचा से चिपक जाता था और जलता रहता था। इसका व्यापक पैमाने पर वियतनाम में प्रयोग किया गया था।

एजेंट-ऑरेंज : यह एक ऐसा जहर था जिससे पेड़ों की पत्तियाँ झुलस जाती थी एवं पेड़ मर जाते थे। अमेरिका इनका इस्तेमालं जंगलों के साथ खेतों और आबादी दोनों पर जमकर किया। इस जहर का असर आज भी नजर आता है जन्मजात विकलांगता एवं कैंसर के रूप में।


प्रश्न 2. हिन्द-चीन में फ्रांसीसी प्रसार का वर्णन करें ।

उत्तर ⇒  फ्रांसीसी कम्पनी हिन्द-चीन में प्रसार करने में सक्रिय था। फ्रांसीसी व्यापारियों के साथ-साथ पादरी. भी इस क्षेत्र में आने लगीं। 1747 ई. के बाद फ्रांस अन्नाम में रुचि लेने लगा। किन्तु अभी भी इस क्षेत्र में उसकी पकड़ कमजोर थी। उन्नीसवीं सदी में इस क्षेत्र में फ्रांसीसी पादरियों की बढ़ती गतिविधियों के विरुद्ध उग्र आंदोलन प्रारम्भ हो गया। इससे फ्रांस को अपनी सैन्य शक्ति के प्रयोग का बहाना मिला। उसने सैन्य बल के आधार पर 1862 ई. में अन्नाम को संधि के लिए बाध्य किया। इसी प्रकार 1863 ई. में कम्बोडिया पर तथा 1883 ई. में तोंकिन पर अधिकार कर लिया। इस प्रकार बीसवीं सदी की शुरुआत तक संपूर्ण हिन्द-चीन क्षेत्र फ्रांस के नियंत्रण में आ गया।


प्रश्न 3. अमेरिका हिन्द-चीन में कैसे दाखिल हआ. चर्चा करें।

उत्तर ⇒ अमेरिका दक्षिणी वियतनाम और हिंदचीन में बढ़ते साम्यवादी प्रभाव को रोकना चाहता था। वह पहले से ही वहाँ आर्थिक और सैनिक सहायता दे रहा था। राष्ट्रपति कैनेडी के शासनकाल में 1962 में अमेरिका ने दक्षिणी वियतनाम में सेना भेजकर प्रत्यक्ष रूप से युद्ध में भाग लिया।


प्रश्न 4. हो-ची-मिन्ह के विषय के संबंध में लिखें।

उत्तर ⇒ हो-ची-मिन्ह साम्यवाद से प्रभावित था। उसने 1925 ई. में ‘वियतनामी क्रांतिकारी दल’ का गठन किया एवं फ्रांसीसी साम्राज्यवाद से लड़ने के लिए कार्यकर्ताओं के सैनिक प्रशिक्षण की व्यवस्था की। 1930 ई. में राष्ट्रवादी गुटों को एकत्रित कर वियतनाम कांग सान देंग अर्थात् कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की । विश्वव्यापी आर्थिक मंदी एवं फ्रांसीसी सरकार की क्रूरता के कारण हो-ची-मिन्ह ने राष्ट्रवादी आंदोलन को तीव्र किया। द्वितीय विश्वयुद्ध में जापानी सेना के पराजित होने पर 2 सितम्बर, 1945 को उत्तरी वियतनाम को स्वतंत्र घोषित करते हुए डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ वियतनाम की स्थापना की।


प्रश्न 5. माई-ली गाँव की घटना क्या थी इसका क्या प्रभाव पड़ा ?

उत्तर ⇒ माई ली दक्षिणी वियतनाम में एक गाँव था जहाँ के लोगों को वियतकांग समर्थक मान अमेरिकी सेना ने पूरे गांव को घेरकर पुरुषों को मार डाला, औरतों बच्चियों को बंधक बनाकर कई दिनों तक सामूहिक बलात्कार किया फिर उन्हें भी मारकर पूरे गाँव में आग लगा दिया । लाशों के बीच दबा एक बूढ़ा जिन्दा बच गया। था जिसने इस घटना को उजागर किया था। माई-ली गाँव की घटना उजागर होने पर अमेरिकी सेना की आलोचना सम्पूर्ण विश्व में होने लगी।


प्रश्न 6. जेनेवा समझौता कब और किनके बीच हुआ ?

उत्तर ⇒ जेनेवा समझौता मई, 1954 ई० में हिन्द-चीन समस्या पर वार्ता हेतु बुलाये गये सम्मेलन में हुआ। इसमें वियतनाम को दो हिस्सों में बाँट दिया गया तथा लाओस तथा कम्बोडिया में वैध राजतंत्र को स्वीकार कर संसदीय शासन-प्रणाली को अपनाया गया।


प्रश्न 7. बाओदाई कौन था?

उत्तर ⇒ बाओदाई अन्नाम का राजा था। 1945 ई० में वियतनाम गणराज्य बन जाने के कारण 25 अगस्त, 1945 ई. को राजसिंहासन छोड़ लंदन में बस गया। – 1949 ई० में फ्रांस ने बाओदाई को सैनिक सहायता के साथ. दक्षिण वियतनाम का शासक बना दिया। बाओदाई स्वयं की कमजोर स्थिति को समझता था। जेनेवा समझौते के बाद भी बाओदाई प्रायः फ्रांस में ही रहता था।


प्रश्न 8. एकतरफा अनुबंध व्यवस्था क्या थी ?

उत्तर ⇒ एकतरफा अनुबंध व्यवस्था एक तरह की बंधुआ मजदूरी थी जिसमें मजदूरों को कोई अधिकार प्राप्त नहीं था, जबकि मालिक को असीमित अधिकार प्राप्त थे। रबर बागानों के खेतों एवं खानों में मजदूरों से एकतरफा अनुबंध व्यवस्था पर काम लिया जाता था।


प्रश्न 9. होआ-होआ आन्दोलन की चर्चा करें।

उत्तर ⇒ जेनेवा समझौते के बाद दक्षिण वियतनाम में गृहकलह की स्थिति बन गई। इसमें एक धार्मिक वर्ग होआ-होआ द्वारा चलाये जा रहे आन्दोलन की मुख्य . भूमिका थी। होआ-होआ आन्दोलन के काफी आक्रामक हो जाने पर न्यो-दिन्ह ने बड़ी क्रूरतापूर्वक इसे दबाया।


प्रश्न 10. हिन्द-चीन का अर्थ क्या है ?

उत्तर ⇒ हिन्द-चीन का तात्पर्य तत्कालीन 2.8 लाख वर्ग कि. मी. में फैले उस प्रायद्वीपीय क्षेत्र से है जिसमें आज के वियतनाम, लाओस ओर कम्बोडिया के क्षेत्र आते हैं। इनकी उत्तरी सीमा म्यांमार एवं चीन को छूती है। दक्षिण में चीन सागर है और इसके पश्चिम में भी म्यांमार का क्षेत्र पड़ता है।


प्रश्न 11. हो-ची-मिन्ह मार्ग क्या है ?

उत्तर ⇒ वियतनामियों की रसद सप्लाई मार्ग हो-ची-मिन्ह मार्ग था। वस्तुतः हो-ची-मिन्ह मार्ग हनोई से चलकर लाओस, कम्बोडिया के सीमा क्षेत्र से गुजरता हुआ दक्षिणी वियतनाम तक जाता था जिससे सैकड़ों कच्ची पक्की सड़कें पूरे वियतनाम निकलकर जुड़ी थीं। अमेरिका सैकड़ों बार इसपर बमबारी कर चुका था, परन्तु वियतकांग एवं उसके समर्थित लोग तुरंत उसकी मरम्मत कर लेते थे। इसी मार्ग पर नियंत्रण के चक्कर में अमेरिका ने लाओस-कम्बोडिया पर आक्रमण भी कर दिया था परन्तु तीनतरफा संघर्ष में फंसकर उसे वापस होना पड़ा था।


प्रश्न 12. हिन्द-चीन में यूरोपीय व्यापारिक कम्पनियों के आगमन का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ 1570 ई. में मलक्का को केन्द्र बनाकर पुर्तगाली हिन्द-चीनी देशों के साथ व्यापार करने लगे। तत्पश्चात् डच, ब्रिटिश और फ्रांसीसी कंपनियों का इस क्षेत्र में आगमन हुआ।


प्रश्न 13. लाओस एवं कम्बोडिया पर भारतीय प्रभाव का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ लाओस एवं कम्बोडिया पर भारतीय संस्कृति का प्रभाव पड़ा । इस क्षेत्र में बौद्ध धर्म एवं हिन्दू धर्म दोनों का प्रसार हुआ । चौथी सदी में स्थापित कम्बोज राज्य के शासक भारतीय मूल के थे। अतः, कम्बोज भारतीय संस्कृति का प्रधान केन्द्र बना । बारहवीं सदी में राजा सूर्यवर्मन ने प्रसिद्ध अंकोरवाट के मंदिर का निर्माण करवाया। यह हिन्दू धर्म का विश्व में सबसे बड़ा मंदिर है। सोलहवीं सदी में कंबोज का पतन हो गया और इसके बाद वहाँ आंतरिक अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो गयी।


प्रश्न 14. जेनेवा समझौता के प्रावधानों का वर्णन करें।

उत्तर ⇒  जेनेवा समझौता के प्रावधान –

(i) 17वीं अक्षांश रेखा द्वारा वियतनाम को दो भागों में विभाजित कर दिया गया।
(ii) लाओस एवं कम्बोडिया में राजतंत्र को संवैधानिक राजतंत्र में बदल दिया गया, अर्थात् संसदीय शासन-प्रणाली अपनायी गयी।
(iii) 1956 के मध्य के पहले सम्पूर्ण वियतनाम का चुनाव द्वारा एकीकरण करएक सरकार का गठन किया जाए यदि जनता ऐसा चाहे।
(iv) जेनेवा समझौता के क्रियान्वयन की देखभाल के लिए एक त्रिसदस्यीय अंतर्राष्ट्रीय निगरानी आयोग का गठन किया गया जिसके सदस्य भारत, कनाडा एवं पोलैण्ड थे।

 

History ( इतिहास ) दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. हिंद-चीन में राष्ट्रवाद के विकास का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ हिंद-चीन में राष्ट्रवाद के विकास में विभिन्न तत्त्वों का योगदान था, जिनमें औपनिवेशिक शोषण की नीतियों तथा स्थानीय आंदोलनों ने काफी बढ़ावा दिया। 20 वीं शताब्दी के शुरुआत में यह विरोध और मुखर होने लगा। उसी परिपेक्ष्य में 1903 ई० में फान-बोई-चाऊ ने ‘दुई तान होई’ नामक एक क्रांतिकारी संगठन की स्थापना की जिसके नेता कुआंग दें थे। फान-बोई-चाऊ ने “द हिस्ट्री ऑफ द लॉऑफ वियतनाम” लिखकर हलचल पैदा कर दी।

1905 में जापान द्वारा रूस को हराया जाना हिंद-चीनियों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया। साथ ही रूसो एवं मांटेस्क्यू जैसे फ्रांसीसी विचारकों के विचार भी इन्हें उद्वेलित कर रहे थे। इसी समय एक-दूसरे राष्ट्रवादी नेता फान-चू-त्रिन्ह हुए जिन्होंने राष्ट्रवादी आंदोलन के राजतंत्रीय स्वरूप की गणतंत्रवादी बनाने का प्रयास किया। जापान में शिक्षा प्राप्त करने गए छात्र इसी तरह के विचारों के समर्थक थे। इन्हीं। छात्रों ने वियतनाम कुवान फुक होई (वियतनाम मुक्ति एसोसिएशन) की स्थापना की। हालाँकि हिंद-चीन में प्रारंभिक राष्ट्रवाद का विकास कोचिन-चीन, अन्नाम, तोकिन जैसे शहरों तक ही सीमित था, परंतु जब प्रथम विश्वयुद्ध शुरू हुआ तो इन्हीं प्रदेशों के हजारों लोगों को सेना में भर्ती किया गया, हजारों मजदूरों को बेगार के। लिए फ्रांस ले जाया गया। युद्ध में हिंद-चीनी सैनिकों की ही बड़ी संख्या में मृत्यु हुई। इन सब बातों की तीखी प्रतिक्रिया हिंद-चीनी लोगों पर हुई और 1914 ई० में ही देशभक्तों ने एक “वियतनामी राष्ट्रवादी दल” नामक संगठन बनाया 1930 के दशक की विश्वव्यापी आर्थिक मंदी ने भी राष्टवाद के विकास में । योगदान किया।


2. हिन्द-चीन उपनिवेश स्थापना का उद्देश्य क्या था ?

अथवा, हिन्द-चीन में फ्रांसीसियों द्वारा उपनिवेश स्थापना के किन्ही तान उद्देश्यों का उल्लेख करें।

उत्तर ⇒ फ्रांस द्वारा हिन्द-चीन में उपनिवेश स्थापना के उद्देश्य इस प्रकार थे

(i) व्यापारिक प्रतिस्पर्धा – फ्रांस द्वारा हिन्द-चीन में उपनिवेश स्थापना का मुख्य उद्देश्य डच एवं ब्रिटिश कंपनियों के व्यापारिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना था। भारत में फ्रांसीसी पिछड़ रहे थे तथा चीन में उनके व्यापारिक प्रतिद्वंद्वी मुख्यतः अंग्रेज थे। अतः सुरक्षात्मक आधार के रूप में उन्हें हिन्द-चीन का क्षेत्र उचित लगा जहाँ से वे भारत एवं चीन दोनों तरफ कठिन परिस्थितियों को संभाल सकते थे।

(ii) कच्चे माल तथा बाजार की उपलब्धता- औद्योगिक क्रांति के बाद विभिन्न उद्योगों के सुचारुपूर्वक संचालन के लिए भारी मात्रा में कच्चा माल तथा तैयार उत्पादों की खपत हेतु बाजार की आवश्यकता थी। अतः इन दोनों आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उपनिवेश की स्थापना आवश्यक हो गई।

(iii) गोरे होने का दायित्व – यूरोपीय गोरे लोगों का यह स्वघोषित दायित्व था कि वे पिछड़े काले लोगों के समाज को सभ्य बनाएँ। वे इसे ईश्वर प्रदत्त दायित्व समझते थे।इसके अतिरिक्त कैथोलिक धर्म का प्रचार भी उपनिवेश स्थापना का एक उद्देश्य था।


3. माई-ली गाँव की घटना क्या थी ? इसका क्या प्रभाव पड़ा ?

उत्तर ⇒1968 में युद्ध के दौरान दक्षिण वियतनाम के एक गाँव माई-ली में लोमहर्षक घटना घटी। अमेरिकी सेना ने अपनी पराजय की बौखलाहट में इस गाँव पर आक्रमण कर दिया। पूरे गाँव को घेरकर पुरुषों को मार दिया गया। स्त्रियाँ, यहाँ तक कि बच्चियों के साथ सामूहिक बलात्कार कर उनकी भी हत्या कर दी गई। उसके बाद पूरे गाँव को आग लगाकर जला दिया गया। समाचार-पत्रों ने इस घटना का विवरण छापा। इससे अमेरिका के प्रति तीखी प्रतिक्रिया हुई तथा अमेरिकन प्रशासन की कटु आलोचना हुई।

प्रभाव- अमेरिका ने वियतनामी युद्ध में जो नीति अपनाई उसकी तीखी भर्त्सना हुई। अमेरिका में ही नागरिक सरकारी नीतियों के विरोधी हो गए। वियतनाम में अमेरिका की विफलता स्पष्ट हो गयी। उसे न तो वियतनामी जनता का समर्थन मिला और न ही वियतनामियों के प्रतिरोध को दबा सका। अमेरिकी धन-जन की भी क्षति हुई। वियतनामी युद्ध को “पहला टेलीविजन युद्ध” कहा गया। युद्ध के लोमहर्षक दृश्यों को देखकर अमेरिका और राष्ट्रपति निक्सन की सर्वत्र आलोचना होने लगी। बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय दबाव और आलोचना के वशीभूत राष्ट्रपति निक्सन ने 1970 में शांति वार्ता के लिए “पाँच सत्री प्रस्ताव” प्रस्तुत किया।


4. वियतनाम के स्वतंत्रता संग्राम में हो ची मिन्ह के योगदान का मूल्यांकन करें।

उत्तर ⇒ वियतनामी स्वतंत्रता के नेता हो ची मिन्ह थे। उनका मूल नाम नगूयेन सिन्ह कुंग था। वे गूयेन आई क्वोक के नाम से जाने जाते थे। उनका जन्म 19 मई, 1890 को मध्य वियतनाम के एक गाँव के गरीब परिवार में हुआ था। उन्होंने पेरिस और मास्को में शिक्षा ग्रहण की थी। वे मार्क्सवादी विचारधारा से गहरे रूप से प्रभावित थे। उनका मानना था कि संघर्ष के बिना वियतनाम को आजादी नहीं मिल सकती है। फ्रांस में रहते हुए 1917 में उन्होंने वियतनामी साम्यवादियों का एक गुट बनाया। लेनिन द्वारा कॉमिन्टन की स्थापना के बाद वे इसके सदस्य बन गए। साम्यवाद से प्रेरित होकर 1925 में उन्होंने वियतनामी क्रांतिकारी दल का गठन किया। फरवरी, 1930 में हो ची मिन्ह ने वियतनाम के विभिन्न समूह के राष्ट्रवादियों को एकजुट किया। स्वतंत्रता संघर्ष प्रभावशाली ढंग से चलाने के लिए उन्होंने 1930 में वियतनामी कम्युनिस्ट पार्टी (वियतनाम कांग सान देंग) की स्थापना की। यह दल उग्र विचारधारा का समर्थक था। इस दल का नाम बाद में बदलकर इंडो-चाइनिज कम्युनिस्ट पार्टी कर दिया गया। इसी दल के अधीन और हो ची मिन्ह के नेतृत्व में वियतनाम ने स्वतंत्रता प्राप्त की।


5. वियतनाम में साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष में महिलाओं की भूमिका की विवेचना करें।

उत्तर ⇒ वियतनाम के राष्ट्रवादी आंदोलन में महिलाओं की भूमिका काफी महत्त्वपूर्ण थी। युद्ध और शांति दोनों काल में उन. लोगों ने पुरुषों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर सहयोग किया। स्वतंत्रता संग्राम में वे विभिन्न रूपों में भाग लेने लगी; छापामार योद्धा के रूप में; कली के रूप में अथवा नर्स के रूप में। समाज ने उनकी १२ मूमका को सराहा और इसका स्वागत किया। वियतनामी राष्ट्रवाद के विकास के साथ स्त्रियाँ बड़ी संख्या में आंदोलनों में भाग लेने लगी। स्त्रियों को राष्ट्रवादी धारा में आकृष्ट करने के लिए बीते वक्त की वैसी महिलाओं का गुणगान किया जान लगा। जिन लोगों ने साम्राज्यवाद का विरोध करते हुए राष्ट्रवादी आंदोलनों में भाग लिया था। राष्ट्रवादी नेता फान बोई चाऊ ने 1913 में ट्रंग बहनों के जीवन पर एक नाटक लिखा। इन बहनों ने वियतनाम पर चीनी आधिपत्य के विरुद्ध होने वाले युद्ध में भाग लिया। युद्ध में पराजय निकट देखकर इन लोगों ने हथियार डालने की बजाय आत्महत्या कर ली। इस नाटक ने वियतनामी समाज पर गहरा प्रभाव डाला। ट्रंग बहने वीरता और देशभक्ति की प्रतीक बन गई। ट्रंग बहनों के समान त्रियुआयू का भी महिमागान किया गया। उसे देश के लिए शहीद होनेवाली देवी के रूप में प्रस्तुत किया गया। इससे वियतनामी स्त्रियों के ऊपर गहरा प्रभाव पड़ा। इनसे प्रेरणा लेकर बड़ी संख्या में स्त्रियाँ स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने लगी।


6. फ्रांसीसी शोषण के साथ-साथ उसके द्वारा किये गये सकारात्मक कार्यों की समीक्षा करें।

उत्तर ⇒ हिंद-चीन में फ्रांसीसी अपनी प्रभुसता स्थापित करने के बाद वहाँ अनेक तरह से शोषण जारी रखा, साथ ही कुछ सकारात्मक कार्य भी किये गए। सर्वप्रथम फ्रांसीसियों ने शोषण के साथ-साथ कृषि की उत्पादकता बढ़ाने के लिए नहरों एवं जल निकासी का समुचित प्रबंध किया और दलदली भूमि, जंगलों आदि में कृषि क्षेत्र को बढ़ाया जाने लगा। इन प्रयासों का ही फल था कि 1931 ई० तक वियतनाम विश्व का तीसरा बड़ा चावल निर्यातक देश बन गया। कृषि के विकास के अतिरिक्त फ्रांसीसी सरकार ने संरचनात्मक विकास के लिए अनेक परियोजनाएँ आरंभ की। यह कार्य आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के अतिरिक्त प्रशासनिक और सैनिक उद्देश्य से भी किया गया। एक विशाल रेल नेटवर्क द्वारा पूरे इंडो-चाईना को जोड़ दिया गया। बंदरगाहों का भी विकास किया गया। सड़कों का जाल-सा विछा दिया गया। फलस्वरूप 1920 के दशक तक व्यापार-वाणिज्य का काफी विकास हुआ जिसका लाभ फ्रांसीसियों ने उठाया। फ्रांसीसियों ने सोची-समझी नीति के अनुरूप वियतनाम में अपनी नई शैक्षणिक नीति लागू की। जहाँ तक शिक्षा का प्रश्न था अब तक परंपरागत स्थानीय भाषा अथवा चीनी भाषा में शिक्षा पा रहे लोगों को अब फ्रांसीसी भाषा में शिक्षा दी जाने लगी। 1907 में वियतनाम में टॉकिन फ्री स्कूल स्थापित किए गए। इनका उद्देश्य वियतनामियों को पश्चिमी शिक्षा दिलाना था।


7. कंबोडिया के इतिहास में नरोत्तम सिंहानुक की भूमिका का उल्लेख कीजिए।

उत्तर ⇒ लाओस के समान कंबोडिया को भी 1954 के जेनेवा समझौता के अनुसार स्वतंत्रता मिली। कंबोडिया में नरोत्तम सिंहानुक को शासक बनाया गया। उसने तटस्थतावादी नीति अपनाई तथा वामपंथियों एवं दक्षिणपंथियों के संघर्ष से अपने को अलग रखा। अमेरिका ने उसे अपने प्रभाव में लाने का प्रयास किया तथा थाइलैंड ने कंबोडिया में अशांति फैलाने की कोशिश की। अतः सिंहानुक ने चीन और जर्मनी से संबंध बढ़ाए। इससे कुपित होकर अमेरिका ने कंबोडिया पर बमबारी की और 1970 में दक्षिण पंथियों की सहायता से उसे पदच्युत कर दिया। सिंहानुक ने पंकिंग में अपनी सरकार बनाई तथा दक्षिणपंथी शासक लोन नोल के विरुद्ध संघर्ष आरंभ कर दिया। लोन नोल की सहायता के लिए अमेरिका ने सेना भेज दी। 1975 में सिंहानुक की लाल खमेर सेना ने राजधानी नाम पेन्ह पर अधिकार कर लिया। स्वदेश लौटकर सिंहानुक 1975 में राष्ट्राध्यक्ष बने। 1978 में उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया।


8. अमेरिकी वियतनामी युद्ध में हो ची मिन्ह भूलभुलैया मार्ग की क्या भूमिका थी ?

उत्तर ⇒ अमेरिकी वियतनाम युद्ध में हो ची मिन्ह मार्ग की काफी महत्त्वपूर्ण का थी। यद्यपि अमेरिकी फौज ने इस मार्ग को बाधित करने तथा इसे नष्ट करने भी काफी प्रयास किया। इस मार्ग पर बम भी बरसाए गए, परंतु वियतनामियों ने मार्ग को बनाए रखा। इसको क्षतिग्रस्त होने पर इसकी तत्काल मरम्मत कर ली होती थी। उत्तर से दक्षिण वियतनाम तक सैनिक साजो-सामान और रसद पहुँचाने के लिए वियेतमिन्ह द्वारा हो ची मिन्ह ‘भूल भुलैया मार्ग’ का सहारा लिया गया। यह मार्ग वियतनाम के बाहरी इलाकों में लाओस और कंबोडिया होता हुआ उनी वियतनाम से दक्षिणी वियतनाम पहुँचता था। अनुमानतः प्रतिमाह बीस हजार उत्तरी वियतनाम के योद्धा इस मार्ग द्वारा दक्षिणी वियतनाम पहुँचते थे। इस मार्ग में स्थान-स्थान पर विद्रोही वियतनामियों ने सैनिक छावनियाँ और युद्ध में घायलों की चिकित्सा के लिए चिकित्सालय बनवा रखे थे। इसी मार्ग द्वारा रसद और अन्य आवश्यक सामग्रियाँ भेजी जाती थी। ज्यादातर सामानों की ढुलाई महिला-कुली करती थी। इसी मार्ग पर नियंत्रण करने के उद्देश्य से अमेरिका लाओस एवं कम्बोडिया पर आक्रमण भी कर दिया था, परंतु तीन तरफा संघर्ष में फंस कर उसे वापस होना पड़ा था।

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