हिंदुस्तान के तासीर का कोई तोड़ नहीं है, पूरी दुनिया का अजीम मुल्क है हिंदुस्तान:- प्रो० जितेंद्र नारायण।

हिंदुस्तान के तासीर का कोई तोड़ नहीं है, पूरी दुनिया का अजीम मुल्क है हिंदुस्तान:- प्रो० जितेंद्र नारायण।

हिंदुस्तान के तासीर का कोई तोड़ नहीं है, पूरी दुनिया का अजीम मुल्क है हिंदुस्तान:- प्रो० जितेंद्र नारायण।

महारानी रामेश्वरी महिला महाविद्यालय, दरभंगा में “भारतीय लोकतंत्र:- अवसर व चुनौतियां” विषय पर आयोजित हुआ एकदिवसीय सेमिनार।

● कुछ तो बात है कि हिंदुस्तान की हस्ती मिटती ही नहीं।

 

लनामिवि दरभंगा स्थानीय महारानी रामेश्वरी महिला महाविद्यालय, दरभंगा के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा एक दिवसीय सेमिनार “भारतीय लोकतंत्र:- अवसर और चुनौतियां” विषय पर प्रधानाचार्य प्रो० रूपकला सिन्हा की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।*

बतौर मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष सह सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो० जितेंद्र नारायण ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदुस्तान ही नहीं दुनिया के किसी भी लोकतांत्रिक देश में अगर अवसर है तो चुनौतियां भी है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता है लेकिन हिंदुस्तान के तासीर में कुछ तो बात है कि इसकी हस्ती कभी मिटती नहीं। आप संसदीय व्यवस्था की जननी इंग्लैंड को ही देख लें कि वहां महिलाओं को वोट देने का अधिकार भारत में लोकतंत्र के स्थापना के बाद मिला। आज दुनिया में देखा जाता है कि महिलाएं या पुरुष एक दूसरे के समस्या को समझ नहीं पाते हैं लेकिन भारतीय लोकतंत्र में अर्धनारीश्वर की अवधारणा आज भी व्याप्त है ताकि एक-दूसरे के समस्याओं व दुखों को समझ सके। ये रवायत दुनिया के किसी भी मुल्क में आपको नहीं मिलेगा। भ्रम की स्थिति में कई लोगों का मान्यता है कि भारत का संविधान कट, कॉपी और पेस्ट है लेकिन भारतीय संविधान की प्रकृति ठीक उसके उलट है। हिंदुस्तान ने अपनी आवश्यकताओं, विविध संस्कृतियों व क्षमताओं के हिसाब से अपने संविधान को ग्रहण किया न कि किसी कतरन के रूप में। “सा विद्या या विमुक्तये” से भारतीय दर्शन की पहचान है। इस्लाम धर्म को देखे तो इस्लाम में भी दुनिया में बदलाव सूफिज्म के दौर में हिंदुस्तान में ही हुआ। शास्त्रार्थ की संस्कृति हिंदुस्तान में ही विद्यमान है।

आप नेल्सन मंडेला और अंबेदकर को उदाहरण के रूप में ले सकते हैं। अंबेदकर को नेल्सन मंडेला से कम झंझावतों को झेलना पड़ा। यह भारतीय लोकतंत्र में ही हो सकता है। अनादिकाल से ही यहां राज्य अपरिहार्य है। प्रेस की आजादी हो या अभिव्यक्ति की आजादी दुनिया के किसी भी मुल्क से बेहतर हिंदुस्तान की स्थिति है। हिंदुस्तान की राजनीति में राष्ट्रीय दलों के साथ-साथ क्षेत्रीय दलों की भी भरमार है लेकिन आपलोगों को आश्वस्त करता हूँ कि कोई भी दल राजनीति में विभिन्न प्रयोग कर लें लेकिन हिंदुस्तान की सत्ता पर एकाधिकार करने की सोचना भ्रम पालने के समान है। जिसका उदाहरण आपने नेहरू जी और इंदिरा जी के सत्ता को देखा और पढ़ा है। उपासना पद्धति भारतीय संस्कृति का सनातनकाल से हिस्सा रहा है। भारतीय लोकतंत्र में क्षेत्रीय दलों की भी अहम भूमिका है जो इसकी खुबसूरती है। आप देखेंगे भारतीय लोकतंत्र में मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक को कुछ विशेषाधिकार प्राप्त जरूर है लेकिन राष्ट्र के किसी भी नकारात्मक गतिविधियों के लिये नहीं बल्कि सकारात्मक गतिविधियों के लिये। राजतंत्र में भी प्रजातंत्र का भाव दुनिया में अगर कहीं देखने को मिला तो वह अजीम मुल्क हिंदुस्तान ही है।

अगर हम भारत में लोकतंत्र के स्थापना से पहले राजतंत्र की भी बात करें तो भारत में राजा सर्वोच्च रहा लेकिन कभी निरंकुश नहीं। भारतीय वैदिक शासन से लेकर आचार्य चाणक्य तक के कालखंड में भारतीय राजतंत्र में यही व्यवस्था थी कि राजा या राजकुमार योग्य नहीं होगा तो वो राजा नहीं होगा। आगे अगर भारतीय लोकतंत्र की चुनौतियों को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया की कोई भी व्यवस्था पूर्ण नहीं होती है जनतंत्र की प्रणाली में दोष से इनकार नहीं किया जा सकता है लेकिन यह भारतीय लोकतंत्र की ही खुबसूरती है कि हिंदुस्तान के दर्शन में फूल और कांटे दोनों को स्वीकार किया गया है। किसी भी चुनौतियों से निकलने का माद्दा हिंदुस्तान रखता है चाहे वो देश के विभाजन विभीषका के बावजूद भारत का पुनर्निर्माण हो, हरित क्रांति हो, वस्तु सेवा कर प्रणाली को लागू करना हो या विसंगतियों से भरी धाराओं को खत्म करना हो या कोरोनाकाल में वैक्सीन निर्माण हो। भारतीय लोकतंत्र में राजनेता बंटे हुए हो सकते हैं लेकिन समाज व सिस्टम नहीं यही कारण है कि भारत में गलत मंसूब रखने वाले ना कभी कामयाब हुए हैं और ना कभी कामयाब हो सकते हैं। अगर पूरे सार के रूप में कहें तो हिंदुस्तान के तासीर का कोई तोड़ नहीं है। पूरी दुनिया का अजीम मुल्क है हिंदुस्तान।*

*अंत में अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो० गजाला उर्फी, महाविद्यालय की छात्रा तनु, आम्रपाली, निशा कौर, खुशी कर्ण व अर्पिता मिश्रा आदि ने प्रश्नोत्तरी काल में कई प्रश्न पूछे जिनका जवाब देकर प्रो० नारायण ने उनके जिज्ञासा को शांत किया।*

*सेमिनार में सैकड़ों छात्राओं ने शिरकत की। इस दौरान सभी विभाग के शिक्षक व शिक्षिकाएं उपस्थित थी। प्रधानाचार्य प्रो० रूपकला सिन्हा ने पाग व चादर देकर प्रो० जितेंद्र नारायण का स्वागत किया। राजनीति विभाग की ओर से विभागीय शिक्षिका डॉ० नीतू कुमारी के द्वारा मिथिला पेंटिंग स्वरूप भगवान शिव व पार्वती की पेंटिंग उन्हें भेंट की गयी। कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय की छात्रा दिव्या कुमारी ने सरस्वती वंदना से किया। विषय प्रवेश राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ० ऋचा गौतम ने किया जबकि मंच संचालन अंग्रेजी विभाग की विभागीय शिक्षिका डॉ० शैलजा ने पूरे जोश व जुनून के साथ सफलतापूर्वक किया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो० गजाला उर्फी ने की।*

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