इंडो-चाइना में राष्ट्रवादी आंदोलन

इंडो-चाइना में राष्ट्रवादी आंदोलन

अध्याय का सार

1. चीन के साये से आज़ादी
इंडो-चाइना तीन देशों से मिल कर बना है। ये तीन देश हैं-वियतनाम, लाओस और कंबोडिया। इस पूरे इलाके के शुरुआती इतिहास को देखने पर पता चलता है कि पहले यहाँ बहुत सारे समाज रहते थे और पूरे इलाकेपर शक्तिशाली चीनी साम्राज्य का वर्चस्व था। जिसे आज उत्तरी और मध्य वियतनाम कहा जाता है जब वहाँ एक स्वतंत्र देश की स्थापना कर ली गई तो भी वहाँ के शासकों ने न केवल चीनी शासन व्यवस्था को बल्कि चीनी संस्कृति को भी अपनाए रखा। वियतनाम उस रास्ते से भी जुड़ा रहा है जिसे समुद्री सिल्क रूट कहा जाता था। इस रास्ते से वस्तुओं, लोगों और विचारों की खूब आवाजाही चलती थी। व्यापार के अन्य रास्तों के माध्यम से वियतनाम उन दूरवर्ती इलाकों से भी जुड़ा रहता था जहाँ गैर-वियतनामी समुदाय-जैसे खमेर और कंबोडियाई समुदाय – रहते थे। फ्रांसीसी सेना ने पहली बार 1858 में वियतनाम की धरती पर डेरा डाला। अस्सी के दशक केमध्य तक आते-आते उन्होंने देश के उत्तरी इलाके पर मज़बूती से कब्जा जमा लिया। फ़्रांस-चीन युद्ध के बाद उन्होंने टोंकिन और अनाम पर भी कब्जा कर लिया। 1887 में फ्रेंच इंडो-चाइना का गठन किया गया। बाद के दशकों में एक ओर फ़्रांसीसी शासक वियतनाम पर अपना क़ब्जा जमाते गए और दूसरी तरफ वियतनामियों को यह बात समझ में आने लगी कि फ्रांसीसियों के हाथों वे क्या-क्या गँवा चुके हैं। इसी सोच-विचार और जद्दोजहद से वियतनाम में राष्ट्रवादी प्रतिरोध विकसित हुआ।

2. औपनिवेशिक शिक्षा की दुविधा
फ्रांसीसी उपनिवेशवाद सिर्फ आर्थिक शोषण पर केंद्रित नहीं था। इसके पीछे ‘सभ्य’ बनाने का विचार भी काम कर रहा था। जिस तरह भारत में अंग्रेज़दावा करते थे उसी तरह फ्रांसीसियों का दावा था कि वे वियतनाम के लोगों को आधुनिक सभ्यता से परिचित करा रहे हैं। उनका विश्वास था कि यूरोप में सबसे विकसित सभ्यता कायम हो चुकी है। इसीलिए वे मानते थे कि उपनिवेशों में आधुनिक विचारों का प्रसार करना यूरोपियों का ही दायित्व है और इस दायित्व की पूर्ति करने के लिए अगर उन्हें स्थानीय संस्कृतियों, धर्मों व परंपराओं को भी नष्ट करना पड़े तो इसमें कोई बुराई नहीं है। वैसे भी, यूरोपीय शासक इन संस्कृतियों, धर्मों और परंपराओं को पुराना व बेकार मानते थे। उन्हें लगता था कि ये चीजें आधुनिक विकास को रोकती हैं।

‘देशी’ जनता को सभ्य बनाने के लिए शिक्षा को काफी अहम माना जाता था। लेकिन वियतनाम में शिक्षा का प्रसार करने से पहले फ़्रांसीसियों को एक और दुविधा हल करनी थी। दुविधा इस बात को लेकर थी कि वियतनामियों को किस हद तक या कितनी शिक्षा दी जाए? फ्रांसीसियों को शिक्षित कामगारों की ज़रूरत तो थी लेकिन गुलामों को पढ़ाने-लिखाने से समस्याएँ भी पैदा हो सकती थीं। शिक्षा प्राप्त करने के बाद वियतनाम के लोग औपनिवेशिक शासन पर सवाल भी उठा सकते थे। इतना ही नहीं, वियतनाम में रहने वाले फ्रांसीसी नागरिकों (जिन्हें कोलोन कहा जाता था) को तो यह भी भय था कि स्थानीय लोगों में शिक्षा के प्रसार से कहीं उनके काम-धंधे और नौकरियाँ भी हाथ से न जाती रहें। इन लोगों में कोई शिक्षक, कोई दुकानदार तो कोई पुलिसवाला था। इसीलिए ये लोग वियतनामियों को पूरी फ्रांसीसी शिक्षा देने का विरोध करते थे।

3. साफ़-सफ़ाई, बीमारी और रोज़मर्रा प्रतिरोध
उपनिवेशवाद के खिलाफ ऐसे राजनीतिक संघर्ष सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं चल रहे थे। बहुत सारे दूसरे संस्थानों में भी गुलाम जनता नाना प्रकार से अपने गुस्से को अभिव्यक्त कर रही थी। 1903 में हनोई के नवनिर्मित आधुनिक भाग में ब्यूबॉनिक प्लेग की महामारी फैल गई। बहुत सारे औपनिवेशिक देशों में इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए जो कदम उठाए गए उनके कारण भारी सामाजिक तनाव पैदा हुए। परंतु हनोई के हालात तो कुछ ख़ास ही थे।

हनोई के फ्रांसीसी आबादी वाले हिस्से को एक खूबसूरत और साफ़-सुथरे शहर के रूप में बनाया गया था। वहाँ चौड़ी सड़कें थीं और निकासी का बढ़िया इंतज़ाम था। ‘देशी’ बस्ती में ऐसी कोई आधुनिक सुविधाएँ नहीं थीं। पुराने शहर का सारा कचरा और गंदा पानी सीधे नदी में बहा दिया जाता था। भारी बरसात या बाढ़ के समय तो सारी गंदगी सड़कों पर ही तैरने लगती थी।

इस घुसपैठ को रोकने के लिए 1902 में चूहों को पकड़ने की मुहिम शुरू की गई। इस काम के लिए वियतनामियों को काम पर रखा गया और उन्हें हर चूहे के बदले ईनाम दिया जाने लगा। हज़ारों की संख्या में चूहे पकड़े जाने लगे। उदाहरण के लिए, 30 मई को 20,000 चूहे पकड़े गए। इसके बावजूद चूहे खत्म होने का नाम ही न लेते थे। वियतनामियों को चूहों के शिकार की इस मुहिम के ज़रिए सामूहिक सौदेबाजी का महत्त्व समझ में आने लगा था। जो लोग सीवरों की गंदगी में घुस कर काम करते थे उन्होंने पाया कि अगर वे एकजुट हो जाएँ तो बेहतर मेहनताने के लिए सौदेबाजी कर सकते हैं। उन्होंने इस स्थिति से फ़ायदा उठाने के एक से एक नायाब तरीके भी ढूँढ़ निकाले। मजदूरों को पैसा तब मिलता था जब वे यह साबित कर देते थे कि उन्होंने चूहे को पकड़ कर मार डाला है।

4. धर्म और उपनिवेशवाद-विरोध
इंडो-चाइना में राष्ट्र औपनिवेशिक वर्चस्व निजी और सार्वजनिक जीवन के तमाम पहलुओं पर नियंत्रण के रूप में सामने आता था। फ्रांसीसियों ने न केवल सैनिक ताकत के सहारे वियतनाम पर कब्जा कर लिया था बल्कि वे वहाँ के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को भी पूरी तरह बदल देना चाहते थे। हालाँकि धर्म ने औपनिवेशिक शासन को मजबूती प्रदान करने में अहम भूमिका अदा की लेकिन दूसरी ओर उसने प्रतिरोध के नए-नए रास्ते भी खोल दिए थे। आइए देखें कि किस प्रकार ऐसा हुआ।

वियतनामियों के धार्मिक विश्वास बौद्ध धर्म, कन्फ्यूशियसवाद और स्थानीय रीति-रिवाजों पर आधारित थे। फ्रांसीसी मिशनरी वियतनाम में ईसाई धर्म के बीज बोने का प्रयास कर रहे थे। उन्हें वियतनामियों के धार्मिक जीवन में इस तरह का घालमेल पसंद नहीं था। उन्हें लगता था कि पराभौतिक शक्तियों को पूजने की वियतनामियों की आदत को सुधारा जाना चाहिए।

अठारहवीं सदी से ही बहुत सारे धार्मिक आंदोलन पश्चिमी शक्तियों के प्रभाव और उपस्थिति के खिलाफ जागृति फैलाने का प्रयास कर रहे थे। 1868 का स्कॉलर्स रिवोल्ट (विद्वानों का विद्रोह) फ़्रांसीसी कब्जे और ईसाई धर्म के प्रसार के खिलाफ शुरुआती आंदोलनों में से था। इस आंदोलन की बागडोर शाही दरबार के अफ़सरों के हाथों में थी। ये अफ़सर कैथलिक धर्म और फ्रांसीसी सत्ता के प्रसार से नाराज़ थे। कैथलिक मिशनरी सत्रहवीं सदी की शुरुआत से ही स्थानीय लोगों को ईसाई धर्म से जोड़ने में लगे हुए थे और अठारहवीं सदी के अंत तक आते-आते उन्होंने लगभग 3,00,000 लोगों को ईसाई बना लिया था। फ़्रांसीसियों ने 1868 के आंदोलन को तो कुचल डाला लेकिन इस बगावत ने फ़्रांसीसियों के खिलाफ़ अन्य देशभक्तों में उत्साह का संचार जरूर कर दिया। “.

5. आधुनिकीकरण की संकल्पना
फ्रांसीसी उपनिवेशवाद का विभिन्न स्तरों पर और नाना रूपों में विरोध हो रहा था। लेकिन सभी राष्ट्रवादियों के सामने सवाल एक जैसे थे। मसलन, आधुनिक होने का क्या मतलब होता है? राष्ट्रवादी किसे कहते हैं? क्या आधुनिक बनने के लिए परंपराओं को पिछड़ेपन की निशानी मानना और सभी पुराने विचारों व सामाजिक आचारों को खारिज़ करना ज़रूरी है? क्या पश्चिम’ को ही विकास व सभ्यता का प्रतीक मानना और उसकी नकल करना ज़रूरी है?

ऐसे सवालों के जवाब कई तरह के थे। कुछ बुद्धिजीवियों का मानना था कि पश्चिम के प्रभुत्व का मुकाबला करने के लिए वियतनामी परंपराओं को मजबूत करना ज़रूरी है जबकि कई बुद्धिजीवियों का विचार था कि विदेशी वर्चस्व का विरोध करते हुए भी वियतनाम को पश्चिम से बहुत कुछ सीखना होगा। इन मतभेदों के कारण कई गंभीर बहसें खड़ी हुईं जिन्हें आसानी से हल नहीं किया जा सकता था।

उन्नीसवीं सदी के आखिर में फ्रांसीसियों के विरोध का नेतृत्व प्रायः कन्फ्यूशियन विद्वानों-कार्यकर्ताओं के हाथों में होता था जिन्हें अपनी दुनियाँ बिखरती दिखाई दे रही थी। कन्फ्यूशियन परंपरा में शिक्षित फान बोई चाऊ (1867-1940) ऐसे ही एक महत्त्वपूर्ण राष्ट्रवादी थे। 1903 में उन्होंने रेवोल्यूशनरी सोसायटी (दुई तान होई) नामक पार्टी का गठन किया और तभी से वह उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन के एक अहम नेता बन गए थे। राजकुमार कुआंग दे इस पार्टी के मुखिया थे।

फान बोई चाऊ ने 1905 में चीनी सुधारक लियाँग किचाओ (1873-1929) से योकोहामा में भेंट की। फान की सबसे प्रभावशाली पुस्तक, द हिस्ट्री ऑफ़ द लॉस ऑफ़ वियतनाम, लियाँग की सलाह और प्रभाव में ही लिखी गई थी। वियतनाम और चीन में यह किताब खूब बिकी और उस पर एक नाटक भी खेला गया। यह किताब एक-दूसरे से जुड़े दो विचारों पर केंद्रित हैं : एक, देश की संप्रभुता का नाश, और दूसरा, दोनों देशों के अभिजात्य वर्ग को एकसंस्कृति में बाँधने वाले वियतनाम-चीन संबंधों का टूटना। फान अपनी पुस्तक में इसी दोहरे नाश का विलाप करते हैं। उनके शोक का अंदाज़ वैसा ही था जैसा परंपरागत अभिजात्य तबके से निकले सुधारकों का दिखाई देता था।

बीसवीं सदी के पहले दशक में ‘पूरब की ओर चलो’ आंदोलन काफी तेज़ था। 1907-1908 में लगभग 300 वियतनामी विद्यार्थी आधुनिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए जापान गए थे। उनमें से बहुतों का सबसे बड़ा लक्ष्य यही था कि फ्रांसीसियों को वियतनाम से निकाल बाहर किया जाए, कठपुतली सम्राट को गद्दी से हटा दिया जाए और फ्रांसीसियों द्वारा अपमानित करके गद्दी से हटा दिए गए न्गूयेन राजवंश को दोबारा गद्दी पर बिठाया जाए। इन राष्ट्रवादियों को विदेशी हथियार और मदद लेने से कोई परहेज़ नहीं था। इसके लिए उन्होंने एशियाई होने के नाते जापानियों से मदद माँगी। जापान आधुनिकीकरण के रास्ते पर काफ़ी आगे बढ़ चुका था।

जापानियों ने पश्चिम द्वारा गुलाम बनाए जाने की कोशिशों का भी सफलतापूर्वक विरोध किया था। 1907 में रूस पर विजय प्राप्त करके जापान अपनी सैनिक ताक़त का भी लोहा मनवा चुका था। वियतनामी विद्यार्थियों ने टोकियो में भी रेस्टोरेशन सोसायटी की स्थापना कर ली थी लेकिन 1908 में जापानी गृह मंत्रालय ने ऐसी गतिविधियों का दमनशुरू कर दिया। फान बोई चाऊ सहित बहुत सारे लोगों को जापान से निकाला जाने लगा और उन्हें मजबूरन चीन व थाईलैंड में शरण लेनी पड़ी।

6. कम्युनिस्ट आंदोलन और वियतनामी राष्ट्रवाद
1930 के दशक में आई महामंदी ने वियतनाम पर भी गहरा असर डाला। रबड़ और चावल के दाम गिर गए और क़र्जा बढ़ने लगा। चारों तरफ़ बेरोजगारी और ग्रामीण विद्रोहों का बोलबाला था। न्ये अन और हा तिन्ह प्रांतों में भी ऐसे ही आंदोलन हुए। ये सबसे गरीब प्रांत थे जहाँ रैडिकल आंदोलनों की एक लंबी परंपरा चली आ रही थी जिसके कारण उन्हें वियतनाम की ‘लपलपाती चिंगारी’ कहा जाता था। जब भी बड़ा संकट आता था तो सबसे पहले वहीं असंतोष की ज्वाला भड़कती थी। फ्रांसीसियों ने इन बग़ावतों को सख्ती से कुचल डाला। यहाँ तक कि जुलूसों पर हवाई जहाजों से भी बमबारी की गई।

फरवरी 1930 में हो ची मिन्ह ने राष्ट्रवादियों के अलग-थलग समूहों और गुटों को एकजुट करके वियतनामी कम्युनिस्ट (वियतनाम काँग सान देंग) पार्टी की स्थापना की जिसे बाद में इंडो-चाइनीज़ कम्युनिस्ट पार्टी का नाम दिया गया। हो ची मिन्ह यूरोपीय कम्युनिस्ट पार्टियों के उग्र आंदोलनों से काफी प्रभावित थे।
1940 में जापान ने वियतनाम पर कब्जा कर लिया। जापान पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया पर कब्जा करना चाहता था। ऐसे में अब राष्ट्रवादियों को फ़्रांसीसियों के साथ-साथ जापानियों से भी लोहा लेना था। बाद में वियेतमिन्ह के नाम से जानी गई लीग फॉर द इंडिपेंडेस ऑफ़ वियतनाम (वियतनाम स्वतंत्रता लीग) ने जापानी कब्जे का मुँहतोड़ जवाब दिया और सितंबर 1945 में हनोई को आज़ाद करा लिया। इसके बाद वियतनाम लोकतांत्रिक गणराज्य की स्थापना की गई और हो ची मिन्ह को उसका अध्यक्ष चुना गया।

फ्रांसीसी सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर जनरल हेनरी नावारे ने 1953 में ऐलान किया था कि उनकी सेना जल्दी ही विजयी होगी। लेकिन 7 मई 1954 को वियेतमिन्ह ने फ्रांसीसी एक्सपीडिशनिरी कोर के बहुत सारे सैनिकों को मार गिराया और 16,000 से ज़्यादा को कैद कर लिया। एक जनरल, 16 कर्नलों और 1,749 अफ़सरों सहित पूरे कमांडिंग दस्ते को पकड़ लिया गया।

अमेरिका के भी युद्ध में कूद पड़ने से वियतनाम में एक नया दौर शुरू हुआ जो वियतनामियों के साथ-साथ अमेरिकीयों के लिए भी बहुत मँहगा साबित हुआ। 1965 से 1972 के बीच अमेरिका के 34, 03, 100 सैनिकों ने वियतनाम में काम किया जिनमें से 7, 484 महिलाएँ थीं।

हालाँकि अमेरिका के पास एक से बढ़कर एक आधुनिक साधन और बेहतरीन चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध थीं फिर भी उसके बहुत सारे सैनिक मारे गए। लगभग 47, 244 सैनिक मारे गए और 3, 03, 704 घायल हुए।

अमेरिका के साथ संघर्ष का यह दौर काफी यातनापूर्ण और निर्मम रहा। इस युद्ध में बड़े-बड़े हथियारों और टैंकों से लैस हज़ारों अमेरिकी सैनिक वियतनाम में झोंक दिए गए थे। उनके पास बी-52 बमवर्षक विमान भी मौजूद थे जिन्हें उस समय दुनिया का सबसे खतरनाक युद्धक विमान माना जाता था।

7. राष्ट्र और उसके नायक
सामाजिक आंदोलनों को देखने का एक पैमाना यह होता है कि उससे समाज के विभिन्न तबकों पर क्या असर पड़ता है। आइए देखें कि वियतनाम के साम्राज्यवाद विरोधी आंदोलन में औरतों की क्या भूमिका रही और इससे राष्ट्रवादी विचारधारा के बारे में हमें क्या पता चलता है।

पारंपरिक रूप से चीन के मुकाबले वियतनाम में औरतों को ज़्यादा बराबरी वाला दर्जा मिलता था, खासतौर से निचले तबके में। फिर भी औरतों की स्थिति पुरुषों के मुकाबले कमज़ोर तो थी ही। वे अपने भविष्य के बारे में अहम फैसले नहीं ले सकती थीं। न ही सार्वजनिक जीवन में उनका कोई ख़ास दखल होता था।

जैसे-जैसे वियतनाम में राष्ट्रवादी आंदोलन ज़ोर पकड़ने लगा समाज में महिलाओं की हैसियत व स्थिति पर भी सवाल उठने लगे और स्त्रीत्व की एक नयी छवि सामने आने लगी। साहित्यकार और राजनीतिक विचारक विद्रोहों में हिस्सा लेने
वाली महिलाओं को आदर्श के रूप में पेश करने लगे। 1930 .. में न्हात लिन्ह द्वारा लिखे गए एक प्रसिद्ध उपन्यास से वियतनाम में काफी विवाद पैदा हो गया।

पुराने जमाने की विद्रोही औरतों का भी महिमामंडन किया जाने लगा। 1913 में राष्ट्रवादी नेता फान बोई चाऊ ने 39-43 ईस्वी में चीनी क़ब्जे के विरुद्ध युद्ध छेड़ने वाली ट्रंग बहनों के जीवन पर एक नाटक लिखा। इस नाटक में उन्होंने दिखाया कि इन बहनों ने वियतनामी राष्ट्र को चीनियों से मुक्त कराने के लिए देशभक्ति के भाव से कैसे-कैसे कारनामे किए थे। उनकी बगावत की असली वजह क्या थी इस बारे में बहुत सारे विचारकों की राय भिन्न रही है लेकिन फान के नाटक के बाद उनको आदर्श के रूप में पेश किया जाने लगा और उनका गुणगान किया जाने लगा।

1960 के दशक के पत्र-पत्रिकाओं में दुश्मन से लोहा लेती यौद्धा औरतों की तसवीरें बड़ी संख्या में छपने लगीं। इन तसवीरों में स्थानीय प्रहरी दस्ते की औरतों को हवाई जहाजों को मार गिराते हुए दर्शाया जाता था। उनको युवा, बहादुर और समर्पित योद्धाओं के रूप में चित्रित किया जाता था। इस बारे में कहानियाँ छपने लगी कि सेना में शामिल होने और राइफल उठाने का मौका मिलने से वे कितना खुश महसूस करती हैं।

8. युद्ध की समाप्ति
युद्ध के लंबा खिंचते जाने से अमेरिका में भी लोग सरकार के खिलाफ बोलने लगे थे। यह साफ दिखाई दे रहा था कि अमेरिका अपने लक्ष्य को हासिल करने में विफल रहा है। अमेरिका न तो वियतनामियों के प्रतिरोध को कुचल पाया था और न ही अमेरिकी कार्रवाई के लिए वियतनामी जनता का समर्थन प्राप्त कर पाया। इस दौरान हज़ारों नौजवान अमेरिकी सिपाही अपनी जान गंवा चुके थे और असंख्य वियतनामी नागरिक मारे जा चुके थे। इस युद्ध को पहला टेलिविज़न युद्ध कहा जाता है। युद्ध के दृश्य हर रोज़ समाचार कार्याक्रमों में टेलीविज़न के पर्दे पर प्रसारित किए जाते थे। अमेरिकी कुकृत्यों को देखकर बहुत सारे लोगों का अमेरिका से मोहभंग हो चुका था।

आखिरकार 30 अप्रैल 1975 को एनएलएफ ने राष्ट्रपति के महल पर कब्जा कर लिया और वियतनाम के दोनों हिस्सों को मिला कर एक राष्ट्र की स्थापना कर दी गई।

इंडो-चाइना में राष्ट्रवादी आंदोलन Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
इण्डो-चाइना किन तीन देशों से मिलकर बना है?
उत्तर-
इण्डो-चाइना के तीन देश हैं-वियतनाम, लाओस तथा कम्बोडिया।

प्रश्न 2.
सिल्क रूट क्या है?
उत्तर-
समद्री रास्ता जिससे सामान आता-जाता था तथा लोगों की आवाजाही थी उसे सिल्क रूट कहा जाता है।

प्रश्न 3.
पहली बार वियतनाम में फ्रांसीसी सेना ने कब कदम रखा?
उत्तर-
1858 में वियतनाम में फ्रांसीसी सेना ने कदम रखा।

प्रश्न 4.
गार्निए कोन था?
उत्तर-
मेकोंग नदी की खोज करने वाले फ्रांसीसी दल का सदस्य था। उसे फ्रांसीसी उपनिवेश स्थापित करने के लिए चुना गया था।

प्रश्न 5.
1887 में किसका गठन किया गया? उत्तर-फ्रेंच इण्डो-चाइना का गठन 1887 में हुआ। प्रश्न 6. संरचनागत परियोजना क्या है?
उत्तर-
वे परियोजनाएँ जिनमें अर्थव्यवस्था के ढाँचे का निर्माण किया जाता है, जैसे-रेल-नेटवर्क, बिजलीघर आदि। उसे संरचनागत परियोजना कहा गया।

प्रश्न 7.
1931 तक कौन-सा देश चावल का निर्यातक बन गया?
उत्तर-
वियतनाम।
प्रश्न 8.
संरचनागत परियोजनाओं को बनाने का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर-
व्यापारिक वस्तुओं के आवागमन और फौजी टुकड़ियों के आने-जाने के लिए इन परियोजनाओं का निर्माण किया
गया।

प्रश्न 9.
एकतरफा अनुबंध व्यवस्था क्या थी?
उत्तर-
बागान के मज़दूर बिना किसी अधिकार के काम करते थे, उसे एकतरफा अनुबंध कहा जाता था। इन अनुबंधों की शर्ते पूर्ण न होने पर मालिक मज़दूरों के विरुद्ध मुकदमा करते तथा उन्हें सजा देते थे।

प्रश्न 10.
वियतनामियों को पश्चिमी शिक्षा देने में क्या दुविधा थी?
उत्तर-
वियतनामियों को यदि पूर्ण पश्चिमी शिक्षा दी जाती तो फ्रांसीसियों के हाथ से काम-धंधे एवं नौकरियाँ हाथ से चली जाती।

प्रश्न 11.
टोंकिन फ्री स्कूल कब खोला गया?
उत्तर-
टोंकिन फ्री स्कूल 1907 में खोला गया।

प्रश्न 12.
साइगॉन नेटिव गर्ल्स स्कूल में आंदोलन कब आरम्भ किया गया?
उत्तर-
सन् 1926 में साइगॉन नेटिव गर्ल्स स्कूल में आंदोलन आरम्भ किया गया।

प्रश्न 13.
1930 में हो ची मिन्ह ने किसकी स्थापना की?
उत्तर-
1930 में वियतनामी कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना हो ची मिन्ह ने की।

प्रश्न 14.
1903 में हनोई के किस भाग में कौन-सी बीमारी फैली?
उत्तर-
1903 हनोई के नवनिर्मित आधुनिक भाग में ब्यूबॉनिक प्लेग की महामारी फैल गई।

प्रश्न 15.
कनफ्यूशियस कौन थे?
उत्तर-
कन्फ्यूशियस एक चीनी विचारक थे जिन्होंने एक दार्शनिक व्यवस्था का विकास किया। उन्होंने बड़े-बुजुर्गों का आदर करना तथा उनका कहना मानना सिखाया उन्होंने यह बताया कि राजा और प्रजा के मध्य संबंध कैसा होना चाहिए।

प्रश्न 16.
वियतनामियों का किस धर्म में विश्वास था?
उत्तर-
वियतनामी बौद्ध धर्म, कन्फ्यूशिपसवाद का अनुसरण करते थे।

प्रश्न 17.
फ्रांसीसी मिशनरी किस धर्म का प्रचार कर रहे थे?
उत्तर-
ईसाई धर्म।

प्रश्न 18.
समन्वयवाद किसे कहते हैं?
उत्तर-
जब भिन्नताओं के स्थान पर अलग-अलग विचारों तथा मान्यताओं को एक-साथ लाने का प्रयास किया जाता है, उसे समन्वयवाद कहा जाता है।

प्रश्न 19.
यातना शिविर क्या था?
उत्तर-
यातना शिविर वह जेल थी जहाँ कैदियों को कानून का अनुसरण किए बिना ही डाल दिया जाता था तथा उन पर निर्मम अत्याचार किया जाता था।

प्रश्न 20.
हुइन्ह फू सो कौन थे?
उत्तर-
हुइन्ह फू सो 1939 में आरम्भ हुए आंदोलन होआ हाओ के संस्थापक थे।

प्रश्न 21.
फान बोई चाऊ द्वारा लिखित एक पुस्तक का नाम बताएँ।
उत्तर-
द हिस्ट्री ऑफ द लॉस ऑफ वियतनाम।

प्रश्न 22.
गणतन्त्र किसे कहते हैं?
उत्तर-
वह सरकार जो लोगों की सत्ता पर आधारित होती है, उसे गणतन्त्र कहा जाता है।

प्रश्न 23.
20वीं सदी के पहले दशक के एक आंदोलन का नाम बताएँ।
उत्तर-
‘पूरब की ओर चलो’।

प्रश्न 24.
हो ची मिन्ह कौन थे?
उत्तर-
हो ची मिन्ह कम्युनिस्ट राष्ट्रवादी थे जिन्होंने फरवरी,. __1930 में वियतनामी कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की।

प्रश्न 25.
दो साम कौन थे?
उत्तर-
दो साम वियतनामी तोपखाना रेजीमेन्ट में कर्नल थे। 1968 आरम्भ किए गए युद्ध जो उत्तरी तथा दक्षिणी वियतनाम के एकीकरण के लिए था, का वे भाग थे।

प्रश्न 26.
ट्रंग बहनों का राष्ट्रवादी आंदोलन में क्या योगदान था?
उत्तर-
ट्रंग बहनें विद्रोही महिलाओं के लिए एक आदर्श थीं। उन्होंने 30,000 सैनिकों की टुकड़ी को जमा किया तथा चीनियों का दो वर्श तक मुकाबला किया। जब उन्हें हारने का उर हुआ तो उन्होंने आत्मसमर्पण के स्थान पर आत्महत्या कर ली।

प्रश्न 27.
त्रियू अयू कौन थी?
उत्तर-
त्रियू अयू अत्यन्त महत्त्वपूर्ण तथा सम्मानित थीं। जंगल में जाकर उन्होंने विशाल सेना का गठन किया तथा चीनियों के विरुद्ध खड़ी हो गई। जब वे हार गईं तो उन्होंने खुदकुशी कर ली।

प्रश्न 28.
1960 में महिलाओं का चित्रण किस प्रकार किया गया?
उत्तर-
1960 में महिलाओं का चित्रण योद्धा औरतों के रूप में किया जाता था। औरतों को हवाई जहाजों को मार गिराते दिखाया जाता था। उनको बहादुर और युवा दर्शाया जाने लगा। उन्हें एक हाथ में हथौड़ा तथा दूसरे हाथ में राइफल लिए दिखाया गया।

प्रश्न 29.
वियतनाम को पुनः एकीकृत किस प्रकार किया गया?
उत्तर-
वियतनाम को एकीकृत जनवरी, 1947 में पेरिस में शांति समझौते के बाद किया गया। 30 अप्रैल, 1975 को एन. एल.एफ. ने राष्ट्रपति के महल पर कब्जा कर लिया। इस शांति समझौते के पश्चात् अमरिका के साथ टकराव में समाप्ति हुई तथा अंत में दोनों हिस्सों को मिलाकर एक राष्ट्र की स्थापना की गई।

प्रश्न 30.
इस अध्याय में आपने जो पढ़ा है, उसके हवाले से वियतनाम की संस्कृति और जीवन पर चीन के प्रभावों की चर्चा करें।
उत्तर-
वियतनाम की संस्कृति और जीवन पर चीन का प्रभाव-चीन के निकट होने और का एक बड़ा पड़ोसी देश होने के कारण वियतनाम पर चीन का गहरा प्रभाव होना स्वाभिक ही है जैसे श्रीलंका के भारत के निकट होने का उस पर गहरा प्रभाव देखने को मिलता है।

इन दोनों देशों में बौद्ध धर्म और कन्ल्युशियस धर्म प्रमुख रहे। जिन्होंने इन दोनों देशों के आपसी सम्बन्धों को और भी मजबूत बना दिया। चीन से बहुत से धार्मिक नेता और साधु-संत वियतनाम आते रहे और वियतनाम के लोगों को अपने धर्म के रंग में रंगते रहे। इस प्रकार धर्म के क्षेत्र में वियतनाम चीन का बड़ा द्धणी है।

साम्राज्वादी शक्तियों ने इन दोनों पर कड़ा नियन्त्रण रखने के लिए जब रेल, सड़क आदि के मामयम से इन दोनों देशों __ को एक प्रशासनिक नियन्त्रण तले लाने कस प्रयत्न किया तो ये दोनों देश और निकट आते चले गये। बाद में विदेशी साम्राज्य का मुकाबला करने के कारण दोनों को जब एक जैसी परिस्थियों में से होकर गुजरना पड़ा तो उनकी घनिष्ठता और बढ़ती चली गई। इस प्रकान चीन ने धीरे-धीरे वियतनाम की संस्कृति को अपने रंग में रंग लिया।

प्रश्न 31.
वियतनाम में उपनिवेशवात-विरोधी भावनाओं के विकास में धार्मिक संगठनों की भूमिका क्या थी?
उत्तर-
धर्म का लोगों के सामाजिक और सास्कृतिक जीवन पर बड़ा गहरा प्रभाव पड़ता है। वियतनाम पर अपना अधिकार बनाए रखने के उपेश्य से फ्रांसीसियों ने वहाँ के ध म में अन्धाधुन्ध दखल देना कर दिया जिसके कारण फ्रांस के विरुद्ध वहाँ अनेक साम्राज्य-विरोधी आन्दोलन छिड़ गए।

वियतनामियों के धर्म में बौद्ध धर्म, कन्फुशियनवाद और स्थानीय परम्पराओं का अजीब-सा मेल था। परन्तु जब फ्रांसिसियों ने वहाँ के लोगों पर ईसाई धर्म इंडो-चाइना में राष्ट्रवादी आंदोलन जबर्दस्ती ठोसन का प्रयत्न किया तो वहाँ उनके विरुद्ध एक तीव्र क्रिया उत्पन्न हो गई। परिणामस्वरुप उनके विरुण 1868 ई. में एक भंयकर विद्रोह उठ खड़ा हुआ जो ‘विद्धानों के विद्रोह’ (Scholars Revolt) के नाम से जाना जाता है। इस विद्रोह का वेग सबसे अधिक नगु अन (NguAn), हा तिएन (Ha Tien) प्रान्तों में था जहाँ लोगों ने लगभग एक हजार कैथोलिक पादरियों को मार डाला। चाहे इस विद्रोह को सख्ती से दबा दिया गया परन्तु अन्य स्थानों पर और नए विद्रोह उठ खड़े हुए।

ऐसा एक अन्य आन्दोलन 1939 ई. में हरे-भरे मेकोंग डेल्टा में शुरु हुआ। यह आन्दोलन हुआ हाव (Hoa Hao) अके नाम से जाना जाता है जिसमें हुइन्ह फू सो (Huynh Phu so) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। चाहे फ्रांसिसी सरकार ने इस व्यक्ति को पागल घोषित करके जेल में डाल दिया और उसके अनुयायियों पर यातना शिविरों (Concentration Camps) में अनेक अत्याचार किये परन्तु वे वियतनाम के वेग को रोग न सके। .

प्रश्न 32.
वियतनाम युद्ध में अमेरिकी हिस्सेदारी के कारणों की व्याख्या करें। अमेरिका के इस तथ्य से अमेरिका में जवीन पर क्या असर पड़े?
उत्तर-
वियतनाम युद्ध में अमेरिकी हिस्सेदारी के कारण (Cause of the Involvement in the war of Vietnam).

(1) अमेरिका को डर था कि यदि वियतनाम को खाली छोड़ दिया तो वहाँ साम्यवाद छा जायेगा जो अमेरिका को किसी हालत में मंजूर नहीं था।
(2) अमेरिका का वियतनाम में दखल देने का दूसरा बड़ा कारण यह था कि वह भी सहन नहीं कर सकता था कि वियतनाम एक महान् यूरोपिय देश फ्रांस को मात दे दे इसलिये वियतनाम को हराकर वह यह दिखाना चाहता था कि पूंजिपति देश एक हैं।
(3) जेनेवा कांफ्रेंस ने वियतनाम को दो भागों-उनरी वियतनाम और दक्षिणी वियतनाम और में बाँटा था। जब जेनेवा कांफ्रेंस के निर्णय के विरुद्ध वियतनाम के दोनों भागों ने आपस में मिलने का प्रयत्न किया तो अमेरिका इस बात को सहन न कर सका।

फिर क्या था उसने 1965 ई. में एक विशाल सेना के साथ जो संघर्ष शुरु हुआ वह कोई अगले सात-आठ वर्ष __ (1965-1972) तक चलता रहा।

वियतनाम के युद्ध का अमेरिका के जन-जीवन पर प्रभाव-वितनाम के इस युद्ध का वियतनाम पर ही नहीं वरन् __ अमेरिका के जन-जीवन पर भी बड़ा गहरा प्रभाव पड़ा।

(क) चाहे बम्ब बरसाने से उत्तरी वियतनाम को लगभग बर्बाद कर दिया परन्तु उसे स्वयं भी बड़ी हानि उठानी पड़ी। इस युद्ध में उसके जान-माल का भी बहुत नुकसान हुआ।
(ख) इस युद्ध में उसके 47,244 सैनिक मारे गये और 303,704 के लगभग सैनिक घायल हुए जिससे अमेरिका में मातम छा गया और इस युद्ध में अमेरिका द्वारा मुल्त का भी हस्तक्षेप करने का विरोध होने लगा।
(ग) अमेरिका में इस युद्ध के सम्बन्ध में बहुत विरोध पैदा हुआ। बहुत से लेखकों और विद्धानों के अनुसार इस युद्ध में अमेरिका को दखल देने की क्या आवश्यकता थी जिसमें उसके जान और माल की बहुत हानि हुई और बदले में बदनामी के इलावा उसे कुछ न मिला।

प्रश्न 33.
अमेरिका के खिलाफ वियतनामी युद्ध का निम्नलिखित के दृष्टिकोण से मूल्यांकन कीजिए
(क) हो ची मिन्ह भूलभुलैया मार्ग पर माल ढोने वाला कुली।
उत्तर-
(क) हो ची मिन्ह मार्ग पर माल ढोने वाले कुली के दृष्टिकोण से वियतनामी युद्ध का मूल्यांकन-यूनएसनएन और वियतनाम में होने वाले युद्ध (1965-1972) में कुलियों ने बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। उन्होंने अनेक खतरों के . होते हुए भी अपनी पीठ पर 22 किलो माल कर या साईकिल पर 70 किलो माल लादकर उनरी वियतनाम से दक्षिणी वियतनाम पहुँचाया। यह उन्हीं की सेवाओं का फल था कि वियतनामी सेनाएँ भूख-प्यास से बच गई और असले के निरन्तर पहुँचते रहने से उनका हौसला कायम रहा और वे यूनएसनएन जैसे महान् शक्ति का सफलतापूर्वक मुकाबला कर सकी।

(ख) एक महिला सिपाही।
उत्तर-
एक महिला सिपाही और यूनएसन-वियतनामी युद्ध-वियतनामी महिला-सिपाही भी यूनएसनएन होने वाले युद्ध में अथाह विश्वास और देश-प्रेम दिखाने में अद्वितीय रहीं। उन्होंने देश के लिये किसी भी प्रकार का सेवा-कार्य करने से इंकार नहीं किया। उन्होंने वक्त पड़ने पर कुलियों का भी काम किया और विदेशी साम्राज्यवादियों का मुकाबला करने और उनसे लड़ने में भी पीछे न रहीं। उन्होने छः हवाई-अपवों का भी निर्माण किया, अगणित बम्बों को निष्क्रीय बना दिया और शत्रु के 15 के लगभग हवाई जहाजों को नीचे मार गिराया। ऐसा अनुमान है कि युद्ध सम्बन्धी अनेक कार्यों में कोई 1.5 मिलियन महिलायें सिपाही के स्थानीय कार्यकर्ताओं और निपुण-सेवकों के रूप में कार्य कर रही थी। ऐसे सेवाभाव और देश-प्रेम के उदाहरण कम ही देखने को मिलते हैं।

प्रश्न 34.
वियतनाम में साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष में महिलाओं की क्या भूमिका थी?
उत्तर-
वियतनाम में साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष में महिलाओं की भूमिका-जैसा कि ऊपर के प्रश्न में बताया जा चुका है कि वियतनाम में साम्राज्यावाद के विरोधी संघर्ष में महिलाओं ने बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कंधे से कंधा मिलाकर पुरुषों का साथ दिया। जिस किसी परिस्थिति में उन्हें डाल दिया गया वे पीछे न रही। उन्होंने माल ढोने वाले कुलियों के रूप में कार्य किया और यदि उन्हें सिपाही के रूप में कार्य करने को कहा गया तो वे पीछे न रही। एक अनुमान के अनुसार कोई 1.5 मिलियन महिलायें देश को विदेशी साम्राज्य वादियों से लड़ने के विभिन्न कार्यों में कार्यरत थी। कुछ ने तो केवल हवाई अपवों का निर्माण ही किया वरन् शत्रु के कई हवाई जहाज़ भी नीचे मार गिराए। उन्होंने महान् धैर्य और अथाह देश प्रेम का जो परिचय दिया वह कम ही देखने को मिलता है।

प्रश्न 35.
उपनिवेशों के विकास क्यों आवश्यक थे? इस विषय में बर्नार्ड के विचार बताइए।
उत्तर-
अलग-अलग लोगों ने इस विषय पर अलग-अलग तर्क दिए कि क्या उपनिवेशों का विकास आवश्यक है। फ्रांसीसियों ने उपनिवेशों का निर्माण वियतनाम में व्यापार तथा सैनिकों के आने-जाने के लिए किया। बर्नार्ड के अनुसार उपनिवेशों का विकास आवश्यक था। उपनिवेश बनाने का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाने के लिए किया जाता था। वे यह मानते थे कि इसके कारण गुलाम देश की अर्थव्यवस्था का विकास होता है तथा जीवन, स्तर बेहतर होता है, क्योंकि वे अधिक सामान खरीद पाने में सक्षम हो पाते हैं। .

प्रश्न 36.
वियतनाम की औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर-
जब फ्रांस ने वियतनाम पर कब्जा करना आरम्भ किया, उस समय वियतनाम चावल और रबड़ की खेती पर आश्रित था। इन जगहों पर फ्रांस तथा वियतनाम के धनी व्यक्तियों का स्वामित्व था। वियतनामी श्रमिकों को एकतरफा अनुबंध के तहत काम करना पड़ता था। इन अनुबंधों में मालिकों के पास अधिकार होते थे परन्तु मजदूरों के पास कोई अधिकार नहीं थे। अनुबंध तोड़ने पर उन्हें सजा भुगतनी पड़ती थी। ग्रामीण क्षेत्रों में जमींदारों का कब्जा था। इस कारण वहाँ का जीवन स्तर गिर रहा था।

प्रश्न 37.
फ्रांसीसियों के सामने पाश्चात्य शिक्षा लागू करने में समस्याएँ थीं। ये समस्याएँ कौन-सी थीं? .
उत्तर-
फ्रांसीसियों का मानना था कि वे वियतनाम में आधुनिकता ला रहे थे। इसके लिए उनका जोर पाश्चात्य शिक्षा देने पर था। वे इसके लिए पुराने धर्मों, संस्कृतियों आदि को भी नष्ट करना चाहते थे। परन्तु उनके समक्ष निम्न समस्याएँ थीं-

(क) लोग अपनी पुरानी परम्पराओं, धर्मों आदि को छोड़ना नहीं चाहते थे, जबकि ये चीजें फ्रांसीसियों के लिए रुकावट थी।
(ख) दूसरी समस्या थी कि वियतनाम में किसको कितनी शिक्षा दी जाए। फ्रांसीसी शिक्षित कामगर चाहते थे, परन्तु यदि गुलामों को शिक्षा प्रदान की जाती तो समस्याएँ उत्पन्न हो जातीं। .
(ग) यदि वियतनाम नागरिकों ने शिक्षा प्राप्त की तो यह नौकरियों आदि के लिए खतरा हो सकता था।
(घ) अन्य समस्या भाषा से संबंधित थी कि स्कूलों में वियतनामी भाषा पढ़ाई जाए अथवा फ्रांसीसी।।

प्रश्न 38.
आधुनिक बनने के तरीके में चीन और • जापान ने वियतनाम में क्या भूमिका अदा की?
उत्तर-
वियतनामी राष्ट्रवादियों के सदैव चीन और जापान के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध रहे। ये दोनों राष्ट्र परिवर्तन के प्रतीक थे। जो वियतनामी फ्रांसीसी पुलिस से बचना चाहते थे, ये राष्ट्र उन्हें शरण देते। ये देश क्रांतिकारियों के नेटवर्क थे। लगभग 300 वियतनामी छात्र 1907-08 तक आधुनिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए जापान गए, वे फ्रांसीसियों को बाहर निकालना चाहते थे। इन छात्रों ने विदेशी हथियारों की सहायता ली। जापान अब तक अत्यधिक आधुनिक हो चुका था। इन विद्यार्थियों ने जपान से सहायता माँगी।

इस प्रकार चीन के घनाक्रमों से भी वियतनाम अत्यन्त प्रभावित हुआ। वियतनामी छात्रों ने वियतनाम मुक्ति एसोसिएशन का निर्माण किया। वे लोकतान्त्रिक गणराज्य की स्थापना चाहते थे।

प्रश्न 39.
हो ची मिन्ह पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
हो ची मिन्ह का जन्म 1890 में हुआ। उन्होंने अपना जीवन वियतनाम को स्वतन्त्र करने में बिताया। उनका वास्तविक नाम गूयेन वान थान्ह था। उन्होने फ्रांसीसी स्कूलों में शिक्षा प्राप्त की। वे कॉमिन्टन के सदस्य बन लेनिन से मिले।1941 में वे तीस साल यूरोप, थाइलैण्ड तथा चीन में बिताने के बाद लौटे। वियतनाम के गणराज्य के वे प्रथम राष्ट्रपति बने। उनकी मृत्यु 1969 में हुई।

प्रश्न 40.
निम्नलिखित पर टिप्पणियाँ लिखें-
(क) नापाम
(ख) एजेन्ट ऑरेंज।
उत्तर-
(क) नापान-नापाम अग्नि बमों के लिए गैसोलिन फुलाने वाला एक ऑर्गेनिक कम्पाउड है। यह सम्मिश्रण धीरे-धीरे जलता है। मानव त्वचा पर चिपकने पर भी यह जलता रहता है तथा उसे नष्ट कर देता है। वियतनाम के युद्ध तथा द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिका ने इसका प्रयोग किया।
(ख) एजेन्ट ऑरेंज-यह एक प्रकार का जहर है जिसे पेड़-पौधों पर छिड़का जाता है जिससे पेड़-पौधे नष्ट हो जाते हैं। जिन ड्रमों में इन्हें रखा जाता है, उस पर ऑरेन्ज पट्टियाँ बनी होती है, इसलिए इसे एजेन्ट ऑरेंज कहा गया। लगभग 1.1 करोड़ गैलेन का छिड़काव अमरीकी विमानों ने 1961-1971 के मध्य वियतनाम पर किया जिससे उनके जंगल तथा खेत समाप्त हो जाएँ। इससे वियतनामी सैनिक कहीं नहीं छिप सकते थे तथा उन्हे समाप्त किया जा सकता था।

इंडो-चाइना में राष्ट्रवादी आंदोलन Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें
(क) उपनिवेशकारों के ‘सभ्यता मिशन’ का क्या मतलब था।
(ख) हुइन फू सो।
उत्तर-फ्रांसीसी नीति निर्माता वियतनाम के लोगों को दो उपेश्यों से शिक्षित करना चाहते थे।
(1) वे रास्ते क्लर्क चाहते थे जो उन्हें समझ सकें और प्रशासन व्यवस्था में उनकी सहायता करें।
(2) उनका दूसरा उपेश्य शिक्षा द्वारा वहा! के लोगों को सभ्य बनाना था जो उनके विचार में सभ्य नहीं थे। वे यह सोचने लगे थे कि उन्होंने अन्य देशों को अपने लाभ के लिए विजय नहीं किया। वरन् अपने अधीन लोगों का सुधार करने के लिये किया है। इसी उपेश्य को उन्होंने ‘सभ्यता मिशन’ (Civilizing Mission) का नाम दिया। वास्तव में यह साम्राज्यवादी देशों की अपने स्वार्थों और आर्थिक शोषण को ढांपने की एक सोची-समझी योजना थी। ऐसा कहकर वे आसानी से शोषण की चक्की को भी चला सकते थे और ईसाई पादरियों को भी खुश कर सकते थे। जिनमें अन्य धर्म वालों को ईसाई बनाने की बड़ी लालसा थी।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित की व्याख्या करें
(क) वियतनाम के केवल एक तिहाई विद्यार्थी की स्कूली पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी कर पाते थे।
उत्तर-
वियतनाम के लोगों को शिक्षा देने के बारे में फ्रांसीसी अधिकारी असमंजस में थे। उनमें से कुछ फ्रांसीसी भाषा को लागू करना चाहते थे ताकि वियतनाम के लोग उनकी सभ्यता और संस्कृति के प्रशंसक बन जायें और उन्हें सस्ते क्लर्क भी मिल सकें। कुछ अन्य फ्रांसीसी लोग इस शिक्षा के विरुद्ध थे। उनका कहना था कि यदि वियतनाम के लोग पढ़-लिख जायेंगे तो वे राजनीतिक चेतना के उत्पन्न हो जाने के कारण स्वतन्त्रता की माँग करने लगेंगे। बहुत से फ्रांसीसी लोग जो वियतनाम में बस गए थे, वे भी वियतनाम के लोगों को फ्रांसीसी भाषा में शिक्षा दिये जाने के विरुद्ध थे क्योंकि उन्हें डर था कि ऐसे में अमयापकों, क्लर्को और सिपाहियों के रुप उनकी नौकरियाँ जाती रहेंगी।

ऐसे में यही सोचा गया कि वियतनामी विद्यार्थियों को शिक्षा तो दी जाए परन्तु उनमें से दो-तिहाई विद्यार्थियों को फेल कर दिया जाए ताकि न वे पास हो सकें और न ही वे नौकरियाँ माँग सकें।

(ख) फ्रांसीसियों ने मेकाँग डेल्टा क्षेत्र में नहरें बनवाना – और जमीन को सुखना आरम्भ किया।
उत्तर-
फ्रांसिसियों ने मेकाँग डेल्टा में नहरें बनवाई और दलदली जमीनों का सुखाना शुरु किया। इसके पीछे उनका मुख्य उदेश्य यह था कि नहरी पानी के इलाके में चावल उगाया जा सके और उसे विश्व के बाजारों में बेचकर जल्दी धनाढ्य बना जा सके। वास्तव में फ्रांसिसी कम्पनी एक व्यापारिक कम्पनी थी इसलिये उसका मुख्य उदेश्य वियतनाम के साधनों का प्रयोग करके अपने आर्थिक साधनों का अधिक से अधिक विस्तार करना था।

(ग) सरकार ने आदेश दिया कि साइगॉन नेटिव गर्ल्स स्कूल उस लड़की को वापस कक्षा में ले, जिसे स्कूल से निकाल दिया गया था।
उत्तर-
एक घटना जो साइगॉण नेटिव गर्ल्स स्कूल (Saigon Native Girls School) में हुई उसने वियतनाम में काफी तैनाव का-सा वातावरण बना दिया। विवाद तब शुरु हुआ जब अगली सीट पर बैठी वियतनामी लड़की को उठाकर पिछली सीट पर बैठने के लिये कहा गया और उस सीट पर एक फ्रांसिसी छात्रा को बैठा दिया जाए। जब उस पर वियतनामी लड़की ने सीट छोड़ने से इंकार कर दिया तो स्कूल की प्रिंसिपल ने उस छात्रा को स्कूल से निकाल दिया।

जब वियतनामी विद्यार्थियों ने इसका विरोध किया तो उन्हें भी स्कूल से निकाल दिया गया । इस बात ने तूल पकड़ लिया
और लोगों ने खुले रूप में जुलूस निकालने शुरु कर दिये। जब हालात बेकाबू होने लगे तो सरकार ने आदेश दिया कि लड़की को आदेश दोबारा स्कूल में वापस-लिया जाए।

(घ) हनोई के आधुनिक, नवनिर्मित इलाकों में चूहे अधिक थे।
उत्तर-
आधुनिकता लाने के नशे में फ्रांसिसियों ने हेनोई के एक भाग को आधुनिकता नगर में बदल डाला। वहाँ बढ़-चढ़ कर वास्तुकला के नवीनतम विचारों और इंजीनियरिंग के ढंगो को प्रयोग में लाया गया। ज़मीन के अन्दर ल्लश की नई-नई नालियों का निर्माण किया गया ताकि गन्दा पानी बाहर निकल जाए। परन्तु हेनोई का नया नगर भी बच न सका। चुहे पुराने नगर को छोड़ कर नए नगर की ओर बड़ी तेजी से बढ़ते चले गए और ल्लश की नई नालियों में घुलकर उन्होंने नगर के फ्रांसिसी भाग में प्लेग को एक बड़े पैमाने में फैला दिया।

इस मुसीबत को दूर करने के लिए फ्रांसिसियों ने 1902 ई. में चूहे पकड़ने की एक मुहिम चलाई। चूहे पकड़ने या मारने वालों को ईनाम दिए जाने की घोषणा की गई। परिणामस्वरुप एक ही दिन (20मई 1902 को) कोई 20,000 चूहे पकड़े गए। परन्तु जब चूहे पकड़ने का काम खत्म ही नही हुआ और उसमें धोखा होने लगा तो फ्रांसिसी सरकार ने इस मुहिम को बन्द कर दिया परन्तु ऐसा करने से फ्रांसिसी लोगों और वियतनामी लोगों में एक टकराव की सी स्थिति पैदा कर दी। उधर जब हेनोई के पुराने नगर की प्लेग को दूर करने के लिये कोई मयान न दिया गया तो बात और अधिक बिगड़ गई। इस प्रकार एक घटना के बाद दूसरी घटना ने वियतनाम के लोगों को साम्राज्यवाद का विरोध करने के लिए तैयार कर दिया।

प्रश्न 3.
टोकिन फ्री स्कूल की स्थापना के पीछे कौन से विचार थे। वियतनाम में औपनिवेशिक विचारों के लिहाज़ से यह उदाहरण कितना सटीक है?
उत्तर-
वियतनाम में पश्चिमी ढंग की शिक्षा देने के लिए 1907 ई. में टोफिन फ्री स्कूल खोला गया। इसकी तीन मुख्य विशेषतायें निम्नलिखित थीं।

(1) अन्य सम्राज्यवादियों की भाँति फ्रांसीसी यह चाहते _थे कि उनके अधीन स्थानीय लोग उनकी संस्छति और सभ्यता
में रंग जायें। यही उपेश्य उन्होंने टोंकिन फ्री स्कूल जैसे अनेक शिक्षा संस्थानों को खोलकर पूरा करने की सोची।
(2) इस स्कूल में विज्ञान, फ्रांसीसी भाषा और पश्चिमी विचारों की शिक्षा पर जोर दिया गया।
(3) इसके अतिरिक्त आधुनिक बनने के लिए वियतनामी छात्रों को पश्चिमी शैलियो को अपनाने के लिए भी उकसाया जाता था।

प्रश्न 4.
वियतनाम के बारे में फान यू त्रिन्ह का उपेश्य क्या था? फान बोई चा। और उनके विचारों में क्या भिन्नता थी?
उत्तर-
फान चू त्रिन्ह (phan Chu Trinh) और फान बोई चा। (phan Boi Chau) दोनों ही वियतनाम के महान् राष्टीय नेता थे परन्तु दोनों के वियतनाम राष्ट्रवाद के बारें में विभिन्न विचार थे।
फान चू त्रिन्ह (1871-1926) राजशाही/राजतन्त्र के कमकर विरोधी थे। वे इस बात के समर्थक नहीं थे कि फ्रासिसियों को देश से प्रजातन्त्रीय नियमों पर आधारित एक गणतन्त्र स्थापित होना चाहिए।

इसके विपरीत फान बोई चा (1867-1940) ने राजकुमार कुआंग ने (Cuong De) के नेतृत्व में एक क्रान्तिकारी संस्था की नींव रखी। इस प्रकार वह राजतन्त्र के पक्ष में था जबकि फान चू त्रिन्ह एक गणतन्त्र के पक्ष में था। पर दोनों ही अपने देश को स्वतन्त्र देखना चाहते थे। फान बोई चा की पुस्तक ‘द हिस्ट आफ द लॉस आफ वियतनाम’ (The History of the Loss of Vietnam) ने वियतनाम में राष्ट्रवाद के उत्थान में काफी सहयोग दिया।

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