कार्य तथा ऊर्जा Work and Energy

कार्य तथा ऊर्जा Work and Energy

कार्य की वैज्ञानिक संकल्पना
• अपने दैनिक जीवन में हम किसी भी लाभदायक शारीरिक या मानसिक परिश्रम को कार्य समझते हैं। किन्तु विज्ञान के दृष्टिकोण से कार्य करने के लिए दो दशाओं का होना आवश्यक है – पहला वस्तु – पर कोई बल लगना चाहिए तथा दूसरा वस्तु विस्थापित होनी चाहिए।
• एक नियत बल द्वारा किया गया कार्य यदि किसी वस्तु पर एक नियत बल F कार्य करता है तथा वस्तु बल की दिशा में s दूरी तक विस्थापित होती है तो कार्य की परिभाषा के अनुसार किया गया कार्य बल तथा विस्थापन के गुणनफल के बराबर होगा; अर्थात् किया गया कार्य = बल x विस्थापन अर्थात् W = F⋅s
• यदि बल F तथा विस्थापन s के मध्य कोण बनता है, तो W = F ⋅ S ⋅ cos θ
• किसी वस्तु पर लगने वाले बल द्वारा किया गया कार्य बल के परिणाम तथा बल की दिशा में चली गई दूरी के गुणनफल के बराबर होता है।
• कार्य में केवल परिमाण होता है तथा कोई दिशा नहीं होती अर्थात् कार्य एक अदिश राशि है।
• कार्य का SI मात्रक जूल है।
ऊर्जा
• ऊर्जा के बिना जीवन असम्भव है। ऊर्जा की आवश्यकता दिन प्रतिदिन बढ़ रही है।
• सूर्य हमारे लिए ऊर्जा का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत है।
• कोई वस्तु जिसमें ऊर्जा है तो वह दूसरी वस्तु पर बल लगा सकती है। जब ऐसा होता है तो ऊर्जा पहली वस्तु से दूसरी वस्तु में स्थानान्तरित हो जाती है। दूसरी वस्तु क्योंकि कुछ ऊर्जा ग्रहण करती है इसलिए कुछ कार्य कर सकती है और इस प्रकार यह गति में आ सकती है। इस प्रकार पहली वस्तु में कार्य करने की क्षमता है। इसका तात्पर्य यह है कि कोई वस्तु जिसमें ऊर्जा है, कार्य कर सकती है।
• किसी वस्तु की कार्य करने की क्षमता को उस वस्तु की ऊर्जा कहते हैं।
• ऊर्जा एक अदिश राशि है। इसका SI मात्रक जूल है।
ऊर्जा के रूप
• सौभाग्य से जिस संसार में हम रहते हैं उसमें ऊर्जा अनेक रूपों में विद्यमान है। विभिन्न रूपों में स्थितिज ऊर्जा, गतिज ऊर्जा, ऊष्मीय ऊर्जा, रासायनिक ऊर्जा, विद्युत ऊर्जा तथा प्रकाश ऊर्जा सम्मिलित हैं।
• किसी वस्तु की स्थितिज और गतिज ऊर्जा के योग को वस्तु की यान्त्रिक ऊर्जा कहते हैं।
गतिज ऊर्जा
• गतिशील वस्तुओं में ऊर्जा होती है। पानी, बहती हुई हवा, दौड़ता हुआ खिलाड़ी आदि सभी में गतिज ऊर्जा विद्यमान है।
• किसी वस्तु में उसकी गति के कारण निहित ऊर्जा को गतिज ऊर्जा कहते हैं। किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा उसकी चाल के साथ बढ़ती है।
• यदि m द्रव्यमान की कोई वस्तु v गति से गतिशील हो, तो उसकी गतिज ऊर्जा = 1/2 mν² होती है।
स्थितिज ऊर्जा
• वस्तु पर किए गए कार्य के कारण इसमें ऊर्जा संचित हो जाती है।
• किसी वस्तु को स्थानान्तरित की गई ऊर्जा इसमें स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित रहती है यदि यह वस्तु की चाल या वेग में परिवर्तन करने के लिए उपयोग में नहीं आती है।
• किसी वस्तु द्वारा इसकी स्थिति अथवा विन्यास में परिवर्तन के कारण प्राप्त ऊर्जा को स्थितिज ऊज कहते हैं।
• यदि m द्रव्यमान की कोई वस्तु पृथ्वी से h ऊँचाई पर अवस्थित होती है। गुरुत्वीय त्वरण g हो, तो उस वस्तु की स्थितिज ऊर्जा = mgh
                                                          ऊर्जा संरक्षण का नियम
• ऊर्जा केवल एक रूप से दूसरे रूप में रूपान्तरित हो सकती है न तो इसकी उत्पत्ति की जा सकती है और न ही विनाश । रूपान्तरण के पहले व रूपान्तरण के पश्चात् कुल ऊर्जा सदैव अचर रहती है।
• ऊर्जा संरक्षण का नियम प्रत्येक स्थिति तथा सभी प्रकार के रूपान्तरणों में मान्य है।
• सभी बिन्दुओं पर वस्तु की स्थितिज ऊर्जा तथा गतिज ऊर्जा का योग सदा समान रहता है।
• किसी पिण्ड के मुक्त रूप से गिरते समय, इसके पथ में किसी बिन्दु पर स्थितिज ऊर्जा में जितनी कमी होती है गतिज ऊर्जा में उतनी ही वृद्धि हो जाती है। इस स्थिति में गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का गतिज ऊर्जा में निरन्तर रूपान्तरण होता है।
शक्ति
• कार्य करने की दर या ऊर्जा रूपान्तरण की दर को शक्ति कहते हैं। यदि कोई अभिकर्ता t समय में w कार्य करता है,तो शक्ति का मान होगा; शक्ति = कार्य/समय या P = w/t
• शक्ति का मात्रक वाट है तथा इसका प्रतीक w है।
• 1 वाट उस अभिकर्ता की शक्ति है जो 1 सेकण्ड में 1 जूल कार्य करता है।
• यदि ऊर्जा के उपयोग की दर 1 जूल/से -1 या जूल से हो, तो शक्ति 1W होगी।
• 1 वाट = 1 जूल / सेकण्ड या 1W = 1J s¯¹
• ऊर्जा स्थानान्तरण की उच्च दरों को किलोवाट (kW) में व्यक्त किया जाता है।
      1 किलोवाट = 1000 वाट या 1 kW = 10³ W
• किसी अभिकर्ता की शक्ति समय के साथ बदल सकती है। इसका अर्थ है कि अभिकर्ता विभिन्न समय अन्तरालों में विभिन्न दरों से कार्य कर सकता है। इसलिए औसत शक्ति की अवधारणा लाभप्रद है। औसत शक्ति कुल उपयोग की गई ऊर्जा को, कुल लिए गए समय से विभाजित कर प्राप्त किया जाता है।
ऊर्जा का व्यावसायिक मात्रक
• जूल ऊर्जा का बहुत छोटा मात्रक है अतः यह ऊर्जा की बड़ी राशियों को व्यक्त करने के लिए असुविधाजनक है। इसलिए ऊर्जा का एक बड़ा मात्रक उपयोग में लाया जाता है, जिसे किलोवाट घण्टा (kWh) कहते हैं।
• एक किलोवाट घण्टा (1 kWh) ऊर्जा की वह मात्रा है, जो 1kW के किसी स्रोत को एक घण्टे तक उपयोग करने में व्यय होगी।
• 1 किलोवाट = 1 किलोवाट x 1 घण्टा = 1000W x 3600s = 3600000 J या 1 किलोवाट घण्टा = 3.6 x 106 जूल
• घरों में उद्योगों में तथा व्यावसायिक संस्थानों में व्यय होने वाली ऊर्जा को प्रायः किलोवाट घण्टा में व्यक्त किया जाता है। उदाहरण के लिए, एक महीने में उपयोग की गई विद्युत ऊर्जा को ‘यूनिट’ के रूप में व्यक्त करते हैं। यहाँ 1 ‘यूनिट’ का अर्थ है 1 kWh ।
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