धातु एवं अधातु

धातु एवं अधातु

Science ( विज्ञान  ) लघु  उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. अयस्क और खनिज में अंतर लिखिए।

उत्तर⇒           

S.N अयस्क खनिज
1. धातुओं के प्राकृत यौगिक रूप को खनिज कहते हैं। अधिकांश धातुएँ हमें यौगिकों के रूप में ही प्राप्त होती हैं, जैसे-ताँबा। हमें पाइराइट या क्यूपराइट से प्राप्त होता है। जिन पदार्थों (खनिजों) से धातु का निष्कर्षण सरल हो उन्हें अयस्क कहते हैं, जैसे-ऐलुमिनियम का अयस्क बॉक्साइट है तो लोहे का हैमेटाइट ।
2. सभी खनिज अयस्क नहीं होते हैं। सभी अयस्क खनिज होते हैं।

प्रश्न 2. जिंक को आयरन (II) सल्फेट के विलयन में डालने से क्या होगा? इसकी रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।

उत्तर⇒ जब जिंक को आयरन (II) सल्फेट के घोल में डाला जाता है तो जिंक आयरन सल्फेट के घोल से आयरन को विस्थापित कर देती है।
Zn+FeSO4 → ZnSO4 + Fe
इस क्रिया को इस प्रकार प्रदर्शित किया जा सकता है –

Zn(s) → Zn2+ + 2e
Fe2+ (aq) + 2e→ Fe(s)
Fe+ (aq) + Zn (s) → Zn2+ (aq) + Fe(s)
FeSO4 (aq) + Zn (s) – – ZnSO4 (aq) + Fe (s)

लोहा ZnSO4 से जस्ता को विस्थापित नहीं कर सकता ।
Fe+ZnSO4 कोई क्रिया नहीं यह इस कारण हुआ कि लोहा जस्ता की अपेक्षा कम सक्रिय है।


प्रश्न 3. ऐनोडीकरण क्या है ?

उत्तर⇒ एनोडीकरण एल्युमिनियम पर मोटी ऑक्साइड की परत बनाने की प्रक्रिया है। वायु के सम्पर्क में आने पर एल्यमिनियम पर ऑक्साइड की पतली परत का निर्माण होता है। एल्युमिनियम ऑक्साइड की परत इसे संक्षारण से बचाती है। इस परत को मोटा करके इसे संक्षारण से अधिक सुरक्षित किया जा सकता है। एनोडीकरण के लिए एल्युमिनियम की एक साफ वस्तु को एनोड बनाकर तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ इसका विधुत अपघटन किया जाता है। एनोड पर उत्सर्जित ऑक्सीजन गैस एल्युमिनियम के साथ अभिक्रिया करके ऑक्साइड की एक मोटी परत बनाती है। इस ऑक्साइड की परत को आसानी से रंग कर एल्युमिनियम की आकर्षक वस्तुएँ बनाई जा सकती है।


प्रश्न 4. ऐसे धातु का उदाहरण दीजिए जो
(a) कमरे के ताप पर द्रव होता है।
(b) ऊष्मा का सबसे अच्छी चालक होता है।

उत्तर⇒ (a) कमरे के ताप पर पारा द्रव होता है।
(b) ऊष्मा का सबसे अच्छा चालक चाँदी और ताँबा होता है।


प्रश्न 5. (a) संयोजकता से आप क्या समझते हैं?
(b) मैग्नीशियम की संयोजकता लिखें।

उत्तर⇒ (a) संयोजकता (Valency)-किसी तत्त्व के परमाणु के बाह्यतम शेल, अर्थात् संयोजी शेल में वर्तमान इलेक्ट्रॉनों की संख्या संयोजकता इलेक्ट्रॉन कहलाती है। उदाहरणार्थ, Na11 (2,8, 1) के संयोजी शेल में एक इलेक्ट्रॉन है, अतः इसका संयोजकता इलेक्ट्रॉन 1 है।
(b) मैग्नीशियम की बाह्य कक्षा में 2 इलेक्ट्रॉन है, इसलिए इसकी संयोजकता 2 है।

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प्रश्न 6. (i) क्या होता है, जब धातुएँ जल के साथ अभिक्रिया करती हैं?
(ii) क्या होता है जब धातुओं का वायु में दहन होता है?

उत्तर⇒ (j) धातुएँ जल के साथ अभिक्रिया कर अधिक मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न करती है। CaOजल के साथ तीव्रता से अभिक्रिया कर बूझे हुए चूने Ca(OH)2 का निर्माण करके अधिक मात्रा में ऊष्मा उत्सर्जित करती है। यह संयोजन अभिक्रिया है।
(ii) धातुओं को वायु में जलाने पर वे वियोजित होती हैं।
CaCO3 → CaO + CO2

ऊष्मा देने पर कैल्सियम कार्बोनेट, कैल्सियम ऑक्साइड तथा कार्बन डाइऑक्साइड में वियोजित हो जाती है। यह प्रमुख वियोजन अभिक्रिया है।


प्रश्न 7. एक मिश्रधातु क्या है ? मैग्नेलियम नामक मिश्रधातु के अवयवों के नाम लिखिए। इसके कोई दो उपयोग दीजिए।

उत्तर⇒ यह दो या दो से अधिक धातुओं अथवा तथा अधातु का संभागी मिश्रण है। उदाहरण – पीतल, ताँबा तथा जिंक की मिश्रधातु है, कांसा, ताँबा तथा टिन की मिश्रधातु है।
मैग्नेलियम का संघटन – ऐलुमिनियम (Al) 95%
मैग्नीशियम (Mg)-5%

मैग्नेलियम के उपयोग –

(i) हल्की तथा कठोर होने के कारण यह हवाई जहाज के भाग बनाने में प्रयोग की जाती है।
(ii) यह वाहनों तथा तुलाओं के भाग बनाने में काम आती है


प्रश्न 8. लोहे को जंग से बचाने के दो उपाय बताइए। अथवा, आयरन के जंगीकरण को रोकने के लिए दो विधियों का उल्लेख करें।

उत्तर⇒ (a) यशदलेपन इस प्रक्रिया में लोहे की वस्तुओं के ऊपर जिंक की एक परत चढ़ाई जाती है।
(b) पेंटिंग इस प्रक्रिया में लोहे की वस्तुओं पर पेंट किया जाता है।


प्रश्न 9. उभयधर्मी ऑक्साइड क्या हैं? दो उभयधर्मी ऑक्साइडों का उदाहरण दीजिए।

उत्तर⇒ वे ऑक्साइड जो अम्ल तथा क्षार दोनों से अभिक्रिया कर लवण प्रदान करते हैं, उभयधर्मी ऑक्साइड कहलाते हैं।
उदाहरण के लिए एल्युमिनियम ऑक्साइड निम्नलिखित तरीके से अम्लों तथा क्षारों के साथ अभिक्रिया करता है
AI2O3+ 6HCl → 2AICl3 +3H2O
AI2O3 + 2NaOH → 2NaAIO2+H2O
 (सोडियम ऐलुमिनेट)
जिंक ऑक्साइड एक अन्य उभयधर्मी ऑक्साइड है।


प्रश्न 10. (a) सक्रियता श्रेणी के मध्य में स्थित धातुओं के नाम लिखें।
(b) निस्तापन क्या है? निस्तापन के समय होने वाली एक रासायनिक अभिक्रिया को लिखें।

उत्तर⇒ (a) जस्ता तथा लोहा
(b)

                  Δ

ZnCO3  ———→  ZnO + CO2


प्रश्न 11. कारण बताइए: (a) सोडियम, पोटैशियम एवं लीथियम को तेल के अंदर संग्रहित किया जाता है।
(b) ऐलुमिनियम अत्यधिक अभिक्रियाशील धातु है, फिर भी इसका उपयोग खाना बनाने वाले बर्तन बनाने के लिए किया जाता है?
(c) प्लैटिनम, सोना एवं चाँदी का उपयोग आभूषण बनाने के लिए किया जाता है।
(d) निष्कर्षण की प्रक्रिया में कार्बोनेट एवं सल्फाइड अयस्क को ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है।

उत्तर⇒ (a) सोडियम एवं पोटैशियम जैसी धातुएँ इतनी अभिक्रियाशील हैं कि खुले में रखने पर तत्काल आग पकड़ लेती है। अर्थात् उन्हें बचाने तथा आग लगने से रोकने के लिए उन्हें किरोसीन तेल के अंदर संग्रहित किया जाता है।
(b) एल्युमिनियम संक्षारित नहीं होता, साथ ही यह ऊष्मा का सुचालक है।
(c) प्लैटिनम, सोना एवं चाँदी बहुत कम अभिक्रियाशील हैं तथा संक्षारित भी नहीं होते । उनकी चमक भी तेज होती है। इन्हीं कारणों से इनका उपयोग आभूषण बनाने के लिए किया जाता है।
(d) किसी धातु को उसके सल्फाइड और कार्बोनेट की अपेक्षा उसके ऑक्साइड से प्राप्त करना अधिक आसान है। इसलिए अपचयन से पहले धातु सल्फाइड एवं कार्बोनेट को धात ऑक्साइड में बदल लेना चाहिए।


प्रश्न 12. निम्न तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखें:
(i) Ca           (ii) Cr

उत्तर⇒ (i) Ca का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास : 2, 8, 1
(ii) Cr का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास : 2, 8, 8, 6.


प्रश्न 13. इन अभिक्रियाओं के लिए समीकरण लिखिए-(i) भाप के साथ लोहा (iii) जल के साथ कैल्सियम।

उत्तर⇒ (i) 3Fe (s) + 4H2O(g) ↔ Fe3O4+ 4H2 ↑
(ii) Ca(s) +2H2O(l) → Ca(OH)2 + H2 ↑


प्रश्न 14. ध्वानिक (सोनोरस) किसे कहते हैं ?

उत्तर⇒ कुछ धातुएँ किसी कठोर सतह से टकराकर एक विशेष प्रकार की ध्वनि उत्पन्न करती है जिसे धातुई ध्वनि कहते हैं। इस प्रकार की धातुएँ ध्वानिक (सोनोरस) कहलाती है। जैसे-लोहा, ताँबा आदि।


प्रश्न 15. निम्नलिखित मिश्रधातुओं के घटक के साथ उनके उपयोग का उल्लेख करें
(a) स्टील (b) पीतल (c) काँसा

उत्तर⇒ (a) स्टील – (i) लोहा (Fe) – 73%, (ii) निकेल (Ni) = 8%, (ii) क्रोमियम (Cr) = 18% तथा (iv) कार्बन (C) = 1%

उपयोग – मोटर एवं साइकिल के पार्ट्स, रसोई घर के बर्तन, चाकू, छूरी, ब्लेड, कैंची, सर्जिकल उपकरण एवं दुग्ध उद्योगों के लिए उपकरण बनाने में।
(b) पीतल – (i) ताँबा (Cu) = 80% तथा (ii) जस्ता (Zn) = 20%

उपयोग – खाना पकाने के बर्तन, मूर्ति, वाद्य यंत्र, मशीन के पार्ट्स-पूर्जे, तार, वैज्ञानिक उपकुरण, नट-बोल्ट, ताला, कारतूस तथा सिक्का बनाने में।
(c) कासा – (i) ताँबा (Cu) = 88% तथा (ii) टिन (Sn) = 12%

उपयोग – बर्तन. सिक्का . मर्ति. जहाजों के नोदक. पदक (मेडल) बनाने में।


प्रश्न 16. सोडियम को किरोसीन तेल में डुबोकर क्यों रखा जाता है ?

उत्तर⇒ सोडियम सक्रिय धात है जो वाय में उपस्थित ऑक्सीजन से क्रिया करके सोडियम ऑक्साइड बनाती है । यह पानी से क्रिया कर सोडियम हाइड्रोक्साइड तथा हाइड्रोजन उत्पन्न करती है। वायु में खुला छोड़ देने पर यह आग पकड़ लेती है। इसलिए, इसे मिट्टी के तेल में डुबोकर सुरक्षित् रखते हैं।


प्रश्न 17. समस्थानिक क्या है ? उदाहरण दें।

उत्तर⇒ किसी तत्त्व के समस्थानिक के रसायनिक गुणधर्म समान होते हैं, वे परमाणु भार; जैसे- 6C12 , 6C14


प्रश्न 18. खनिज और अयस्क क्या हैं? लोहे के दो अयस्कों के नाम उनके आणविक सूत्र के साथ लिखें।

उत्तर⇒ खनिज : ऐसे प्राकतिक पदार्थ जिनमें धातुएँ अपने यौगिकों के रूप में होती हैं, खनिज कहलाते हैं। जैसे–फैल्सपार, अभ्रक आदि।
अयस्क : इन खनिजों को जिनसे लाभप्रद ढंग से धातुओं का निष्कर्षण किया जाता है, अयस्क कहलाते हैं। जैसे-हेमेटाइट, बॉक्साइट आदि।
लोहे के दो मुख्य अयस्क के नाम एवं आण्विक सूत्र निम्नलिखित हैं – (i) हेमाटाइट Fe2O3 एवं (ii) आयरन पाइराइट FeS2


प्रश्न 19. संयोजी इलेक्ट्रॉन क्या है ? सोडियम परमाणु में स्थित संयोजी इलेक्ट्रॉन की संख्या लिखें।

उत्तर⇒ संयोजी इलेक्ट्रॉन-परमाणु के बाहरी कक्षा में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या को संयोजी इलेक्ट्रॉन कहते हैं।

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सोडियम परमाणु में स्थित संयोजी इलेक्ट्रॉन की संख्या 1 है।


प्रश्न 20. निम्नलिखित तत्त्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखें। (i) सोडियम, (ii) कैल्शियम, (iii) क्लोरीन। 

उत्तर⇒

निम्नलिखित तत्त्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखें


प्रश्न 21.(a) सोडियम, मैग्नीशियम एवं ऑक्सीजन  का इलेट्रॉनिक-बिन्दु संरचना बतायें।
(b) डायमंड (हीरा) विधुत का अवचालक होता है, लेकिन ग्रेफाइट सुचालक होता है, क्यों?

उत्तर⇒ (a)

सोडियम, मैग्नीशियम एवं ऑक्सीजन  का इलेट्रॉनिक-बिन्दु संरचना बतायें(b) हीरे में प्रत्येक कार्बन परमाणु sp3 संकरित अवस्था में रहता है तथा चार अन्य कार्बन परमाणुओं से एक सहसंयोजक बन्ध द्वारा जुड़ा रहता है, जिससे. एक सुदृढ़ त्रिविम संरचना बनती है। हीरे में कोई भी मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं होता है इस कारण हीरा विधुत का अवचालक है।
ग्रेफाइट की संरचना परतों के रूप में होती है तथा प्रत्येक परत में षट्भुजीय वलयों का जाल होता है षट्भुजीय वलय का प्रत्येक कार्बन परमाणु sp2संकरित अवस्था में होता है, इसलिए प्रत्येक कार्बन परमाणु तीन अन्य कार्बन परमाणुओं से जुड़ा रहता है अर्थात् इसके तीन इलेक्ट्रॉन आबंधित रहते हैं और चौथा इलेक्ट्रॉन गतिशील रहता है। गतिशील इलेक्ट्रॉन के कारण ग्रेफाइट विद्यत का संचालक होता है।


प्रश्न 22. भर्जन और निस्तापन में अंतर लिखें। सल्फाइड अयस्कों के लिए इन दोनों में से किस प्रक्रम का उपयोग होता है, और क्यों?

उत्तर⇒ भर्जन : इस प्रक्रम के दौरान अयस्क को इसके द्रवणांक से कम तापक्रम पर हवा की उपस्थिति में गर्म करते हैं ताकि अयस्क ऑक्सीकृत हो जाए।

निस्तापन : इस प्रक्रम के दौरान अयस्क को इसके द्रवणांक से कम तापक्रम पर हवा की अनुपस्थिति में गर्म किया जाता है ताकि अयस्क से वाष्पशील अशुद्धियाँ दूर हो जाएँ।
सल्फाइड अयस्क के लिए भर्जन प्रक्रम उपयोग में लाया जाता है ताकि इसे ऑक्साइड में ऑक्सीकृत किया जा सके और ऑक्साइड को अवकृत कर धातु प्राप्त किया जा सके।

                           Δ
2ZnS+ 3O2   ——-→    2ZnO + 2SO2 ↑
    जिंक ब्लेड                                 भर्जन    


प्रश्न 23. (a) ऐल्युमिनोथर्मिक विधि क्या है?
(b) ऑक्सीजन परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 6 है। इसकी संयोजकता ज्ञात करें।

उत्तर⇒ (a) ऐल्युमिनोथर्मिक विधि : इस विधि में धातु के अयस्क को एल्युमीनियम चूर्ण के साथ मैग्नेशियम के फीता एवं बेरियम परऑक्साइड की उपस्थिति में गर्म किया जाता है। यह अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा मुक्त होती है और धातु का अयस्क Al द्वारा धातु में अवकृत हो जाता है।

                        Mg + BaO2
CrO3 + 2Al    ————-→  2Cr + Al2O
                              Δ
(b) अपना अष्टक पूरा करने हेतु ऑक्सीजन परमाणु को दो इलेक्ट्रॉन ग्रहण करना पड़ेगा। अतः, ऑक्सीजन की संयोजकता = 2.


प्रश्न 24. सल्फाइड अयस्क के सांद्रण के लिए फेन-उत्प्लावन विधि का संक्षेप में वर्णन करें।

उत्तर⇒ सल्फाइड अयस्कों का सांद्रण करने के लिए उन्हें खूब महीन पीसकर पाइन के तेल मिले जल के साथ मिलाकर हवा के झोके के द्वारा झाग पैदा किया जाता है। शुद्ध अयस्क झाग के साथं ऊपर आ जाता है तथा अशुद्धियाँ नीचे बैठ जाती हैं। यह विधि फेन-उत्प्लावन विधि कहलाती है।


प्रश्न 25. आयनिक यौगिकों के स्वनांक उच्च क्यों होता है ?

उत्तर⇒ आयनिक यौगिकों के क्रिस्टल जालक में धनायन एवं ऋणायन एक निश्चित क्रम में व्यवस्थित रहते हैं और परस्पर प्रबल अंतरआयानक आकषण बल द्वारा जुड़े होते हैं। अतः बंद संकलित क्रिस्टलीय आकृति को तोड़ने क लिए अति उच्च ऊर्जा की आवश्यकता होती है। फलतः आयनिक यौगिकों के गलनांक उच्च होते हैं।


प्रश्न 26. गर्म जल का टैंक बनाने में ताँबे का प्रयोग होता है परंतु इस्पात (लोहे का मिश्र धातु) का नहीं, इसका कारण बताएँ।

उत्तर⇒ कॉपर, स्टील की अपेक्षा अधिक सुगम ताप का सुचालक है और यह स्टील की अपेक्षा अधिक सस्ता भी होता है । इसलिए ऊर्जा बचाने के लिए गर्म पानी के टैंक को कॉपर से बनाया जाता है।


प्रश्न 27. इन पदों की परिभाषा दें (a) खनिज  (b) अयस्क (c) गैंग

उत्तर⇒ (a) खनिज – ऐसे प्राकृतिक पदार्थ जिनमें धातुएँ अपने यौगिकों के रूप में होती हैं, खनिज कहलाते हैं। ये अधिकांश रूप में भूपर्पटी में पाये जाते हैं। कुछ खनिज समुद्री तल में भी पाये जाते हैं। जैसे-NaCl (सोडियम क्लोराइड), फैल्सपार अभ्रक आदि ।

(b) अयस्क-उन खनिजों को जिनसे लाभप्रद ढंग से धातुओं का निष्कर्षण किया जाता है, अयस्क कहलाते हैं। जैसे-हेमेटाइट (Fe2O3) लोहे का अयस्क है। ऐलुमिनियम का अयस्क बॉक्साइट (AI2O3. 2H2O) है।

(c) गैंग-खनन क्रिया द्वारा पृथ्वी से निकाले गये अयस्क में उपस्थित अवांछित पदार्थों को गैंग कहते हैं।


प्रश्न 28. धातुकर्म क्या है ? इसके विभिन्न चरणों को लिखें।

उत्तर⇒ धातुकर्म वह विधि है जिसके द्वारा अयस्क से शुद्ध धातु का निष्कर्षण होता है।
अयस्क से शुद्ध धातु का निष्कर्षण निम्नांकित कई चरणों में होता है-
(a) अयस्कों का समृद्धीकरण –अयस्कों से गैंग को हटाने की प्रक्रिया को समृद्धीकरण कहते हैं।
(b) धातुओं का निष्कर्षण – इसके लिए निस्तापन, भर्जन, अपघटन आदि विधि का प्रयोग होता है।
(c) धातुओं का परिष्करण-अशुद्ध धातुओं को विभिन्न विधियों, जैसे-विधुत अपघटनी परिष्करण द्वारा शुद्ध किया जाता है।


प्रश्न 29.(i) क्या होता है जब लेड नाइट्रेट के घोल में पोटैशियम आयोडाइड डाला जाता है ?
(ii) यह किस प्रकार की अभिक्रिया है ?
(iii) इस अभिक्रिया को संतुलित समीकरण दें।

उत्तर⇒ (i) जब लैड नाइट्रेट के विलयन में पोटेशियम आयोडाइड मिलाया जाता है तो लैड आयोडाइड का पीला अवक्षेप प्राप्त होता है।
(ii) यह द्वि-विस्थापन अभिक्रिया है।
(iii) Pb(NO3)2 (aq) + 2KI (aq) → PbI2(s) + 2KNO3(aq)


प्रश्न 30. (i) अशुद्ध ताँबा के परिष्करण के लिये उपयोग में आने वाले एनोड, कैथोड एवं इलेक्ट्रोलाइट नाम लिखें।
(ii) रेलवे लाइन के Crack को जोड़ने के लिये ऐलमिनियम (AI) का उपयोग किया जाता है-इसे एक समीकरण के द्वारा दर्शाएँ।
(iii) अयस्कों से धातुओं के निष्कर्षण के विभिन्न चरणों (Steps) को फ्लो चार्ट (flow chart) द्वारा दर्शाएँ।

उत्तर⇒ (i) अशुद्ध ताँबा के परिष्करण में अशुद्ध ताँबे का ऐनोड शद्ध ताँबे की छड़ें कैथोड तथा कॉपर सल्फेट का अम्लीय विलयन इलेक्ट्रोलाइट का कार्य करता है।
(ii) रेलवे लाइन के क्रेक (crack) जोड़ने के लिए थर्माइट वेल्डिंग का उपयोग करते हैं जिसमें ऐलुमिनियम एक अपचायक का कार्य करता है। ऊष्माक्षेपा अभिक्रिया होने के कारण आयरन धातु पिघली हुई अवस्था में पाप्त होती है जिसे रेलवे लाइन क्रेक के बीच में डाल देते हैं।
Fe2O3 + 2Al →  Al2O3 + 2Fe + ऊष्मा
(iii)  अयस्कों से धातु के निष्कर्षण में प्रयुक्त होने वाले विभिन्न चरण निम्नलिखित हैं –

अयस्कों से धातु के निष्कर्षण में प्रयुक्त होने वाले विभिन्न चरण निम्नलिखित हैं


प्रश्न 31. अभिक्रियाशील धातु को तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में डाला जाता है तो कौन-सी गैस उत्सर्जित होती है ? आयरन के साथ तनु H2SO4 की रासायनिक अभिक्रिया लिखें।

उत्तर⇒ किसी तनु अम्ल से क्रिया करने के पश्चात् कोई धातु हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती है। सभी धातुएँ तनु अम्लों से क्रिया नहीं करतीं पर जो धातुएँ यह क्रिया नहीं करती हैं वे अम्ल में हाइड्रोजन को पुनर्स्थापित कर लवण तैयार करती हैं।
Fe + 2HCl → FeCl2+ H2


प्रश्न 32. दो धातुओं के नाम बताइए जो तनु अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित कर देंगे तथा दो धातुएँ जो ऐसा नहीं कर सकती हैं ।

उत्तर⇒ हाइड्रोजन को विस्थापित करने वाली धातुएँ-मैग्नीशियम, जिंक । हाइड्रोजन को विस्थापित नहीं कर सकने वाली धातुएँ-कॉपर, सोना ।


प्रश्न 33. आघातवर्घ्य तथा तन्य का अर्थ बताइए।

उत्तर⇒ आघातवर्ध्य – धातुओं के आघातवर्घ्य होने का अर्थ है कि धातुओं को हथौड़े से पीटकर पतली चादरें बनाई जा सकती हैं।

तन्य – धातुओं के तन्य होने का अर्थ है कि धातुओं को खींचकर तार बनाए जा सकते हैं।


प्रश्न 34. आपने ताँबा के मलीन बर्तन को नींबू या इमली के रस से साफ करते अवश्य देखा होगा। ये खट्टे पदार्थ बर्तन को साफ करने में क्यों प्रभावी है ?

उत्तर⇒ ताँबा ऑक्साइड अम्लों से अभिक्रिया करता है, किन्तु ताँबा स्वयं अभिक्रिया नहीं करता। अतः, ताँबे को अम्लीय पदार्थों द्वारा साफ किया जा सकता है । ये ताँबे के संक्षारित हिस्सों (कॉपर ऑक्साइड) को अलग कर देता है तथा शुद्ध ताँबा बचा रह जाता है।


प्रश्न 35. जिंक मैग्नीशियम एवं कॉपर के धात्विक ऑक्साइड को निम्नांकित धातुओं के साथ गर्म किया गया।
जिंक, ऑक्साइड, मैग्नीशियम ऑक्साइड एवं कॉपर ऑक्साइड, किस स्थिति में विस्थापन अभिक्रिया घटित होगी ?

उत्तर ⇒ केवल जिंक ऑक्साइड, मैग्नीशियम के साथ गर्म करने पर विस्थापन अभिक्रिया देगी। मैग्नीशियम ऑक्साइड विस्थापन अभिक्रिया नहीं कर सकता परंतु कॉपर ऑक्साइड, जिंक तथा मैग्नीशियम के साथ गर्म करने पर विस्थापन अभिक्रिया करेगा।


प्रश्न 36. इन अभिक्रियाओं के लिए समीकरण लिखें-
(i) भाप के साथ आयरन
(ii) जल के साथ कैल्सियम तथा पोटैशियम

उत्तर⇒ (i) 3Fe (s) + 4H2O(g)  ⇌  Fe3O4+ 4H2
(ii) (a) Ca(s) + 2H2O (l) → Ca(OH)2 + H2
(b) 2K 2H2O (g) → 2KOH (aq) H2 ↑


प्रश्न 37. ऑक्सीजन के साथ संयुक्त होकर अधातुएँ कैसा ऑक्साइड बनाती हैं ?

उत्तर⇒ अधातुएँ ऑक्सीजन से संयोग करके सह-संयोजक ऑक्साइड बनाती हैं अम्लीय और उदासीन ।
(i) अम्लीय ऑक्साइड – अधातुएँ ऑक्सीजन से संयोग करके सह-संयोजक ऑक्साइड बनाती हैं, जो पानी में घुलकर अम्ल बनाते हैं।
(a) C + O2 → CO2
CO2+H2O → H2CO3 (कार्बोनिक अम्ल)
(b) S+ O2 → SO2
SO2 + H2O  → H2SO3

(ii) उदासीन ऑक्साइड कुछ अधातुएँ ऑक्सीजन से संयोग करके उदासीन ऑक्साइड बनाती हैं। इन पर लिटमस पेपर का कोई प्रभाव नहीं होता है। जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड (CO),पानी (H2O) तथा नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) उदासीन ऑक्साइड हैं।


प्रश्न 38. कोई धातु ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कर उच्च गलनांक वाला यौगिक निर्मित करती है। यह यौगिक जल में विलेय है । यह तत्त्व क्या हो सकता है ?
(a) कैल्सियम (b) कार्बन (c) सिलिकॉन (d) लोहा

उत्तर⇒ कैल्सियम, ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कर कैल्सियम ऑक्साइड बनाता है जो एक आयनिक यौगिक है, इसका गलनांक उच्च होता है । यह जल के साथ अभिक्रिया करने पर कैल्सियम हाइड्रोक्साइड बनाता है।

                                  Δ
2Ca (s) + O2(g)  —————→ 2Ca2+ + O2- (कैल्सियम ऑक्साइड)
CaO + H2O → Ca(OH)2 (कैल्सियम हाइड्रोक्साइड)

इसके विपरीत कार्बन का ऑक्साइड, यौगिक, कार्बन डाइऑक्साइड (गैस) होता है। सिलिकॉन का ऑक्साइड सिलिकॉन डाइऑक्साइड होता है (पानी में घुलनशील नहीं होता) एवं लोहे का ऑक्साइड आयरन ऑक्साइड होता है जो पानी में नहीं घुलता, इसलिए (b), (c) और (d) गलत हैं।


प्रश्न 39. आपको एक हथौड़ा, बैटरी, बल्ब, तार एवं स्विच दिया गया है –
(a) इनका उपयोग कर धातुओं एवं अधातुओं के नमूनों को कैसे अलग करसकते हैं ?
(b) धातुओं एवं अधातुओं में विभेदन के लिए इन परीक्षणों की उपयोगिताओं का आकलन कीजिए।

उत्तर⇒ (a) दिए गए चित्र के अनुरूप हम एक परिपथ बनाएँगे।

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यदि नमूने को विधुत परिपथ में लगाने पर स्विच ऑन करने पर बल्ब बल्ब जलता है, तो दिया गया नमूना एक धातु हैं।
(b) यह विधि धातु एवं अधातु की जाँच के लिए बहुत ही उपयोगी है, किन्तु ग्रेफाइट एक अपवाद है क्योंकि यह अधातु होते  हुए भी विधुत का चालक है।


प्रश्न 40. खाद्य पदार्थों के डिब्बों पर जिंक की बजाय टिन का लेप होता है, क्योंकि
(a) टिन की अपेक्षा जिंक महँगा है।
(b) टिन की अपेक्षा जिंक का गलनांक अधिक है।
(c) टिन की अपेक्षा जिंक अधिक अभिक्रियाशील है।
(d) टिन की अपेक्षा जिंक कम अभिक्रियाशील है।

उत्तर⇒ टिन की अपेक्षा जिंक अधिक अभिक्रियाशील होता है तथा खाने में पाए जाने वाले जैविक तत्त्वों के समान अभिक्रिया कर सकता है । इसके विपरीत टान इस प्रकार की अभिक्रिया नहीं करता इसलिए खाद्य पदार्थों को टिन में रखा जा सकता है परंतु जिंक में नहीं। इसलिए (c) सही है ।


प्रश्न 41. (a) सोडियम, ऑक्सीजन एवं मैग्नीशियम का इलेक्ट्रॉन-बिंदु संरचना लिखें।
(b) इलेक्ट्रॉनों के स्थानान्तरण द्वारा Na2O एवं MgO की रचना को दर्शाएं।
(c) इन यौगिकों में कौन-से आयन उपस्थित हैं ?

उत्तर⇒ (a) सोडियम – Na ऑक्सीजन- O मैग्नीशियम – Mg :

सोडियम, ऑक्सीजन एवं मैग्नीशियम का इलेक्ट्रॉन-बिंदु संरचना लिखें

(c) Na2O यौगिक में Na+ आयन तथा O2- आयन है।
Mgo यौगिक में Mg2+ आयन तथा O2- आयन है।


प्रश्न 42. धातु को उसके ऑक्साइड से प्राप्त करने के लिए किस रासायनिक प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है ?

उत्तर ⇒ सक्रियता श्रेणी में निम्नस्थ धातु ऑक्साइडों को केवल गर्म करके संगत धातुओं में अपचित करते हैं।
2HgS (s) +3O2 (g) → 2HgO (s) + 2SO2 (g)
2HgO (s) → 2Hg(l) + O2 (g)
सक्रियता श्रेणी के मध्य में स्थित धातुओं के ऑक्साइडों को कार्बन के साथ गर्म करके संगत धातुओं में अपचित करते हैं।
Zno(s)+C(s) → Zn (s) + CO(g) इसे अपचयी क्रिया कहते हैं।


प्रश्न 43. निम्नलिखित में से कौन-सा युगल विस्थापन अभिक्रिया प्रदर्शित करता है?
(a) NaCl विलयन एवं कॉपर धातु
(b) MgCl2 विलयन एवं ऐलुमीनियम धातु
(c) Feso4 विलयन एवं सिल्वर धातु
(d) AgNO3  विलयन एवं कॉपर धातु

उत्तर ⇒ सिल्वर धातु से अधिक क्रियाशील होने के कारण, कॉपर धातु AgNO3 विलियन में से सिल्वर को अलग (विस्थापित) करने की क्षमता रखता है। इसलिए सही उत्तर (d) है।
AgNO3 (aq) + Cu (s) → CuNO3 (aq) + Ag(s) अन्य सभी धातुएँ दिए गए विलयन में उपस्थित धातु से कम अभिक्रियाशील हैं। इसलिए (a), (b) एवं (c) गलत हैं।


प्रश्न 44. लोहे के फ्राइंग पैन को जंग से बचाने के लिए निम्नांकित में से कौन-सी विधि उपयुक्त है ?
(a) ग्रीज लगाकर                  (b) पेंट लगाकर
(c) जिंक की परत चढ़ाकर    (d) इनमें से सभी।

उत्तर⇒ ऊपर दिए गए सभी तरीके लोहे को जंग से बचाने में सक्षम हैं। परंतु (a) और (b) विधि फ्राई पैन के लोहे के लिए उपयुक्त नहीं है, क्योंकि ग्रीज और पेंट दोनों ही तत्त्व हैं जो गर्म करने पर जल जाते हैं। इसलिए, विधि (c) का प्रयोग किया जाता है। क्योंकि जिंक लोहे से अधिक अभिक्रियाशील है, इसलिए यह लोहे को जंग नहीं लगने देता । क्योंकि जिंक का गलनांक लोहे से कम होता है और यह उच्च तापमान को सहन कर सकता है, इसलिए इसका प्रयोग फ्राई पैन में लोहे को जंग से बचाने के लिए किया जा सकता है। अतः, विधिं (d) सही एवं उपयुक्त विधि है।


प्रश्न 45. गैल्वनीकरण किसे कहते हैं ?

उत्तर⇒ लोहे की बनी वस्तुओं को पिघले हुए जिंक में डुबो देने से या विद्यत विधि द्वारा लोहे पर एक बारीक जिंक की परत चढ़ाने की प्रक्रिया गैल्वनीकरण कहलाती है।


प्रश्न 46. एक वात्याभट्टी की उत्पादन क्षमता कितनी होती है ?

उत्तर⇒ एक वात्याभट्टी (Blast Furnace) में प्रतिदिन 3000 से 4000 टन तक लोहा उत्पन्न किया जा सकता है। एक बार प्रारंभ होने के बाद वात्याभट्टी लगातार 5 वर्ष तक चलती रहती है।


प्रश्न 47. धातु किसे कहते हैं ?

उत्तर⇒ आवर्त सारणी के बायीं तरफ तथा मध्य में रखे जाने वाले तत्त्व धातु कहलाते हैं, जिनमें धात्विक चमक होती है। वे प्रायः तन्य, आघातवर्ध्य, विधुत् और ऊष्मा की सुचालक, दृढ़ और अधिक घनत्व वाली होती हैं । इनके ऑक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं । लोहा, सोना, चाँदी, ताँबा, प्लैटिनम आदि धातुओं के उदाहरण हैं।


प्रश्न 48. 24 कैरेट सोना क्या है?

उत्तर⇒ शुद्ध सोने को 24 कैरेट कहते हैं तथा ये काफी नर्म होता है। इसलिए आभूषण बनाने के लिए ये उपयुक्त नहीं होता है। इसे कठोर बनाने के लिए चाँदी या कॉपर के साथ मिलाया जाता है। हमारे देश में प्रायः आभूषण बनाने के लिए 22 कैरट सोने का उपयोग होता है। इसका मतलब है कि 22 भाग शुद्ध सोने में 2 भाग कॉपर या चाँदी मिश्रित किया जाता है।


प्रश्न 49. एक्वारीजिया क्या होता है ? विवरण दें।

उत्तर⇒ एएक्वारीजिया, 3 : 1 के अनुपात में सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एवं सांद्र नाइट्रिक अम्ल का मिश्रण है। यह सोने को गला सकता है जबकि दोनों में से किसी अम्ल में अकेले यह क्षमता नहीं है।
एक्वारीजिया (रॉयल जल का लैटिन शब्द) भभकता द्रव होने के साथ तेज संक्षारक है। यह प्लैटिनम को गलाने में भी सक्षम है।


प्रश्न 50. धातुओं के अम्लीय एवं भस्मीय स्वभाव पर टिप्पणी लिखें।

उत्तर⇒ धातु ऑक्साइड का स्वभाव अम्लीय होता है, लेकिन ऐलुमिनियम ऑक्साइड, जिंक ऑक्साइड जैसे कुछ धातु ऑक्साइड अम्लीय तथा भस्मीय दोनों स्वभाव प्रदर्शित करते हैं।


प्रश्न 51. कॉपर को वायु में खुला छोड़ने पर वह हरे रंग का हो जाता है। क्यों?

उत्तर⇒ कॉपर वायु में उपस्थित आर्द्र कार्बन डाइऑक्साइड के साथ अभिक्रिया करता है। जिससे इसकी सतह से भूरे रंग की चमक धीरे-धीरे खत्म हो जाती है तथा इस पर हरे रंग की चमक चढ़ जाती है । यह हरा पदार्थ कॉपर कार्बोनेट होता है।


प्रश्न 52. कच्चा आयरन एवं इस्पात में क्या-क्या भिन्नताएँ होती हैं ?

उत्तर⇒ ढलवां लोहा में कार्बन की प्रतिशत मात्रा 2 से 4.5% होती है जबकि इस्पात में यह 0.25% से 2% तक होती है । ढलवाँ लोहा भंगुर होता है और उसकी वैल्डिंग नहीं हो सकती, पर इस्पात आघातवर्घ्य तथा भंगुर है, उसकी वैल्डिंग भी की जा सकती है।


प्रश्न 53. धातुओं की जल के साथ अभिक्रिया पर प्रकाश डालें।

उत्तर⇒ जल के साथ अभिक्रिया करके धातु, हाइड्रोजन गैस तथा धातु : ऑक्साइड उत्पन्न करता है। जल में विलयशील है धातु ऑक्साइड इसमें और घुलकर धातु हाइड्रोक्साइड प्रदान करता है। लेकिन सभी धातु जल के साथ अभिक्रिया नहीं करते।


प्रश्न 54. जंग क्या होता है ? इसके रासायनिक सूत्र के बारे में बताएँ।

उत्तर⇒ लोहे की बनी वस्तुओं को वायु में खुला छोड़ देने से उन पर हाइड्रोक्साइड एवं हाइड्राइड की परत जम जाने को जंग लगना कहते हैं। यह लाल-भूरे रंग की खुरदरी परत होती है। इससे लोहे का क्षय होता है। इसका रासायनिक सूत्र है – Fe2O3 x H2O I


प्रश्न 55. कार्बन एवं उसके अपरूप के बारे में बताएँ।

उत्तर⇒ कार्बन ऐसा धातु है जो विभिन्न रूपों में रह सकता है। इसके प्रत्येक रूप को अपरूप कहते हैं। हीरा कार्बन का एक अपरूप है। यह सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है और इसका द्रवणांक एवं क्वथनांक बहुत अधिक है। कार्बन का एक अन्य अपरूप ग्रेफाइट विधुत् का सुचालक है।


प्रश्न 56. हाइड्रोजन गैस के भौतिक गुण लिखिए।

उत्तर⇒ हाइड्रोजन गैस के भौतिक गण –
(i) यह रंगहीन, गंधहीन और स्वादहीन गैस है।
(ii) पानी में यह बहुत कम घुलनशील है। यह 100 cm’ पानी में लगभग 2 cm3 घुलती है।
(iii) यह अति ज्वलनशील गैस है।
(iv) यह वायु से बहुत हल्की होती है।
(v) यह लिटमस-पत्र के प्रति उदासीन रहती है।


प्रश्न 57. एल्युमिनियम तथा लोहा जल के साथ किस प्रकार अभिक्रिया करते हैं ?

उत्तर⇒ एल्युमिनियम तथा लोहा जैसे धातु न तो ठंडे जल के साथ और न ही गर्म जल के साथ अभिक्रिया करते हैं, परंतु भाप के साथ अभिक्रिया करके यह धातु ऑक्साइड तथा हाइड्रोजन प्रदान करते हैं।
2AI (s) +3H2O (g)- Al2O3(s) +3H2 (g)
3Fe (s) +3H2O (g) → Fe2O4 (s) +3H2 (g)


प्रश्न 58. सल्फर प्रकृति में किस अवस्था में मिलता है ? उसके खनिजों के नाम लिखिए।

उत्तर⇒ सल्फर प्रकृति में मुक्त एवं संयुक्त दोनों अवस्थाओं में मिलता है। प्राकृतिक सल्फर के बड़े-बड़े भंडार पाए जाते हैं । यौगिकों के रूप में भी यह प्राप्त होता है।
सल्फर के खनिज हैं- (i) सिनेबार (HgS) (ii) जिंक ब्लैंड (ZnS) (iii) कॉपर पाइराइट (CuFeS,)।


प्रश्न 59. कांस्य तथा डयूरेलियम में पाई जानेवाली धातुओं को लिखें। इन मिश्र धातुओं के उपयोग को बताएँ।

उत्तर⇒ ब्रांज (कांस्य) – इसमें 90% कॉपर तथा 10% टिन होता है। यह मूर्तियाँ, तगमे, सिक्के तथा भोजन पकाने वाले बर्तन बनाने में काम आता है ।

ड्यूरेलियम – इसमें 95% ऐलुमिनियम, 4% कॉपर, 0.5% मैग्नीशियम तथा 0.5% मैंगनीज होता है। यह हवाई जहाज के भाग, अंतरिक्ष उपग्रह तथा रसोई के बर्तन बनाने में काम आता है।


प्रश्न 60. दैनिक जीवन में धातुएं किन-किन रूपों में प्रयोग होती हैं ? उदाहरण सहित लिखें।

उत्तर ⇒ (i) शुद्ध धातु सोना, चांदी, तांबा तथा ऐलुमिनियम शुद्ध धातुएँ हैं ।

(ii) मिश्र धातु-एक धातु का दूसरी धातु अथवा अधातु के साथ मिश्रण, “मिश्र धातु” कहलाता है। तांबा, कांसा, बैल मैटल तथा जिस्त की मिश्र धातु है ।

(iii) यौगिक बहुत-सी धातुओं के यौगिक दैनिक जीवन में प्रयोग होते हैं। कॉपर सल्फेट (CuSO4), सोडियम बाइ-कार्बोनेट (NaHCO3), सोडियम क्लोराइड (NaCl) इत्यादि । यौगिक मानव जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में काम आते हैं।


प्रश्न 61. भर्जन क्रिया क्या है ? इसका उपयोग कब किया जाता है ?

उत्तर⇒ सांद्रण के पश्चात् अयस्क को वायु की उपस्थिति में गर्म करना भर्जन प्रक्रिया (roasting) कहलाता है। कुछ धातुओं को उनके सल्फाइडों या कार्बोनेट को उनके ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है क्योंकि ऑक्साइडों से धातु निष्कर्षण सरल होता है। जिंक तथा सीसा के सल्फाइडों तथा कार्बोनेटों को उनके ऑक्साइड में बदलने के लिए भर्जन प्रक्रिया प्रयुक्त की जाती है ।

                             Δ
2ZnS + 3O2  ———-→  2ZnO + 2SO2


प्रश्न 62. सल्फर के उपयोगों का वर्णन करें।

उत्तर⇒  सल्फर के उपयोग निम्नलिखित हैं-
(i) सल्फर से सल्फ्यूरिक अम्ल बनाया जाता है जिसे अम्लों का सम्राट् कहते हैं।
(ii) इसके उपयोग से त्वचा क्रीम, एंटीसेप्टिक फंगसनाशी बनाए जाते हैं।
(iii) इसका उपयोग बारूद एवं आतिशबाजी में किया जाता है।
(iV) प्राकृतिक रबड़ के गुणों में वृद्धि के लिए अर्थात् रबड़ के वल्कनीकरण में इसका उपयोग किया जाता है।


प्रश्न 63. एल्युमिनियम के दो प्रमुख अयस्कों के नाम व सूत्र लिखिए। ऐलुमिनियम से बनी मिश्र धातु के नाम लिखिए।

उत्तर⇒ एल्युमिनियम के अयस्क –

(i) बॉक्साइट Al2O3 .2H2(ii) क्रायोलाइट Na3AIF6
एल्युमिनियम से बनी मिश्र धातुएँ –

(i) ड्यूरेलियम, जिसका प्रयोग वायुयान तथा रसोई के समान बनाने में कियाजाता है।
(ii) मैग्नेलियम, जिसका प्रयोग मशीनों के भाग तथा तुलाओं की भुजाएं बनानेमें किया जाता है।


प्रश्न 64. एल्युमिनियम के उपयोग बताएँ।

उत्तर⇒ एल्युमिनियम के उपयोग –
(i) एल्युमिनियम हल्की धात होने के कारण, हवाई जहाजों की बॉडी आरमोटर इंजन बनाने के काम आती है।
(ii) यह बर्तन, फोटोफ्रेम तथा घरेलू उपयोग की ओर अनेक वस्तुएँ बनाने में काम आती है।
(iii) यह बिजली का सुचालक है, इसलिए आजकल बिजली के स्थानांतरण के लिए इनका प्रयोग किया जाता है ।
(iv) एल्युमिनियम की बारीक परतों को खाने का सामान, दवाइयाँ, दूध कीबोतलें आदि पैक करने में प्रयुक्त की जाती हैं।
(iv) एल्युमिनियम पाउडर सिल्वर पेंट बनाने के काम आता है ।


प्रश्न 65. वात्याभट्टी में चूना-पत्थर क्यों डालते हैं ?

उत्तर⇒ लोहे अयस्क में आवश्यक रूप से मिलावट के रूप में रेत विद्यमान होती है। इसे दूर करने तथा निष्कर्षण के लिए CO2 प्रदान करना चूने के पत्थर का कार्य होता है।
जब चूना-पत्थर भट्ठी में डाला जाता है तो वह कैल्सियम ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न करता है।

                    Δ
CaCO ———–→   CaO + CO2


प्रश्न 66. हवाई जहाजों का ढाँचा ऐलुमिनियम के मिश्र धातुओं से क्यों बनाया जाता है ? वर्णन करें।

उत्तर⇒ हवाई जहाज का ढांचा एल्युमिनियम के मिश्र धातुओं डुरेलिमिन और मैग्लिनियम से निम्नलिखित कारणों से बनाया जाता है-
(i) ये अति हल्की मिश्र धातु है जिसका आपेक्षिक घनत्व बहुत कम है।
(ii) सुचालक होने के कारण विधुत् प्रेषण तारें इनसे बनाई जा सकती हैं।
(iii) इन पर जंग नहीं लगता।।
(iv) इन मिश्र धातुओं की कठोरता बहुत अधिक होती है।
(v) ये रसायनों के प्रति बहुत क्रियाशील नहीं है।


प्रश्न 67. विधुत अपघटनी शोधन से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर⇒ कॉपर, जिंक, टिन, निकेल, चाँदी, सोना आदि जैसे अनेक धातुओं का शोधन विधुत् अपघटन द्वारा किया जाता है । इस प्रक्रिया में अशुद्ध धातु को ऐनोड तथा शुद्ध धातु की पतली परत को कैथोड बनाया जाता है। धातु के लवण विलयन का उपयोग विधुत्-अपघट्य के रूप में होता है। विधुत-अपघट्य में जब धारा प्रवाहित होती है तब एनोड पर स्थित शुद्ध धातु विधुत्-अपघट्य में घुल जाता है। इतनी ही मात्रा में शुद्ध धातु विधुत्-अपघट्य से कैथोड पर निक्षेपित हो जाता है। विलयशील अशुद्धियाँ विलयन में चली जाती हैं तथा अविलयशील अशुद्धियाँ ऐनोड के नीचे निक्षेपित हो जाती हैं जिसे ऐनोड अवपंक कहते हैं।


प्रश्न 68. आप ताँबे को कैसे शोधन करेंगे ? इसका वर्णन करें।

उत्तर⇒ अशुद्ध कॉपर को (+) एनोड बनाया जाता है जबकि शुद्ध कॉपर की पतली चादर को कथाड स जाड़ा जाता है । कोपर कथाड से जोडा जाता है। कॉपर अशुद्ध तांबे की छड सल्फेट जिसमें कुछ तनु H2SO4 को विधुत् अपघट्य के रूप में प्रयोग किया जाता है जैसा कि कॉपर सल्फेट शुद्ध तांबे की छड़ चित्र में दर्शाया गया है।

आप ताँबे को कैसे शोधन करेंगे

विधुत अपघट्य में से विधुत-धारा प्रवाहित की जाती है तो कॉपर कैथोड पर जमा होना आरंभ करता है और अशुद्धियाँ एनोड पर एनोड मड (गारा) के रूप में इकट्ठी हो जाती है।

Class 10th Chemistry

शुद्ध कॉपर धातु कैथोड पर प्राप्त होता है।


प्रश्न 69. वल्कनीकरण किसे कहते हैं ? इस प्रक्रिया में रबड़ में क्या परिवर्तन आते हैं ?

उत्तर⇒ सल्फर को प्राकृतिक रबड़ के साथ मिश्रित करने की प्रक्रिया को वल्कनीकरण कहते हैं । जब प्राकृतिक रबड़ को सल्फर से मिलाकर गर्म करते हैं तो रबड अधिक कठोर तथा कम लचकदार हो जाता है। रबड एक बहलक है जिसमें एक ही तल में अणुओं की एक लंबी श्रृंखला होती है जिसके कारण रबड को खींचा जा सकता है परंतु सल्फर मिलाने से उसका लचीलापन समाप्त हो जाता है, क्योंकि सल्फर रबड़ की श्रृंखला के समान अणुओं के मध्य आड़े बंध बनाता है। सल्फर कार्बन परमाणुओं के घूर्णन में भी बाधा डालती है।


प्रश्न 70. Alloys स्टील क्या है ? किन्हीं दो Alloy स्टील के नाम वर्णन सहित लिखें।

उत्तर⇒ लोहे के साथ अन्य धातुओं और अधातुओं को मिलाकर प्राप्त की जाने वाली मिश्रधातु स्टील कहलाती है।

दो Alloy स्टील के नाम-
(i) कार्बन स्टील-लोहे और कार्बन का मिश्र धातु कार्बन स्टील कहलाता है जिसमें कार्बन की मात्रा 0.5% से 1.5% तक होती है। कार्बन के अतिरिक्त सिलिकॉन, गन्धक, फॉस्फोरस तथा मैंगनीज भी होती है। कार्बन स्टील पेच, कील, गाड़ी की पटरियाँ, गार्डर तथा मशीनें बनाने में काम आता है । समुद्री जहाज, इमारतें तथा वाहन भी इसी से बनते हैं।

(ii) स्टेनलेस स्टील- जिसमें क्रोमियम, निकल, ताँबा, टंगस्टन या वेनडेनियम को मिलाया जाता है उसे स्टेनलेस स्टील कहते हैं। इसमें क्रोमियम 18% तथा निकल 8% होता है। यह डेयरी उद्योग अस्पतालों तथा बर्तन तैयार करने में काम आता है।

 

Science ( विज्ञान  ) दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

1. धातुओं के रासायनिक गुणधर्मो को लिखें।

उत्तर ⇒ धातुएँ विद्युत रासायनिक धनात्मक तत्त्व होती हैं। इनको विद्युत धनात्मक तत्त्व इसलिए कहते हैं, क्योंकि ये इलेक्ट्रॉन त्याग कर आयनीकृत होती हैं तथा धनायन निर्मित करती हैं।

उदाहरणार्थ  –  K  →  K+ + e, Ca  →  Ca2+ 2e

धातुओं के विधुत धनात्मक अभिलक्षण द्वारा कुछ विशेष अभिलाक्षणिक रासायनिक गुणधर्म उत्पन्न होते हैं।

(a)धातुओं की अभिक्रिया ऑक्सीजन के साथ-धातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कर धातु के ऑक्साइड बनाती हैं।
2Mg + O2 → 2Mgo
धातु के ऑक्साइड की प्रकृति क्षारकीय होती है लेकिन एलुमीनियम, जिंक की ऑक्साइड अम्लीय और क्षारकीय दोनों होती है। इस प्रकार के धातु ऑक्साइडों को उभयधर्मी ऑक्साइड कहते हैं।
अधिकांश धातु ऑक्साइड जल में अघुलनशील हैं लेकिन कुछ धातु के ऑक्साइड तीव्रता से अभिक्रिया कर क्षार बनाते हैं।
जैसे – Na2O + H2O
K2O + H2O → 2KOH

(b) धातु की अभिक्रिया जल से-धातुएँ जल के साथ अभिक्रिया कर संगत धातु हाइड्रॉक्साइड अथवा ऑक्साइड बनाते हैं और हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं।

जैसे- 2K + 2H2O → 2KOH + H2
2Na + 2H2O → 2NaOH + H2

कुछ धातुएँ जल से मंद गति से अभिक्रिया करती हैं।
जैसे — Ca + 2H2O → Ca(OH)2 +H2

मैग्नीशियम गर्म जल से अभिक्रिया कर मैगनीशियम हाइड्रोक्साइड तथा H 2 गैस मुक्त करती है।
2Mg + 2H2O → 2Mg(OH)2 + H2

Al, Zn और Fe जल के भाप से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस मुक्त करता है।
2Al + 3H 2O → Al2O3 +3H2O
3Fe + 4H2O → Fe3O4 + 4H2O

(c) धातुएँ अम्लों के साथ अभिक्रिया कर धातु के लवण और हाइड्रोजन गैस मुक्त करता है।
Mg + 2HCL → MgCl2 + H2
Zn + 2HCl → ZnCl2 +H2

धातुएँ HNO3 से अभिक्रिया करता और H2 गैस मुक्त नहीं करता है।

(d) धातुएँ क्लोरीन संग अभिक्रिया कर धातु के क्लोराइड बनाता है।
Ca + Cl2 → CaCl2

(e) धातुएँ हाइड्रोजन के साथ विशेष परिस्थितियों में अभिक्रिया कर धातु के हाइड्रॉइड बनाता है।
जैसे – 2Na + H2 → 2NaH
Ca + H2 → CaH2


2. अधातुओं के रासायनिक गुणधर्मों को लिखें।

उत्तर ⇒ अधातुएँ इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण कर ऋणायन बनाता है।
Cl + e → Cl
O + 2e → O2-
S + 2e → S2-

(a) ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया – अधातुएँ ऑक्सीजन से संयोग कर ऑक्साइड बनाती हैं। इनके ऑक्साइड अम्लीय अथवा उदासीन होते हैं। अधातुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी होती है और अधातु ऑक्साइड बनाते हैं। अतः इन्हें सहसंयोजी यौगिक कहते हैं।
C(s) + O 2(g) → Co2(g)
S(s) + O 2(g) → SO2(g)

Co2 और SO2 दोनों ही अम्लीय ऑक्साइड है अतः ये जल में घुलकर अम्ल बनाते हैं।
CO2 + H2O → H2CO3
 कार्बनिक अम्ल
So2 + H2O → H2SO3
 सल्फ्यूरसअम्ल

CO एवं N2O उदासीन ऑक्साइड के उदाहरण हैं। लिटमस पत्रों के प्रति उदासीन हैं।

(b) अम्लों के साथ अभिक्रिया – अधातुएँ तनु अम्लों से हाइड्रोजन विस्थापित नहीं करती हैं। तनु अम्लों से अधातुओं द्वारा हाइड्रोजन तभी विस्थापित हो सकती है जब अभिक्रिया द्वारा उत्पन्न प्रोटॉनों (H +) को इलेक्ट्रॉनों की पूर्ति की जाए।

H2SO4 (aq.) → 2H + (aq.) + SO42 (aq.)
2H + (aq.) + 2e  → H2(g)

अधातुएँ इलेक्ट्रॉन ग्राही होती हैं। इनके द्वारा प्रोटॉनों (H +) को इलेक्ट्रॉनों की पूर्ति नहीं हो सकती है। अतः अधातुएँ तनु अम्लों से हाइड्रोजन को विस्थापित नहीं कर सकती है।

(c) क्लोरीन के.साथ अभिक्रिया – अधातुएँ क्लोरीन के साथ अभिक्रिया करके सहसंयोजी क्लोराइड निर्मित करती है। सहसंयोजी क्लोराइड सामान्यतः वाष्पशील द्रव अथवा गैस होती है। जैसे—फॉस्फोरस क्लोराइड।
P4(s) + 6Cl2(g) → 4PCI3 (g)
फॉस्फोरस ट्राइक्लोराइड

(d) हाइड्रोजन के साथ अभिक्रिया – अधातुएँ हाइड्रोजन के साथ संयुक्त होकर हाइड्राइड प्रदान करती हैं। जैसे अमोनिया (NH3), मिथेन (CH 4), हाइड्रोजन सल्फाइड (H 2S), जल (H 2O) इत्यादि।
इनके यौगिक स्थायी होते हैं जो अधातु एवं हाइड्रोजन परमाणुओं के मध्य इलेक्ट्रॉन युग्म के सहभाजन के फलस्वरूप प्राप्त होते हैं।
N2(g) + 3H 2(g) → 2NH3(g)
H2(g) + S(s) → H2S(g)


3. अयस्कों से धातु के निष्कर्षण में प्रयुक्त चरणों को लिखिए।

उत्तर ⇒ धातुकर्म — धातु के अयस्कों से शुद्ध धातु प्राप्त करना एवं उनका शुद्धिकरण आदि धातुकर्म कहा जाता है। अयस्क से शुद्ध धातु के निष्कर्षण के विभिन्न चरण इस प्रकार हैं -:

धातुकर्म


4. धातुओं के भौतिक गुणधर्मों को लिखें।

उत्तर ⇒ धातुओं के भौतिक गुणधर्म निम्नांकित हैं-:
(i) धात्विक चमक – प्रत्येक धातु का अपना धात्विक चमक होता है जिससे इसे पहचानने में सुविधा होती है। धातुओं में यह गुण धात्विक चमक है।

(ii) कठोरता – धातुएँ समान्यत: कठोर होती हैं आयरन, ऐलुमिनियम तथा कॉपर काफी कठोर धातएं हैं। इन्हें चाक से नहीं काटा जा सकता है। लेकिन Na, और पोटैशियम धातु मुलायम है जिसे चाकू से भी काटा जा सकता है। यह गुण कठोरता कहलाती है।

(iii) आघातवर्ध्यता एवं तन्यता – धातुओं को हथौड़े से पीटकर पतला चादर बनाया जा सकता है। धातु का यही गुण आघातवर्ध्यता कहलाता है।
धातुओं के तार खींचें जा सकते हैं। यह गुण तन्यता कहलाती है।

(iv) ऊष्मीय तथा विद्युतीय चालकता – धातु के एक सिरे को गर्म करने पर दूसरा सिरा भी गर्म हो जाता है। धातु में यह गुण ऊष्मीय चालकता कहलाता है। धातु के तार द्वारा विद्युत एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जा सकता है। धातुओं में यह गुण विद्युतीय चालकता कही जाती है।


5. अधातु के पाँच भौतिक गुणों को लिखिए।

उत्तर ⇒अधातुओं के गुण –

(i) अधातुओं में धात्विक चमक नहीं होती है। अपवाद आयोडीन।
(ii) अधातुएँ ऑक्साइड प्रदान करती हैं।
(iii) अधातु के गलनांक और क्वथनांक निम्न होते हैं।
(iv) अधिकतर अधातुएँ गैसीय अवस्था में पायी जाती हैं। कुछ अधातुएँ ठोस और द्रव अवस्था में भी पाई जाती हैं। जैसे ब्रोमीन द्रव अवस्था में और सल्फर ठोस अवस्था में रहती है।
(v) अधातुएँ जल में अल्प घुलनशील होती हैं।


6. आयनिक यौगिकों के गुणधर्मों को लिखें।

उत्तर ⇒आयनिक यौगिक के निम्नांकित गुणधर्म हैं –
(i) इसका गलनांक तथा क्वथनांक उच्च होता है।
(ii) इनके धन और ऋण आयनों के बीच मजबूत आकर्षण बल के कारण ये यौगिक ठोस एवं थोड़े कठोर होते हैं।
(iii) ये यौगिक सामान्यतः जल में घुलनशील होते हैं। लेकिन पेट्रोल, किरोसीन आदि जैसे विलायकों में अघुलनशील होते हैं।
(iv) इस यौगिक के जलीय विलयन विद्युत के अच्छे चालक हैं, तथा आयन विपरीत इलेक्ट्रोड की ओर गमन करते हैं।


7. निम्नलिखित पदों की व्याख्या करें :
(क) खनिज (ख) अयस्क (ग) गैंग

उत्तर ⇒ (क) खनिज – भू-पर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले तत्त्वों या यौगिकों को खनिज कहते हैं। ये प्रायः खानों से निकाले जाते हैं।

(ख) अयस्क – वैसे खनिज जिनसे धातु का व्यावसायिक उत्पादन होता है, अयस्क कहलाते हैं। अयस्कों में धातु प्रचुर मात्रा में उपस्थित होते हैं। इससे धात का उत्पादन सरलता से कम खर्च में होता है।

(ग) गैंग – पृथ्वी से प्राप्त खनिज अयस्कों में मिट्टी, रेत आदि कई अशुद्धियाँ होती हैं। धातुओं के निष्कर्षण से पहले अयस्क से अशुद्धियों को हटाना आवश्यक होता है। ये अशुद्धियाँ गैंग कहे जाते हैं। अयस्कों को गैंग से हटाने के लिए जिन प्रक्रियाओं का उपयोग होता है वे अयस्क एवं गैंग के भौतिक अथवा रासायनिक गुण धर्मों पर आधारित होते हैं। इनके पृथक्करण के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जाता है।


8.(a) रासायनिक गुणधर्मों के आधार पर धातुओं एवं अधातुओं में विभेद कीजिए।
(b) दिये गये धातुओं की क्रियाशीलता को अवरोही क्रम से व्यवस्थित करें।
(i) Zn (ii) Fe (iii) Ca (iv) Mg (v) K (vi) Na

उत्तर -(a)

धातु अधातु
1. धातु को वायु में गर्म करने परधातु के ऑक्साइड बनते हैं।
   4Na+O2 → 2Na2O
   4K+O2 → 2K2O
1. अधातु को वायु में तपाने पर अधातु के ऑक्साइड बनते हैं।
S + O2 → SO2
C + O2 → CO2
2. धातु के ऑक्साइड क्षारीय होते हैं तथा जल के साथ अभिक्रिया कर क्षारक बनाते हैं।
Na2O + H2O → 2NaOH
                              (क्षार)
K2O +H2O → 2KOH
                           (क्षार)
2. अधातुओं के ऑक्साइड अम्लीय होते हैं और जल के साथ अभिक्रिया कर अम्ल बनाता है।
SO2 + H2O + H2SO3
                      (सल्फ्यूरस अम्ल)
SO3 + H2O → H2SO4
                    (सल्फ्यूरिक अम्ल)
3. धातुएँ अम्लों से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन विस्थापित करती है।
Ca + H 2SO 4 → CaSO4 + H2
Zn + 2HCL → ZnCl2 + H2
3. अधातुएँ अम्लों से अभिक्रिया नहीं करती हैं ।
4. कुछ धातुएँ जल से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन उत्पन्न करती है।
Ca + 2H2O → Ca(OH)2 + H2
4. अधातुएँ जल से अभिक्रिया नहीं करती हैं।

 

(b) K, Na, Ca, Mg, Zn, Fe


9. धातुओं का संक्षारण किन-किन कारणों से होता है ?

उत्तर ⇒ धातुओं का संक्षारण निम्न कारणों से होता है –
(i) खुली वायु में सिल्वर की वस्तुओं को कुछ दिनों के लिए छोड़ देने पर उसकी सतह काली हो जाती है। सिल्वर का वायु में उपस्थित सल्फर के साथ अभिक्रिया कर सिल्वर सल्फाइड की परत बनने के कारण ऐसा होता है।

(ii) कॉपर को आर्द्र वायु में छोड़ने पर भूरे-रंग की चमक धीरे-धीरे खत्म हो जाती है तथा इस पर हरे रंग की परत चढ़ जाती है। यह हरा पदार्थकॉपर कार्बोनेट है।

(iii) लंबे समय तक लोहे की वस्तुओं को आर्द्र वायु में छोड़ देने पर उसकी परत भूरे रंग की हो जाती है जिसे जंग लगना कहा जाता है। धीरे-धीरेलोहे की वस्तुएँ संक्षारित होकर बर्बाद हो जाती हैं।


10. लोहा के एक प्रमुख अयस्क का नाम एवं सूत्र लिखें। इस अयस्क का सान्द्रण कैसे होता है ?

उत्तर ⇒लोहे के प्रमुख अयस्क हेमेटाइट Fe 2O 3 है। लोहे के निष्कर्षण में वात्य भट्ठी में होने वाली अभिक्रियाएँ –चित्र वात्य भट्टी

वात्य भट्ठी में चार्ज के रूप में निस्तापित अयस्क (8 भाग), कोक (4 भाग) तथा चूने का पत्थर (1भाग) का मिश्रण डाला जाता है। भट्ठी में चार्ज अधिक ताप की ओर आता जाता है और उसमें क्रमिक रूप से रासायनिक परिवर्तन होते जाते हैं। बिलकुल ऊपर शीर्ष का क्षेत्र तप्तीकरण क्षेत्र (Preliminary heating zone) कहलाता है, इसमें चार्ज की नमी आदि दूर हो जाती है।इसके बाद का क्षेत्र अपचयन का ऊपरी क्षेत्र (Upper Zone of reduction) कहलाता है जिसका ताप 900°C लगभग होता है। यहाँ निम्न अभिक्रियाएँ सम्पन्न होती हैं और CO के द्वारा फेरिक ऑक्साइड का आयरन में अपचयन हो जाता है।इस प्रकार Fe की प्राप्ति होती है।इस प्रकार Fe की प्राप्ति होती है।


11. सक्रियता श्रेणी क्या है ?

उत्तर ⇒ सक्रियता श्रेणी वह सूची है जिसमें धातुओं की क्रियाशीलता को अवरोही क्रम में व्यवस्थित किया जाता है। इसे सक्रियता श्रेणी कहा जाता है।
नीचे धातुओं की सापेक्ष अभिक्रियाशीलताएँ दर्शायी गई हैं-

सक्रियता श्रेणी क्या है ?


12. विद्युत अपघटनी परिष्करण द्वारा शुद्ध ताँबा की प्राप्ति कैसे की जाती है ?

उत्तर ⇒ कॉपर, जिंक, टिन, निकेल, सिल्वर, गोल्ड आदि धातुओं का परिष्करण विद्युत अपघटन द्वारा किया जाता है। __एक विद्युत् अपघटनी टैंक लिया जाता है। इसके अंदर अम्लीयकृत कॉपर सल्फेट का विलयन अपघट्य के रूप में टैंक में रखा जाता है। इस प्रक्रम में अशुद्ध ताँबे का एनोड और शुद्ध ताँबे का पतला. कैथोड बनाकर लवण विलयन में डाल दिया जाता है। विद्युत अपघट्य से जब विद्युत-धारा प्रवाहित किया जाता है, तब एनोड पर स्थित अशुद्ध धातु विद्युत अपघट्य में घुल जाती है। इतनी ही मात्रा में शुद्ध धातु विद्युत अपघट्य से कैथोड पर निक्षेपित हो जाती है। विलेय अशुद्धियाँ विलयन में चली जाती हैं तथा अविलेय अशुद्धियाँ एनोड तली पर निक्षेपित हो जाती हैं। इन अशुद्धियों को एनोड पंक कहा जाता है। इस प्रकार विद्युत अपघटन द्वारा शुद्ध धातु का परिष्करण हो जाता है।


13. जस्ता के अयस्क से जस्ता निष्कर्षण करने के सिद्धांत का उल्लेख करें।

उत्तर ⇒ आयरन, जिंक, लेड, कॉपर आदि सक्रियता श्रेणी के मध्य में पाए जाने वाले धातु हैं। प्रकृति में यह प्रायः सल्फाइड या कार्बोनेट के रूप में पायी जाती है। सल्फाइड या कार्बोनेट की तुलना में धातु को उसके ऑक्साइड के रूप में प्राप्त करना आसान है। अतः अपचयन से पहले धातु के सल्फाइड एवं कार्बोनेट को धातु के ऑक्साइड में परिणत करना जरूरी है। सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में अधिक ताप पर गर्म करने पर यह ऑक्साइड में बदल जाता है। इस प्रक्रिया को भंजन कहते हैं। कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु में अधिक ताप पर गर्म करने पर यह ऑक्साइड में बदल जाता है। इस प्रक्रिया को निस्तापन कहा जाता है। जिंक के अयस्कों के भंजन एवं निस्तापन के समय निम्नांकित अभिक्रियाएँ होती हैं –BHANJAN

इसके बाद इन ऑक्साइडों को कार्बन द्वारा अपचयित कर धातु की प्राप्ति कर ली जाती है।

TAPAN

इस प्रकार धातु का निष्कर्षण हो जाता है।


14. बॉक्साइट अयस्क से एलुमिनियम धातु के निष्कर्षण संक्षेप में अभिक्रिया सफेत लिखें।

उत्तर ⇒पहले बॉक्साइट से एलुमिना का निर्माण किया जाता है। बॉक्साइट के महीन चूर्ण को गर्म सोडियम हाइड्रोक्साइड के साथ अभिक्रिया कराई जाती है। एलुमिनियम ऑक्साइड सोडियम एलुमिनेट बनकर घुल जाता है।

AI2O3 + 2H2O + 2NaOH → 2NaAIO2 + 3H2O

फिर घोल को छानकर तनु बना लिया जाता है। फिर इसमें ताजा अवक्षेपित एलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड डालते हैं। सोडियम हाइड्रोक्साइड अवक्षेपित हो जाता है। अवक्षेप को छानकर सुखा लिया जाता है। इसे गर्म कर शुद्ध एलुमिना तैयार कर लिया जाता है।

2AI (OH)2 → AL 2O3 + 3H2O

अब एलुमिना में क्रायोलाइट मिलाकर विद्युत विच्छेदन किया जाता है। कैथोड पर एलुमिनियम और एनोड पर ऑक्सीजन मुक्त होता है।

Al2O3 → 2Al3+ + 3O2
2Al3 + 6e → 2AI (कैथोड पर)
30 2- → 3O2 + 6e (एनोड पर)
एलुमिनियम निष्कर्षण की यह बेयर विधि कहलाती है।


15. सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर स्थित धातुओं का निष्कर्षण किस प्रकार किया जाता है ?

उत्तर ⇒ अभिक्रियाशीलता श्रेणी में सबसे ऊपर स्थित धातुएँ अत्यंत अभिक्रियाशील होती हैं। इन्हें कार्बन के साथ गर्म कर उनके यौगिकों से प्राप्त नहीं किया जा सकता है। कार्बन के द्वारा सोडियम, मैग्नीशियम, कैल्सियम, एलुमिनियम आदि के ऑक्साइड को अपचयन कर उन्हें धातुओं में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है। इन धातुओं की बंधुता कार्बन की अपेक्षा ऑक्सीजन के प्रति अधिक होती है। इन धातुओं को विद्युत अपघटनी अपचयन द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। सोडियम, मैग्नीशियम एवं कैल्सियम को उनके गलित क्लोराइडों के विद्युत अपघटन से प्राप्त किया जाता है। कैथोड पर धातुएँ निक्षेपित हो जाती हैं तथा एनोड पर क्लोरीन मुक्त होती है।

कैथोड पर – Na+ + e → Na
एनोड पर – 2Cl → Cl2 +2e

इसी प्रकार एलुमिनियम ऑक्साइड के विद्युत अपघटनी अपचयन से ऐलुमिनियम प्राप्त किया जाता है।


16. सक्रियता श्रेणी में नीचे आने वाली धातुओं का निष्कर्षण कैसे किया जाता है ?

उत्तर ⇒सक्रियता श्रेणी में नीचे आने वाली धातुएँ काफी अनभिक्रियाशील होती हैं। इन धातुओं के ऑक्साइड को केवल गर्म करने से ही धातु प्राप्त किया जा सकता है। जैसे—सिनाबार (HgS) मरकरी का एक अयस्क है। वायु में गर्म करने पर यह सबसे पहले मयूंरिक ऑक्साइड (HgO) में परिवर्तित होता है और अधिक गर्म करने पर मयूंरिक ऑक्साइड मरकरी (पारद) में अपचयित हो जाता है।

शिनाबर

इसी प्रकार, प्राकृतिक रूप से Cu 2S के रूप में उपलब्ध ताँबे को केवल वायु में गर्म कर इसको अयस्क से अलग किया जा सकता है।प्रकार


17. निस्तापन क्या है ? उदाहरण के साथ समझाइए।

उत्तर ⇒अयस्क को उसके द्रवणांक से कम तापक्रम पर तीव्रता से गर्म करने कि क्रिया जिससे उड़नशील अशुद्धियाँ बाहर निकल जाती हैं और ऑक्सीलवणऑक्साइड में परिणत हो जाता है, निस्तापन कहा जाता है।कार्बोनेट अयस्क जैसे चूना पत्थर (CACO3) के निस्तापन से कैल्सियम ऑक्साइड प्राप्त होता है। साथ ही CO2 गैस भी निकलता है।CACO3इसी प्रकार जिंक कार्बोनेट के निस्तापन से ZnO और Co2 बनता है।

ZNCO3

इसके बाद कार्बन जैसे उपयुक्त अपचायक का उपयोग कर धातु ऑक्साइड से धातु प्राप्त किया जाता है।CAO+C


18. धातुओं एवं अधातुओं के बीच कैसे विभेद करेंगे ?

उत्तर ⇒धातुओं और अधातुओं के गुणों में विभेद-

भौतिक गुणों में विभेद धातुएँ

धातुएँ अधातुएँ
(1) धातुएँ सामान्य ताप पर ठोस होती हैं परन्तु केवल पारा सामान्य ताप पर तरल अवस्था में होता है। (1) अधातुएँ सामान्य ताप पर तीनों अवस्थाओं में पाई जाती हैं।। फॉस्फोरस और सल्फर ठोस रूप में, H2, O2, N2 गैसीय रूप में तथा ब्रोमीन तरल रूप में होते हैं।
(2) धातुएँ तन्य तथा आधातवर्ध्य तथा लगिष्णु होती हैं। (2) ये प्रायः भंगुर होती हैं।
(3) धातुएँ प्रायः चमकदार होती हैं अर्थात् उनमें धात्विक चमक होती हैं। (3) अधातुओं में धात्विक चमक नहीं होती परंतु हीरा, ग्रेफाइट तथा आयोडीन इसके अपवाद हैं।
(4) धातुएँ ऊष्मा तथा विधुत की सुचालक होती हैं परंतु बिस्मथ इसका अपवाद है। (4) ग्रेफाइट और गैस कार्बन को छोड़कर सभी अधातुएँ कुचालक हैं।
(5) धातुओं के गलनांक तथा क्वथनांक बहुत अधिक होते हैं। (5) अधातुओं के गलनांक तथा क्वथनांक कम होते हैं।
(6) धातुएँ अधिकांशतः कठोर होती हैं परंतु सोडियम तथा पोटैशियम चाकू से काटी जा सकती है। (6) इनकी कठोरता भिन्न-भिन्न होती है। हीरा सब पदार्थों से कठोरतम है।
(7) धातुओं का आपेक्षिक घनत्व अधिक होता है परंतु Na, K इसके अपवाद हैं। (7) अधातुओं का आपेक्षिक ताप प्रायः कम होता है।
(8) धातुएँ अपारदर्शक होती हैं। (8) गैसीय अधातुएँ पारदर्शक हैं।

 

रासायनिक गुणों में विभेद

धातुएँ अधातुएँ
(1) धातुएँ क्षारीय ऑक्साइड बनाती हैं जिसमें से कुछ क्षार बनाती हैं। (1) अधातुएँ अम्लीय तथा उदासीन ऑक्साइड बनाती हैं।
(2) धातुएँ अम्लों से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस पुनः स्थापित करती गैस को पुनः स्थापित नहीं करती हैं। (2) अधातुएँ अम्लों में से हाइड्रोजन हैं तथा अनुरूप लवण बनाती हैं।
(3) धातुएँ धनात्मक आवेश की प्रकृति की होती हैं। (3) अधातुएँ ऋणात्मक आवेश की प्रकृति की होती हैं।
(4) धातुएँ क्लोरीन से संयोग करके क्लोराइड बनाती हैं जो वैद्युत् संयोजक होते हैं। (4) अधातुएँ क्लोरीन से संयोग कर क्लोराइड बनाती हैं, परन्तु वे सहसंयोजक होते हैं।
(5) कुछ धातुएँ हाइड्रोजन से संयोग करके हाइड्रोक्साइड बनाती हैं जो विधुत संयोजक होते हैं। (5) अधातुएँ हाइड्रोजन के साथ अनेक स्थाई हाइड्राइड बनाती हैं जो सहसंयोजक होते हैं।
(6) धातुएँ अपचायक हैं। (6) अधातुएँ ऑक्सीकारक हैं।
(7) धातुएँ जल विलयन में धनायन बनाती हैं। (7) अधातुएँ जलीय विलयन में ऋणायन बनाती हैं।

 


19. अयस्क क्या है ? अयस्क सांद्रण की सामान्य विधियों का परिचय दीजिए।

उत्तर ⇒ अयस्क – वैसे खनिज जिनसे कम खर्च में धातु का निष्कर्षण किया जाय उसे अयस्क कहते हैं।

अयस्क सांद्रण की सामान्य विधियाँ – अयस्क या खनिज पृथ्वी से निकाले जाते हैं जिनके साथ अनेक प्रकार के व्यर्थ पदार्थ होते हैं जिन्हें गैंग कहते हैं। निष्कर्षण की प्रक्रिया से पहले उन्हें हटाना आवश्यक होता है। इस प्रकार गैंग का साथ हटाने से अयस्क में धातु की मात्रा, अधिक हो जाती है जिसे सांद्रण कहते हैं।अयस्क सांद्रण की सामान्य विधियाँ

 

अतः किसी अयस्क को अगले प्रक्रमों के लिए तैयार करने के लिए अयस्क का सांद्रण करना होता है । अयस्क से गैंग हटाने की विधि अयस्क के तथा गैंग के भीतर या रासायनिक गुणों के अंतर पर आधारित होती है।

सांद्रण की भौतिक विधियाँ –
(i)चंबकीय विधि – यह विधि आयरन, कोबाल्ट, निकिल ; जैसे-चुंबकीय पदार्थों की अशुद्धियों को अलग करने के लिए स्वीकार की जाती है। जो खनिज चुंबकीय प्रकृति के होते हैं वे चुंबकीय क्षेत्र की ओर आकर्षित होते हैं जबकि गैंग आदि आकर्षित नहीं होते । क्रोमाइट तथा पाइरोल्युसाइट के अयस्क इसी विधि द्वारा सांद्रित किए जाते हैं। इस विधि में पीसे हुए अयस्क को एक कन्वेयर बैल्ट के ऊपर रखते हैं। कन्वेयर बैल्ट दो रोलरों के ऊपर से गुजरती है जिनमें से एक चुंबकीय होता है। जब अयस्क चुंबकीय किनारे पर से नीचे आता है, तो चुंबकीय और अचुंबकीय पदार्थ दो अलग-अलग ढेरों में एकत्रित हो जाते हैं। लोहे के अयस्क मैग्नेटाइट का सांद्रण इसी विधि द्वारा किया जाता है।

(ii)द्रवचालित धोना – इस विधि में बारीक पिसे हुए अयस्क को पानी की तेज धार में धोया जाता है। इस तेज धार में हल्के गैंग कण बह जाते हैं जबकि भारी खनिज कण तली में बैठ जाते हैं। टिन और लैड के अयस्क इसी विधि द्वारा सांद्रित किए जाते हैं।

(iii)फेन-प्लावन विधि – इस विधि में बारीक पिसे हुए अयस्क को जल एवं किसी उपयुक्त तेल के साथ एक बड़े टैंक में मिलाया जाता है। खनिज कण पहले ही तेल से भीग जाते हैं जबकि गैंग के कण पानी से भीग जाते हैं। अब इस मिश्रण में से बुलबुलों के रूप में वायु प्रवाहित की जाती है जिससे खनिज कण युक्त तेल के झाग या फेन बन जाते हैं जो जल की सतह पर तैरने लगती है जिन्हें बड़ी सरलता से जल के ऊपर से निकाला जा सकता है। ताँबा, सीसा तथा जिंक के सल्फाइड का सांद्रण करने के लिए इस विधि का प्रयोग किया जाता है।

(iv) रासायनिक विधियाँ – रासायनिक पृथक्करण में खनिज तथा गैंग के मध्य रासायनिक गुणों के अंतर का उपयोग किया जाता है। इसकी एक मुख्य विधि है—बेयर की विधि, जिसके द्वारा बॉक्साइट से ऐलुमिनियम ऑक्साइड प्राप्त किया जाता है।

बेयर विधि द्वारा ऐलुमिनियम अयस्क का सांद्रण -:

इस विधि में बॉक्साइट को गर्म साडियम हाइड्रोक्साइड के साथ अपचयित किया जाता है जिसे NaAlO2 जो जल में घलनशील हैं, गैंग को छानकर अलग कर दिया जाता है। NaAlO2 का हाइडोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया करवाई जाती है जिससे ऐलुमिनियम हाइड्रोक्साइड प्राप्त होता है । जिसके बाद ऐलुमिनियम हाइड्रोक्साइड को गर्म करके शुद्ध एलुमिनियम ऑक्साइड प्राप्त होता है। विभिन्न अभिक्रियाएँ निम्नलिखित प्रकार से है –बेयर विधि द्वारा ऐलुमिनियम अयस्क का सांद्रण

 

 

 


20. मिश्रधातु किस कहते हैं ? इनके बनाने के उद्देश्यों का वर्णन करें।

उत्तर ⇒मिश्रधातु किसी धात का किसी अन्य धातु या अधातु के साथ मिलाकर बनाया गया संगामी मिश्रण, मिश्रधातु कहलाता है। जैसे—टांके में कलई तथा सीसा समान मात्रा में मिलाया जाता है। उदाहरण के लिए, स्टेनलेस स्टील, टांका, पीतल, कांसा बैलमैटल आदि सभी मिश्रधातुएँ हैं।

मिश्रधातुआ क उपयोग
(i) कठोरता बढ़ाने के लिए – लोहे में कार्बन की मात्रा मिलाकर स्टेनलैस स्टील बनाया जाता है जो लोहे से अधिक कठोर होता है । सोने में तांबा तथा चांदी में सीसा मिलाने से उनकी कठोरता अधिक हो जाती है। ड्यूरेलियम ऐलमिनियम से बना मिश्र धातु है जो अत्यधिक कठोर होता है।

(ii) शक्ति बढ़ाने के लिए – इस्पात, ड्यूरेलियम आदि मिश्र धातु कठोर होने के कारण शक्तिशाली भी होते हैं।

(ii) संक्षारण रोकने के लिए – जैसे स्टेनलेस स्टील, लोहे तथा जिंक से बनी मिश्र धातु आदि पर जंग नहीं लगता ।

(iv) ध्वनि उत्पन्न करने के लिए – ताँबे तथा कलई से बनाई गई मिश्र धात बैल मैटल होती है जिससे अधिक ध्वनि उत्पन्न हो जाती है।

(v) गलनांक कम करने के लिए – जैसे रोज-मैटल मिश्र धात है। इसका गलनांक कम होता है। यह बिस्मथ कलूई और सीसे बनती है।

(vi) उचित साँचे में ढालने के लिए – काँसा तथा टाइप मैटल ।

(vii) रंग परिवर्तन के लिए – ताँबे तथा ऐलुमिनियम से बनी ऐलमिनियम ब्रांज मिश्र धातु का सुनहरी रंग होता है।

(vii) घरेलू उपयोग – घरों, कारखानों, दफ्तरों में सभी जगह मिश्र धातुओं का उपयोग होता है जैसे घर के बर्तन, अलमारी, पंखे, फ्रिज, आभूषणों आदि में मिश्र धातुओं का उपयोग होता है।


21. जारण और निस्तापन से आप क्या समझते हैं ? एक उदाहरण देकर समझायें । अभिक्रिया श्रेणी (Reactivity Series) के मध्य के तत्वों का निष्कर्षण उनके oxides से किस प्रकार करते हैं ?

उत्तर ⇒ जारण या भर्जन (Roasting) भर्जन में सान्द्रित अयस्क को वायु की अधिकता में खुब गर्म किया जाता है जिससे वाष्पशील अशद्धियाँ बाहर निकल जाती हैं तथा अयस्क का ऑक्सीकरण हो जाता है। यह मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्कों के लिए परावर्तनी भट्टी में किया जाता है। जैसे जिंक ब्लैण्ड (ZnS) का जारण 2ZnS + 3O2 2ZnO + 2sO2

निस्तापन (Calcination) – सान्द्रित अयस्क को वायु की अनुपस्थिति में उसके गलनांक से नीचे गर्म करने पर उसमें से वाष्पशील अशुद्धियाँ अलग हो जाती हैं तथा अयस्क सरन्ध्र (Porous) हो जाता है । यह मुख्य रूप से कार्बोनेट, हाइड्रेटेड अयस्कों में किया जाता है।FE2O3

अभिक्रिया श्रेणी के मध्य के तत्वों का निष्कर्षण उनके ऑक्साइड को कार्बन द्वारा अपचयन से करते हैं।

ZnO + C  → Zn + CO

Fe2O3 + 3C → 2Fe +3CO


22. बॉक्साइट का रासायनिक सूत्र लिखें। एल्यमीनियम का शोधन कैसे किया जाता है ?

उत्तर ⇒बॉक्साइट का रासायनिक सूत्र : एल्युमीनियम का शोधन वैद्युत अपघटन विधि द्वारा होता है। इसमें अशुद्ध एल्युमीनियम को एनोड एवं शुद्ध एल्युमीनियम की प्लेट को कैथोड के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। एल्युमीनियम के एक लवण का विलयन वैद्युत अपघट्य का कार्य करता है। विद्युत धारा प्रवाहित करने पर एनोड से शुद्ध धातु निकलकर विलयन में जाती है और विलयन में से उतनी ही शुद्ध धातु कैथोड पर एकत्रित हो जाती है। विलेय अपद्रव्य विलयन में चले जाते हैं, जबकि अविलेय ऐनोड के नीचे पेंदी में एकत्र हो जाते हैं जो ‘एनोड मड’ कहलाते हैं।


23. (a) लोहा के एक प्रमुख अयस्क का नाम एवं इसका सूत्र लिखें। (b) इस अयस्क का सांद्रण कैसे होता है ?

उत्तर ⇒ (a) हेमेटाइट – Fe2O. xH2O ;  मैग्नेटाइट – Fe3O4

(b) लोहा के अयस्क का सान्द्रण : लोहा के अयस्क का सान्द्रण चुम्बकीय पृथक्करण विधि द्वारा किया जाता है। इस विधि में दो पूलियों के ऊपर का अचुम्बकीय बेल्ट चढ़ा होता है। एक पूली अचुम्बकीय होती है तथा दूसरी पूली एक विद्युत चुम्बक की बनी होती है। अचुम्बकीय पूली पर चूर्णित अयस्क गिराया जाता है जो बेल्ट के सहारे चुम्बकीय पूली तक जाता है और वहाँ चुम्बकीय अयस्क अचुम्बकीय अशुद्धियों से पृथक हो जाता है।

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