मछली

मछली

Hindi ( हिंदी )

लघु उतरिये प्रश्न

प्रश्न 1. संतू मछली लेकर क्यों भागा ?

उत्तर ⇒ संतु मछली लेकर कुएँ में डालने के लिए भागा ताकि मछली जिन्दा होकर बड़ी हो जाए।


प्रश्न 2. मछली और दीदी में क्या समानता दिखलाई पड़ी? स्पष्ट करें।

उत्तर ⇒ आदमी के चंगुल में आकर मछली कटने को विवश थी। पानी के अभाव में अंगोछा में लिपटी मछली लहरा रही थी। दीदी कमरा में करवट लिए, पहनी हुई साड़ी को सर तक ओढ़े, सिसक-सिसक कर रो रही थी। हिंचकी लेते ही दीदी का पूरा शरीर सिहर उठता था। दीदी का सिहरना एवं मछली का लहराना दोनों में समानता दिखलाई पड़ी।


प्रश्न 3. मछलियों को लेकर बच्चों की अभिलाषा क्या थी ?

उत्तर ⇒ मछलियों को लेकर बच्चों के मन में अभिलाषा थी कि एक मछली पिताजी से माँगकर उसे कुएँ में डालकर बहुत बड़ी करेंगे।


प्रश्न 4. मछली को छूते हुए संतू क्यों हिचक रहा था ?

उत्तर ⇒ संतु मछलियों को छूते हुए हिचक रहा था, क्योंकि उसे डर था कि मछली काट लेगी।


प्रश्न 5. मछलियाँ लिए घर आने के बाद बच्चों ने क्या किया ?

उत्तर ⇒ मछलियाँ घर लाने के बाद बच्चों ने नहानघर में भरी हुई बाल्टी को आधी करके उसमें मछलियों को रख दिया।


प्रश्न 6. झोले में मछलियाँ लेकर बच्चे दौड़ते हुए पतली गली में क्यों घुस गए ?

उत्तर ⇒ झोले में मछलियाँ लेकर बच्चे दौड़ते हुए पतली गली में घुस गए, क्योंकि इस गली से घर नजदीक पड़ता था। दूसरे रास्तों में बहुत भीड़ थी।


प्रश्न 7. दीदी कहाँ थी और क्या कर रही थी ?

उत्तर ⇒ दीदी घर के एक कमरे में थी । वह लेटी हुई थी और सिसक-सिसककर रो रही थी। वह बार-बार हिचकी ले रही थी जिससे उसका शरीर सिहर उठता था ।


प्रश्न 8. संतू क्यों उदास हो गया ?

उत्तर ⇒ संतू यह जानकर उदास हो गया था कि मछली कुछ देर बाद कट जायेगी। वह मछली को जीवित पालना चाहता था। मछली को बिछुड़ते हुए जानकर वह दुःखी हो गया।


प्रश्न 9 . अरे-अरे कहता हआ भग्गू किसके पीछे भागा और क्यों ?

उत्तर ⇒ अरे अरें कहता हुआ भग्गू संतू के पीछे भागा क्योंकि संतू एक मछली को लेकर भाग रहा था । भग्गू को डर था कि संतू मछली को कुआँ में डाल देगा । जिसके चलते उसे डाँट पड़ेगी। संतू से मछली लेने के लिए वह उसके पीछे भागा।


प्रश्न 10. मछली के बारे में दीदी ने क्या जानकारी दी थी? बच्चों ने उसकी परख कैसे की ?

उत्तर ⇒ मछली के बारे में दीदी ने जानकारी दी थी कि मरी हुई मछली की आँख में अपनी परछाईं नहीं दिखती है। बच्चों ने उसकी परख एक मृत मछली की आँख में झाँककर की।


प्रश्न 11. घर में मछली कौन खाता था और वह कैसे बनायी जाती थी ?

उत्तर ⇒ घर में मछली केवल पिताजी खाते थे। मछली को उस घर का नौकर काटता था। उसे काटने के लिए अलग पाटा था। पहले मछली को पत्थर पर पटककर मार दिया जाता था, फिर राख से मलने के बाद पाटा पर रखकर चाकू से काटा जाता था। मछली बनाने का कार्य नहानघर में होता था।


प्रश्न 12. पिताजी किससे नाराज थे और क्यों ?

उत्तर ⇒ पिताजी नरेन से नाराज थे। क्योंकि, बच्चे मछलियों के चलते स्वयं परेशान रहे साथ ही भग्गू को भी परेशान किया । बच्चे मछली को पालना चाहते थे, कोमल बालमन मछली को कटते देख विह्वल हो उठा और बच्चा एक मछली को लेकर भाग गया। पीछे-पीछे भग्गू को भागना पड़ा। छीना-झपटी की स्थिति आई। पिताजी इन हरकतों के कारण नाराज हुए।


दीर्घ उतरिये प्रश्न

प्रश्न 1. कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट करें।

उत्तर ⇒ ‘मछली’ शीर्षक कहानी में एक किशोर की स्मृतियाँ, दृष्टिकोण और समस्याएँ हैं। मछलियों के माध्यम से मूक रहकर प्राणांत को स्वीकार लेना ही लाचार, शोषित, पीडित जनों की नियति है, बताया गया है। जीवन क्षणभंगुर है। कल्पनाएँ क्षणिक हैं एवं स्वप्न कभी भी बिखर सकते हैं। बालसुलभ मनोभाव मछलियों के इर्द-गिई घूमते हैं। पूरी कहानी मछली पर ही आधारित है। मछली की दशा का जीवन्त चित्रण है। अंततः दीदी की तुलना भी बालक मछली से करता है। इस कहानी का ‘मछली’ शीर्षक पूर्ण रूपेण सार्थक कहा जा सकता है।


प्रश्न 2. संतू के विरोध का क्या अभिप्राय है ?

उत्तर ⇒ संतू मानवीय गुणों को उजागर करता है। मानव में सेवा, परमार्थ, ममता जैसे गुण विद्यमान होते हैं। परन्तु आज मानव अपने आदर्श को भूलकर, इन गुणों को त्यागकर, स्वार्थ में अंधा होकर विवश और लाचार की मदद में नहीं बल्कि शोषण में लिप्त है। मूक मछलियों को निर्ममतापूर्वक काटते देख संतू उसकी रक्षा को आतुर हो उठता है और उसे बचाने हेतु झपट कर भग्गू के सामने से मछली को लेकर भाग जाता है। इस विरोध का मतलब है कि आज निःस्वार्थ भाव से बेबस, लाचार, शोषित, पीड़ित जनों की रक्षा, उत्थान एवं कल्याण के लिए अग्रसर होना परमावश्यक है । ममत्व में धैर्य टूट जाता है। सभी प्राणी में अपनी परछाईं दिखनी चाहिए।


प्रश्न 3. दीदी का चरित्र चित्रण करें।

उत्तर ⇒ प्रस्तुत कहानी में मध्यम वर्गीय परिवार की यथार्थ झलक है। दीदी घर की चहारदीवारी के बीच कठपुतली बन कर रहने वाली एक बाला है। लिंग-भेद परिवार में निहित है। पिता की ओर से स्वतंत्रता नहीं है जिसके चलते घर में ही रहकर समय व्यतीत करती है। वह ममता की मूर्ति है । अपने भाइयों के प्रति अटूट श्रद्धा रखती है। उन्हें प्रत्येक जीवों में अपनी परछाईं देखने की शिक्षा देती है। मछली को विवश होकर कट-जाना उसके लिए पीड़ादायक है । वह समाज की रूढ़िवादिता के बीच मूक रहकर लाचार, बेबस एवं निर्ममतापूर्वक प्रहार को सहन करने वाले की आत्मा की पुकार को अनुभव करके सिसकियाँ एवं आहभर कर रह जाने वाली कन्या है।


प्रश्न 4. मछली कहानी का सारांश प्रस्तुत करें।
अथवा, अपने पाठ्य-पुस्तक की उस कहानी का सारांश लिखें जिसमें शहर के निम्न मध्वर्गीय परिवार का घरेलू वातावरण, जीवन-यथार्थ और लिंग-भेद की समस्या का मार्मिक स्पर्श है।

उत्तर ⇒ बूंदा-बूंदी शुरू होते ही दोनों भाई दौड़ते हुए गली में घुस गए-इसलिए कि मछलियाँ पानी बिना झोले में ही मर न जाएँ। भाइयों की इच्छा थी कि एक मछली पिताजी से माँग कर, कुएँ में डाल, बड़ा करेंगे।
संतू ठंड से काँपने लगा था। दोनों ने नहानघर में घुस अपनी-अपनी कमीजें निचोड़ी। संतू मछली छूने से डर रहा था। नरेन मछली की आँखों में अपनी छाया देखना चाहता था। दीदी ने कहा था कि मरी मछली की आँख में अपनी परछाई नहीं दिखती। संतू से न बना तो नरेन ने खुद देखा किन्तु पता ही नहीं चला कि अपनी परछाई थी या मछली की आँखों का रंग।
पता चला कि दीदी सो रही है। माँ उधर मसाला पीस रही थी। भाइयों का मन छोटा हो गया- आज ही बनेंगी। इतने में भग्गू आया और मछलियाँ ले गया। मछली पालने का उत्साह ठंडा पड़ गया। दोनों कमरे में गए- दीदी लेटी हुई थी। गीले कपड़ों में देख नाराज हुई। संत को अच्छे-अच्छे कपड़े पहनाए, नरेन को भी धुले कपड़े पहनने को कहा। दीदी ने ही संतू के बाल पोंछे-झाड़े।
भग्गू मछलियाँ काटने में लगा कि संतू एक मछली लेकर भागा। भग्गू दौड़ा। नरेन कमरे में गया- दीदी सिसक-सिसक कर रो रही थी, शरीर सिहर रहा था। उधर भग्गू संतू से मछली छीनने में लगा था ओर इधर घर में पिताजी जोर-जोर से चिल्ला रहे थे। दीदी सिसक रही थी। शायद पिताजी ने दीदी को मारा था।
पिताजी नरेन को घर में आने से रोकने को भग्गू से कह रहे थे। संतू सहमा , खड़ा था। दीदी के सँवरे बाल बिखर गए थे। नरेन नहान-घर में गया। बाल्टी उलट दी। उसे लगा कि पूरे घर में मछली की गंध आ रही है।


सप्रसंग व्याख्या

प्रश्न 1. ‘अगर बाल्टी भरी होती तो मछली उछल कर नीचे आ जाती’ की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।

उत्तर ⇒ प्रस्तुत पंक्ति विनोद कुमार शुक्ल के ‘मछली’ शीर्ष की है । प्रस्तुत पंक्ति में बच्चों का मछली की रक्षा के लिए सजगता परिलक्षित होता है। बच्चे की हार्दिक इच्छा थी कि हम मछली को मरने नहीं देंगे बल्कि जीवित अवस्था में रहने के लिए कुआँ में डाल देंगे । इसके लिए पिताजी से एक मछली माँगने का इंतजार कर रहे । थे। जबतक पिताजी नहीं आ जाते तब तक कुआँ में डालना नहीं था। इसलिए उसे । बाल्टी में रखना अनिवार्य था। उन्हें डर था कि बाल्टी भरी होगी तो मछलियाँ बाहर र जमीन पर कूद जायेंगी। इसलिए भरी बाल्टी आधा कर के उसमें मछलियों को रखा गया ।


प्रश्न 2. ‘और पास से देख परछाई’ दिखती है की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।

उत्तर ⇒ प्रस्तुत पंक्ति विनोद कुमार शुक्ल की रचना ‘मछली’ की है। बच्चे , मछलियों को परखना चाहते थे कि इनमें जीवित कौन है और मृत कौन । दीदी ने बताया था कि मरी हुई मछली की आँखों में मनुष्य की परछाईं दिखाई नहीं देती है। जब संतू को मछली की आँखों में देखने के लिए कहा गया तब वह निकट जाने । से डर रहा था। वह दूर से देखने का प्रयास कर रहा था। इसलिए दूसरा बच्चा उसे निकट से देखने को प्रेरित करता है ताकि परछाईं दिखाई पड़े और मछली जीवित है ऐसा पता चल जाय । मछली में अपनी छाया देखने का तात्पर्य है अपने समान मछली को भी समझना । उससे आत्मीय स्नेह स्थापित करना ही निकट से देखना कहा गया है।

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