सत्ता की साझेदारी

सत्ता की साझेदारी

अध्याय का सार

शासन कार्य एक जटिल प्रक्रिया होती है। ऐसा शासन जितना लोगों की सहमति से जुड़ा होता है, वह व्यवस्था उतनी ही लोकतांत्रिक होती है। लोकतंत्र में शासन-कार्य अपने-अपने अनुभव का आभास देता है। अलग-अलग देशों में लोकतंत्रीय शासन का अनुभव अलग-अलग होता है। ऐसे अनुभव में बेल्जियम व श्रीलंका के अनुभवों का उल्लेख सत्ता की साझेदारी के रूप में उदाहरण हेतु लिया जा सकता है। बेल्जियम व श्रीलंका दोनों देशों में विभिन्न प्रकार की जाति-समूह हैं। बेल्जियम में डच, फ्रांसीसी व जर्मन भाषाएँ बोलने वाली जातियाँ हैं; श्रीलंका में सिंहली व तमिल प्राजातियाँ हैं। बेल्जियम के लोकतांत्रिक माडल में शासन शक्ति की बाँट कुछ इस प्रकार की गयी है कि शासन शक्तियों के प्रयोग में सभी जातियों के समान अधिकार हैं। दूसरी ओर श्रीलंका में लोकतंत्र के बहुसंख्यक नियम के अनुरूप बहुसंख्यकों का शासन है। बेल्जियम में विभिन्न सामाजिक समुदायों में सत्ता की साझेदारी के कारण सामाजिक एकता है जबकि श्रीलंका में समुदायों में समुदायों में मतभेदों के चलते कुछेक तनाव बने रहे हैं।

लोकतांत्रीय सरकार सत्ता के केन्द्रीकरण के विपरीत सत्ता के विकेन्द्रीकरण पर जोर देती है। विकेन्द्रित व्यवस्था अपेक्षाकृत अधिक लोकतांत्रिक होती है। सत्ता की बाँट कई तरीकों से हो सकती है:
(i) सरकार के विभिन्न अंगों अर्थात् विधानपालिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका में सत्ता की बाँट हो ताकि कोई भी एक अंग मनमानापन न कर सके;
(ii) सरकार की विभिन्न इकाईयों केन्द्रीय, प्रान्तीय व स्थानीय-के पास सत्ता का अलग-अलग अंश हो ताकि प्रत्येक प्रकार की सरकार अपने से सम्बद्ध कार्यों को करती रहे;
(iii) सत्ता की बाँट समाज में विभिन्न समूहों में हो अर्थात बेल्जियम मॉडल की सामुदायिक सरकार हो;
(iv) सत्ता की बाँट सशक्त दलों, दबाव-समूहों व आन्दोलनों द्वारा प्रभावित व नियन्त्रित हो अर्थात गठबन्धनीय सरकारों की व्यवस्था हो जिन पर समाज के अन्य अनेक समूहों जैसे-व्यापारियों, किसानों, विद्यार्थियों आदि का शासन-संचालन में प्रभाव हो।

सत्ता की साझेदारी Important Questions and Answers

प्रश्न-1
बेल्जियम में जातीय बनावट का विवरण दीजिए।
उत्तर-
फ्लेमिश इलाके के डच बोलने वाले लोग : 59% वेलोनिया क्षेत्र के फ्रेंच बोलने वाले लोग : 40% जर्मन बोलने वाले लोग

प्रश्न-2
बेल्जियम की राजधानी की जातीय बनावट बताइए।
उत्तर-
बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स का जातीय बनावट इस प्रकार है : फ्रेंच बोलने वाले लोग 80% है जबकि डच भाषा बोलने वाले लोगों की संख्या 20% है।

प्रश्न-3
भारत के संदर्भ में श्रीलंका की भौगोलिक स्थिति क्या है?
उत्तर-
श्रीलंका भारत के दक्षिण में स्थित है।

प्रश्न-4
क्या सत्ता का बँटवारा सत्ता के टुकड़े होते हैं?
उत्तर-
सत्ता की बाँट सत्ता की साझेदारी होती है, उसका टुकड़ों में बाँट नहीं।

प्रश्न-5
श्रीलंका में सिंहली जाति के लोग कुल जनसंख्या का कितना भाग हैं?
उत्तर-
74%

प्रश्न-6
श्रीलंका में तमिल लोग कुल जनसंख्या का कितना भाग है?
उत्तर-
18%। इनमें श्रीलंकाई मूल के तमिल 13% है जबकि भारत मूल के तमिल 5%

प्रश्न-7
सिंहली-भाषी लोगों का सम्बन्ध किस धर्म से
उत्तर-
बौद्ध धर्म से।

प्रश्न-8
तर्क दीजिए कि सरकार के मंत्री किन्हीं सामाजिक समूहों के आधार पर बनाए जाएँ।
उत्तर-
सामाजिक समूहों की संख्या के अनुपात में मन्त्रियों की नियुक्ति सामाजिक एकता बनाए रखने में सहायता करती है।

प्रश्न-9
गृहयुद्ध किसे कहते हैं?
उत्तर-
किसी देश में सरकार विरोधी समूहों की हिंसक लड़ाई गृहयुद्ध होती है।

प्रश्न-10
2005 में जर्मनी में जो चुनाव हुए उनमें किस राजनीतिक दल को बहुमत प्राप्त हुआ था?
उत्तर-
जर्मनी में 2005 में हुए चुनावों में किसी भी राजनीतिक दल को बहुमत प्राप्त नहीं हुआ था।

प्रश्न-11
जर्मनी के राजनीतिक दलों मे दो प्रमुख दलों के नाम बताइए।
उत्तर-
(1) क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक पार्टी (2) सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी।। प्रश्न-ख़लील के पिता का सम्बन्ध किस धर्म से था? उत्तर-आर्थोडक्स ईसाई धर्म से। प्रश्न-खलील की माँ का सम्बन्ध किस धर्म से था? उत्तर-ख़लील की माँ सुन्नी मुखलमान थी। प्रश्न-लेबनान की राजधानी का नाम बताइए। उत्तर-बेरूत। प्रश्न-विधानपालिका का मुख्य कार्य क्या है? उत्तर-कानूनों का निर्माण करना।

प्रश्न-12
अगर आपको लेबनान का कानून फिर से लिखने का अधिकार दिया जाए तो आप क्या करना चाहेंगे?
उत्तर-
लेबनान में गृहयुद्ध की स्थिति को बचाने के लिए वहाँ के बुजुर्गों ने कुछेक नियम बनाकर सत्ता बाँट करने की व्यवस्था को स्वीकृति दी थी। परन्तु ऐसा सब कुछ लोकतांत्रिक नहीं था। सामाजिक समूहों में एकता बनाने के लिए परस्पर ताल-मेल की आवश्यकता है। परन्तु इसे लोकतांत्रिक रूप दिया जाना चाहिए एवं निर्वाचन व्यवस्था लाने हेतु नए कानून बनाने की ज़रूरत है।

प्रश्न-13
बेल्जियम में कौन-से जातीय समूह अल्पसंख्यक हैं? डच-भाषा बहुसंख्यक समुदाय की स्थिति बताइए।
उत्तर-
बेल्जियम में फ्रेंच-भाषी जातीय समूह अल्पसंख्यक से है। इस भाषा के बोलने वाले लोग बेल्जियम का कुल आबादी के केवल 40% लोग हैं। परन्तु अल्पसंख्यक फ्रेंच-भाषी लोग तुलनात्मक रूप से ज़्यादा समृद्ध और ताकतवर रहे हैं। बहुत बाद में जाकर आर्थिक विकास और शिक्षा का लाभ पाने वाले डच-भाषी लोगों को इस स्थिति से नाराज़गी थी। डच-भाषी लोग जनसंख्या से अधिक थे परन्तु, धन व समृद्धि के मामले में फ्रेंच-भाषी लोग सशक्त थे।

प्रश्न-14
श्रीलंका में तमिल-भाषा अल्पसंख्यक लोग देश के किस क्षेत्र में आबाद हैं? उनका सम्बन्ध किस ध म से है?
उत्तर-
श्रीलंका में तमिल-भाषा अल्पसंख्यक लोग देश के उत्तर व पूर्वी प्रान्तों में आबाद हैं। इनमें अधिकतर का सम्बन्ध हिन्दू व इस्लाम धर्म से है। कुछेक ईसाई लोग भी हैं जिनकी संख्या कुल जनसंख्या का सात प्रतिशत है। वह सिंहाली भी बोलते हैं तथा तमिल भी। तमिल बोलने वाले 18% लोगों 13% श्रीलंकाई हैं तथा शेष भारतीय मूल के तमिल।

प्रश्न-15
तमिल-भाषा लोगों की क्या माँगें हैं?
उत्तर-
श्रीलंका में तमिल-भाषा लोगों ने अपने राजनीतिक दलों के माध्यम से निम्नलिखित माँगें रखी हुई हैं
(1) तमिल भाषा को राजभाषा बनाया जाए;
(2) क्षेत्रीय स्वायतता दी जाए।
(3) अन्य जातीय-समूहों के समान शिक्षा व रोजगार की सुविधाएँ/अवसर दिए जाएँ।
(4) 1980 के दशक में तमिल ईलम (सरकार) बनाने की माँग की थी।

प्रश्न-16
बेल्जियम में वह कौन-से प्रयास किए गए हैं जिनके कारण जातीय एकता बनाया रखा जा सके?
उत्तर-

(1) केन्द्र सरकार में मुख्य भाषा बोलने वालों को मन्त्रिमण्डल में एक-समान प्रतिनिधित्व दिया। .
(2) ऐसे कानून बनाए गए हैं कि कोई भी एक जातीय समूह एक तरफा फैसला न कर सके।
(3) केन्द्रीय सरकार की अनेक शक्तियाँ देश के दो क्षेत्रों की क्षेत्रीय सरकारों को दी गयी हैं जो केन्द्र सरकार से अलग __ शासन करती हैं।
(4) बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में बनी सरकार में दोनों जातीय समूहों को एक समान प्रतिनिधित्व प्राप्त हैं।

प्रश्न-17
बेल्जियम की सामुदायिक सरकार के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर-
बेल्जियम में केन्द्रीय और राज्य सरकारों के अलावा एक तीसरे स्तर की सरकार भी काम करती है यानी सामुदायिक सरकार। इस सरकार का चुनाव एक ही भाषा बोलने वाले लोग करते हैं। डच फ्रेंच और जर्मन बोलने वाले समुदायों के लोग चाहे वे जहाँ भी रहते हों, इस सामुदायिक सरकार को चुनते हैं। इस सरकार को संस्कृति, शिक्षा भाषा जैसे मसलों पर फैसले लेने का अधिकार है।

प्रश्न-18
यूरोपीय देशों ने यूरोपीय संघ का मुख्यालय ब्रुसेल्स को क्यों चुना?
उत्तर-
बेल्जियम जातीय एकता का एक महत्त्वपूर्ण उदाहरण है। प्रायः अनेक देशों में रहने वाले अलग-अलग जातियों के लोग एक-दूसरे से लड़ते रहते हैं। परन्तु बेल्जियम के डच व फ्रेंच-भाषी लोगों के समुदाय जातीय एकता का प्रमाण देते हुए एक-साथ मिल-जुलकर रहते हैं। इसी जातीय एकता के कारण यूरोपीय संघ का मुख्यालय ब्रसेल्स को चुना गया।

प्रश्न-19
श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद व उसके प्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
बहुसंख्यकवाद से अर्थ उस व्यवस्था से है जहाँ तक बहुसंख्यक वर्ग अपने बहुमत के कारण शासन करते हुए मनमानापन कर सकता है तथा अल्पसंख्यकों के हितों की अनेदेखी करता है। श्रीलंका इसका एक उदाहरण है। सन् 1948 में श्रीलंका स्वतंत्र राष्ट्र बना। सिंहली समुदाय के नेताओं ने अपनी बहुसंख्या के बल पर शासन पर प्रभुत्व जमाना चाहा। इस वजह से लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार ने सिंहली समुदाय की प्रभुता कायम करने के लिए अपनी बहुसंख्यक-परस्ती के तहत कई कदम उठाए।
(i) 1956 में एक कानून बनाया गया जिसके तहत तमिल को दरकिनार करके सिंहली को एकमात्र राजभाषा घोषित कर दिया गया।
(ii) विश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में सिंहलियों को प्राथमिकता देने की नीति भी चली।
(iii) नए संविधान में यह प्रावधान किया गया कि सरकार बौद्ध मत को संरक्षण और बढ़ावा देगी।

इन सरकारी फैसलों ने श्रीलंकाई तमिलों की नाराजगी और शासन को लेकर उनमें बेगानापन बढ़ाया। उन्हें लगा कि बौद्ध धर्मावलंबी सिंहलियों के नेतृत्व वाली सारी राजनीतिक पार्टियाँ उनकी भाषा और संस्कृति को लेकर असंवेदनशील हैं। उन्हें लगा कि संविधान और सरकार की नीतियाँ उन्हें समान राजनीतिक अधिकारों से वंचित कर रही है। परिणाम यह हुआ कि तमिल व सिंहली समुदायों में सम्बन्ध बिगड़ने लगे।
श्रीलंका में दो समुदायों के बीच पारस्परिक अविश्वास ने बड़े टकराव का रूप ले लिया। यह टकराव गृहयुद्ध में परिणत हुआ। परिणामस्वरूप दोनों पक्ष के हजारों लोग मारे जा चुके हैं।
अनेक परिवार अपने मुल्क से भागकर शरणार्थी बन गए हैं। .. इससे भी कई गुना ज्यादा लोगों की रोजी-रोटी चौपट हो गई है।

प्रश्न-20
परस्पर जातीय तत्वों के उन्मूलन व जातीय एकता लाने हेतु बेल्जियम में क्या प्रभाव किए गए? उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर-
बेल्जियम के नेताओं ने श्रीलंका से अलग रास्ता अपनाने का फैसला किया। उन्होंने क्षेत्रीय अंतरों और सांस्कृतिक विविधता को स्वीकार किया। 1970 और 1993 के बीच उन्होंने अपने संविधान में चार संशोधन सिर्फ इस बात के लिए किए कि देश में रहने वाले किसी भी आदमी को बेगानेपन का अहसास न हो और सभी मिल-जुलकर रह सकें। उन्होंने इसके लिए जो व्यवस्था की वह बहुत की कल्पनाशील है उसकी कुछ मुख्य बातें निम्नलिखित हैं-

1. संविधान में इस बात का स्पष्ट प्रावधान है कि केंद्रीय सरकार में डच और फ्रेंच-भाषी मंत्रियों की संख्या समान रहेगी। कुछ विशेष कानून तभी बन सकते हैं जब दोनों भाषायी समूह के सांसदों का बहुमत उसके पक्ष में हो। इस प्रकार किसी एक समुदाय के लोग एक तरफ फैसला नहीं कर सकते।
2. केंद्र सरकार की अनेक शक्तियाँ देश के दो इलाकों की क्षेत्रीय सरकारों को सुपुर्द कर दी गई है यानी राज्य सरकारें केंद्रीय सरकार के अधीन नहीं है।
3. ब्रूसेल्स में अलग सरकार है और इसमें दोनों समुदायों का समान प्रतिनिधित्व है। फ्रेंच-भाषी लोगों ने ब्रूसेल्स में समान प्रतिनिधित्व के इस प्रस्ताव को स्वीकार किया क्योंकि डच-भाषी लोगों ने केंद्रीय सरकार में बराबरी का प्रतिनधित्व स्वीकार किया
था।
4. ऐसी व्यवस्था से अलग-अलग एक सामुदायिक सरकार की भी रचना की गयी है जो सभी भाषी लोगों द्वारा चुनी जाती __ है तथा जिसका मुख्य कार्य शिक्षा व भाषा के मामलों पर निर्णय लेना है।

प्रश्न-21
आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में सत्ता की साझेदारी के विभिन्न रूप बताइए।
उत्तर-
आधुनिक लोकतांत्रिक व्ययवस्थाओं में सत्ता की साझेदारी के विभिन्न रूपों में कुछेक का निम्नलिखित का वर्णन किया जा सकता है
1. शासन के विभिन्न अंग, जैसे विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच सत्ता का बँटवारा रहता है। इसे हम सत्ता का क्षैतिज वितरण कहेंगे क्योंकि इसमें सरकार के विभिन्न अंग एक ही स्तर पर रहकर अपनी-अपनी शक्ति का उपयोग करते हैं। ऐसे बँटवारे से यह सुनिश्चित हो जाता है कि कोई भी एक अंग सत्ता का असीमित उपयोग नहीं कर सकता। हर अंग दूसरे पर अंकुश रखता है। इससे विभिन्न संस्थाओं के बीच सत्ता का संतुलन बनता है। हमारे देश में कार्यपालिका सत्ता का उपयोग करती ज़रूर है पर यह संसद के अधीन कार्य करती है; न्यायपालिका की नियुक्ति कार्यपालिका करती है पर न्यायपालिका ही कार्यपालिका पर और विधायिका द्वारा बनाए कानूनों पर अंकुश रखती है। इस व्यवस्था को ‘नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था’ भी कहते हैं।

2. सरकार के बीच भी विभिन्न स्तरों पर सत्ता का बँटवारा हो सकता है : जैसे, पूरे देश के लिए एक सामान्य सरकार हो और फिर प्रांत या क्षेत्रीय स्तर पर अलग-अलग सरकार रहे। पूरे देश के लिए बनने वाली ऐसी सामान्य सरकार को अक्सर संघ या केंद्र सरकार कहते हैं, प्रांतीय या क्षेत्रीय स्तर की सरकारों को हर जगह अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है। भारत में हम
इन्हें राज्य सरकार कहते हैं। हर देश में बँटवारा ऐसा ही नहीं है। कई देशों में प्रांतीय या क्षेत्रीय सरकारे नहीं हैं। लेकिन हमारी तरह, जिन देशों में ऐसी व्यवस्था है वहाँ के संविधान में इस तथ्य को स्पष्ट किया जाता है। राज्य सरकारों से नीचे के स्तर की सरकारों के लिए भी ऐसी ही व्यवस्था हो सकती है। नगरपालिकाएँ और पंचायतें ऐसी ही इकाइयाँ हैं। उच्चतर और निम्नतर स्तर की सरकारों के बीच सत्ता के ऐसे बँटवारे को उर्ध्वाधर वितरण कहा जाता है।

3. सत्ता का बँटवारा विभिन्न सामाजिक समूहों, मसलन, भाषायी और धार्मिक समूहों के बीच भी हो सकता है। बेल्जियम में ‘सामुदायिक सरकार’ इस व्यवस्था का एक अच्छा उदाहरण है। कुछ देशों के संविधान और कानून में इस बात का प्रावध न है कि सामाजिक रूप से कमजोर समुदाय और महिलाओं को विधायिका और प्रशासन में हिस्सेदारी दी जाए।
4. सत्ता के बँटवारे का एक रूप हम विभिन्न प्रकार के दबाव-समूह और आंदोलनों द्वारा शासन को प्रभावित और नियंत्रित करने के तरीके में भी लक्ष्य कर सकते हैं। लोकतंत्र में लोगों के सामने सत्ता के दावेदारों के बीच चुनाव का विकल्प होता है। समकालीन लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में यह विकल्प पार्टियों के रूप में उपलब्ध होता है। पार्टियाँ सत्ता के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा करती हैं। पार्टियों की यह आपसी प्रतिद्वंद्विता ही इस बात को सुनिश्चित करती है कि सत्ता एक व्यक्ति या समूह के – हाथ में न रहे। प्रायः सत्ता बारी-बारी से अलग-अलग विचारध परा और सामाजिक समूहों वाली पार्टियों के हाथ आती-जाती रहती है। कई बार सत्ता की यह भागीदारी एकदम प्रत्यक्ष दिखती है क्योंकि दो या अधिक पार्टियाँ मिलकर चुनाव लड़ती हैं या सरकार का गठन करती हैं। लोकतंत्र में हम व्यापारी, उद्योगपति, किसान और औद्योगिक मजदूर जैसे कई संगठित हित-समूहों को भी सक्रिय देखते हैं। सरकार की विभिन्न समितियों में सीध ी भागीदारी करके या नीतियों पर अपने सदस्य-वर्ग के लाभ के लिए दबाव बनाते हुए ऐसे समूह सत्ता में भागीदारी करते हैं।

सत्ता की साझेदारी Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में सत्ता की साझेदारी के अलग-अलग तरीके क्या हैं? इनमें से प्रत्येक का एक उदाहरण भी दें।
उनर-
आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में सत्ता की साझेदारी के अनेक तरीकों में निम्नलिखित का उल्लेख किया जा सकता है:

  • सत्ता का सरकार के विभिन्न अंगों द्वारा प्रयोग किया जाना-सरकार के तीन अंगों-विधानपालिका कार्यपालिका व न्यायपालिका-में सत्ता की बाँट सत्ता की साझेदारी का एक तरीका है: विधानपालिका कानून बनाती है, कार्यपालिका उन कानूनों को कार्य रूप देती है तथा न्यायपालिका कानूनों की अवहेलना करने वालों को दण्ड देती है। प्रायः सभी लोकतांत्रिक देशों में ऐसी व्यवस्था पायी जाती है।
  • सत्ता को सरकार की किन्हीं इकाईयों में बाँट-सत्ता का कुछ भाग केन्द्रीय सरकार के पास तथा दूसरा भाग प्रान्तीय सरकारों को देने की व्यवस्था सत्ता की साझेदारी का एक अन्य तरीका है। संघीय राष्ट्रों जैसे भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका आदि देशों में सत्ता की बाँट की ऐसी ही व्यवस्था है।
  • सत्ता को विभिन्न सामाजिक समूहों में बँटवारा-संविध नि द्वारा सत्ता को समाज के विभिन्न समूहों में बाँटने की व्यवस्था सत्ता के साझेदारी का एक अन्य तरीका है। बेल्जियम में केन्द्रीय सरकार के मन्त्रियों में आधे मंत्री फ्रेंच-भाषायी व आधे मंत्री डच-भाषायी मंत्री हैं।
  • सत्ता को कुछेक दलों व समूहों व आन्दोलनों में बाँटना-जब किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी राजनीतिक दल को सरकार बनाने हेतु पूर्ण बहुमत नहीं मिलता, तब कुछेक राजनीतिक दल गठबंधन सरकार की रचना करते हैं। भारत में 2004 तथा उससे पूर्व 1999 में बनी सरकारें मिली-जुली सरकारों का उदाहरण थीं। ऐसी गठबंधनीय सरकारों पर अनेकों समूहों का प्रभाव सदैव रहता है।

प्रश्न 2.
भारतीय संदर्भ में सत्ता की हिस्सेदारी का एक उदाहरण देते हुए इसका एक युक्तिपरक और एक नैतिक कारण बताएँ।
उत्तर-
‘युक्तिपरक’ तत्व का अर्थ होता है : समझ से काम लेना तथा तर्क के आधार पर कार्य करना; नैतिक तत्व में युक्तिपरक तर्क नहीं होता, अपितु अंतर्भूत महत्त्व का तत्व होता है। भारत में केन्द्र में बनी सरकार (1999 से 2004 के संदर्भ में) युक्तिपरक आधार पर बनी हुई है। इन दोनों वर्षों में लोकसभा चुनावों में किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। अतः समझदारी इस तथ्य में थी कि गठबंधन द्वारा मिली-जुली सरकार बनायी जाए। तो, ऐसी सरकार बनायी गयी। सत्ता की हिस्सेदारी के इस युक्तिपरक कारण के साथ एक नैतिक कारण भी जोड़ी जा सकता है : विभिन्न क्लों के माध्यम से सरकार का निर्माण इस नैतिक इस नैतिक तत्व का संकेत है कि जिस दल को जितना समर्थन प्राप्त हो, उसे सरकार में उतना प्रतिनिधि त्व मिलना चाहिए।

प्रश्न 3.
इस अध्याय को पढ़ने के बाद तीन छात्रों ने अलग-अलग निष्कर्ष निकाले। आप इनमें से किससे सहमत हैं और क्यों? अपना जवाब करीब 50 शब्दों में दें।
थम्मन-जिन समाजों में क्षेत्रीय, भाषायी और जातीय आधार पर विभाजन हो सिर्फ वहीं सत्ता की साझेदारी जरूरी है।
मथाई-सत्ता की साझेदारी सिर्फ ऐसे बड़े देशों के लिए उपयुक्त है जहाँ क्षेत्रीय विभाजन मौजूद होते हैं।
औसेफ-हर समाज में सत्ता की साझेदारी की ज़रूरत होती है भले ही वह छोटा हो या उसमें सामाजिक विभाजन न हों।
उत्तर-
औसेफ द्वारा दिए गए निष्कर्ष से सहमति हो सकती है। लोकतंत्र लोगों की सरकार होती है तथा लोगों द्वारा अथवा उनके प्रतिनिधित्वों द्वारा संचालित की जानी चाहिए। समाज में सत्ता का केन्द्रीकरण लोकतंत्र के विरुद्ध माना गया है। सत्ता की साझेदारी में सत्ता का विकेन्द्रित भाव होता है। समाज में प्रत्येक छोटे-बड़े सामाजिक समूह को सत्ता में हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।

प्रश्न 4.
बेल्जियम में ब्रूसेल्स के निकट स्थित शहर मर्चटेम के मेयर ने अपने यहाँ के स्कूलों में फ्रेंच बोलने पर लगी रोक को सही बताया है। उन्होंने कहा कि इससे डच भाषा न बोलने वाले लोगों को इस फ्लेमिश शहर के लोगों से जुड़ने में मदद मिलेगी। क्या आपको लगता है कि यह फैसला बेल्जियम की सत्ता की साझेदारी की व्यवस्था की मूल भावना से मेल खाता है? अपना जवाब करीब 50 शब्दों में लिखें।
उत्तर-
मर्चटेम के मेयर द्वारा वहाँ के स्कूलों में फ्रेंच बोलने पर रोक लगाकर जो तर्क दिया वह बेल्जियम की सत्ता की साझेदारी की व्यवस्था की मूल भावना से मूल खाता है। जहाँ सामाजिक प्रजातियाँ होती हैं, समझदारी इस तथ्य में है कि मेल-मिलाप की भावना अनुसार सामाजिक एकता को बनाए रखते हुए सत्ता में साझेदारी पर जोर दिया जाना चाहिए, यदि ऐसा न किया जाए तो सामाजिक तनाव व हिंसक गतिविधियाँ बढ़ सकती हैं तथा समाज ग्रहयुद्ध की ओर बढ़ सकता है।

प्रश्न 5.
नीचे दिए गए उदाहरण को गौर से पढ़ें और इसमें सत्ता की साझेदारी के जो युक्तिपरक कारण बताए गए हैं उसमें से किसी एक का चुनाव करें।
“महात्मा गाँधी के सपनों को साकार करने और अपने संविधान निर्माताओं की उम्मीदों को पूरा करने के लिए हमें पंचायतों को अधिकार देने की ज़रूरत है। पंचायती राज ही वास्तविक लोकतंत्र की स्थापना करता है। यह सत्ता उन लोगों के हाथों में सौंपता है जिनके हाथों में इसे होना चाहिए। भ्रष्टाचार कम करने और प्रशासनिक कुशलता को बढ़ाने का एक उपाय पंचायतों को अधिकार देना भी है। जब विकास की योजनाओं को बनाने और लागू करने में लोगों की भागीदारी होगी तो इन योजनाओं पर उनका नियंत्रण बढ़ेगा। इससे भ्रष्ट बिचौलियों को खत्म किया जा सकेगा। इस प्रकार पंचायती राज लोकतंत्र की नींव को मजबूत करेगा।”
उत्तर-
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय लोगों के हाथों में सत्तादिया जाना सत्ता की साझेदारी का युक्तिपरक तर्क होता है। स्थानीय लोगों को अपने स्थान के प्रशासन का अधिकार दिया जाना ही समझदारी है।

प्रश्न 6.
सत्ता के बँटवारे के पक्ष और विपक्ष में कई तरह के तर्क दिए जाते हैं। इनमें से जो तर्क सत्ता के बँटवारे के पक्ष में हैं उनकी पहचान करें और नीचे दिए गए कोड से अपने उत्तर का चुनाव करें।
सत्ता की साझेदारीः
(क) विभिन्न समुदायों के बीच टकराव को कम करती है।
(ख) पक्षपात का अंदेशा कम करती है। (ग) निर्णय लेने की प्रक्रिया को अटका देती है। (घ) विविधताओं को अपने में समेट लेती है। (ङ) अस्थिरता और आपसी फूट को बढ़ाती है। (च) सत्ता में लोगों की भागीदारी बढ़ाती है। (छ) देश की एकता को कमजोर करती है।
(सा) क ख घ च
(रे) क ग ङ च
(गा) क ख घ छ
(मा) ख ग च छ
उत्तर-
‘सा’ कोड सही है।

प्रश्न 7.
बेल्जियम और श्रीलंका की सत्ता में साझेदारी की व्यवस्था के बारे में निम्नलिखित बयानों पर विचार करें:
(क) बेल्जियम में डच-भाषी बहुसंख्यकों ने फ्रेंच-भाषी अल्पसंख्यकों पर अपना प्रभुत्व जमाने का प्रयास किया।
(ख) सरकार की नीतियों ने सिंहली-भाषी बहुसंख्यकों का प्रभुत्व बनाए रखने का प्रयास किया।
(ग) अपनी संस्कृति और भाषा को बचाने तथा शिक्षा तथा रोजगार में समानता के अवसर के लिए श्रीलंका के तमिलों ने सत्ता को संघीय ढाँचे पर बाँटने की माँग की।
(घ) बेल्जियम में एकात्मक ‘सरकार की जगह संघीय शासन व्यवस्था लाकर मुल्क को भाषा के आधार पर टूटने से बचा लिया गया।
ऊपर दिए गए बयानों में से कौन-से सही हैं?
(सा) क, ख, ग और घ (रे) क, ख और घ (गा) ग और घ (मा) ख, ग और घ
उत्तर-
‘मा’ कोड सही है।

प्रश्न 8.
सूची 1 [सत्ता के बँटवारे के स्वरूप] और सूची’2 [शासन के स्वरूप] में मेल कराएँ और नीचे दिए गए कोड का उपयोग करते हुए सही जवाब दें:
HBSE 10th Class Social Science Solutions Civics Chapter 1 सत्ता की साझेदारी 1


उत्तर-
‘सा’ सही कोड है।

प्रश्न 9.
सत्ता की साझेदारी के बारे में निम्नलिखित दो बयानों पर गौर करें और नीचे दिए गए कोड के आध र पर जवाब दें:
(अ) सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र के लिए लाभकर
(ब) इससे सामाजिक समूहों में टकराव का अंदेशा घटता है।
इस बयानों में कौन सही है और कौन गलत?
(क) अ सही है लेकिन ब गलत है।
(ख) अ और ब दोनों सही हैं।
(ग) अ और ब दोनों गलत हैं।
(घ) अ गलत है लेकिन ब सही है।
उत्तर-
‘ग’ सही है जबकि अन्य सभी गलत हैं।

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